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Most Magnetic Star: चंद्रमा की चर्चा के बीच ब्रह्मांड के सर्वाधिक चुंबकीय तारे की खोज

Most Magnetic Star: आज हम भले ही मनुष्य की वैज्ञानिक प्रगति की यह कहकर चर्चा करते हों कि वह चांद पर पहुंच गया है और सितारों के बारे में बहुत कुछ जान गया है, लेकिन अभी भी ब्रह्मांड में बहुत कुछ ऐसा है, जो हम नहीं जानते। पिछली एक सदी में हमने बहुत सारे तारों का पता लगाया है, ग्रहों का पता लगाया है, ग्रहों के चंद्रमाओं (उपग्रह) की खोज की है, लेकिन जब हम एक खोज करते हैं और उसके बारे में दुनिया को बता रहे होते हैं, तब तक विशाल रहस्यमयी ब्रहमांड का कोई और नया अंश हमारे सामने खुल जाता है, और हम विस्मय से भर जाते हैं।

एक ओर जब भारत चंद्रमा की सतह पर विक्रम और प्रज्ञान को उतारकर उसको जानने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी सप्ताह खगोल वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के तारे की खोज की हैं। इस प्रकार के तारों को मैग्नेटार (Magnetar) कहते हैं। ब्रह्मांडीय खोजों के इतिहास में यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।

Discovery of the most magnetic star amid chandrayaan-3 mission

एच डी 45166 नामक यह तारा पिछली लगभग एक शताब्दी से खगोलविदों की जांच के केन्द्र में रहा है। लेकिन वे अभी तक इसकी वास्तविक प्रकृति का पता नहीं लगा पाए थे। सिर्फ कुछ सामान्य जानकारियाँ ही उनके पास थीं कि मैग्नेटार हीलियम से समृद्ध है, आकार में सूर्य से बड़ा है और हमारे बाइनरी सिस्टम का एक हिस्सा है। नीदरलैंड के एमस्टर्डम विश्वविद्यालय के खगोल शास्त्री तोमर शेमार ने पिछले हफ्ते 'साइंस' में प्रकाशित एक लेख में खुलासा किया है कि कैसे यह सितारा उनके लिए जुनून बन गया था।

इससे पहले इसी तरह के हीलियम समृद्ध तारों का अध्ययन कर चुके शेमार एच डी 45166 की असाधारण विशेषताओं को लेकर चकित थे। इसमें उन्हें डब्ल्यू आर (वुल्फ रेएट) स्टार की विशेषताएं नज़र आ रही थीं, लेकिन उसका वर्णक्रम (स्पेक्ट्रा) असामान्य था। उनसे एकदम अलग। वुल्फ रेएट तारे असाधारण स्पेक्ट्रा वाले तारों का दुर्लभ समूह होते हैं, जो आयनित हीलियम और बहुत ज्यादा आयनित नाइट्रोजन या कार्बन उत्सर्जन की व्यापक लाइनें प्रदर्शित करते हैं। स्पेक्ट्रा सितारों की सतह पर भारी तत्वों की अत्यधिक मात्रा और हाइड्रोजन की कमी का संकेत देते हैं। डब्ल्यू आर तारे सभी प्रकार के तारों से अधिक गर्म होते हैं।

एचडी 45166 सबसे अलग था, जिसकी वजह से इसे पिछले मॉडलों द्वारा आसानी से नहीं समझाया जा सकता था। तारों के सामान्य विवरण में फिट न बैठने वाले एच डी 45166 की इन खूबियों को देखकर शेमार के मन में एक विचार कौंधा कि क्या ये तारा चुंबकीय हो सकता है। इसके बाद शेमार, खगोल वैज्ञानिक आंद्रे- निकोलस चेने व उनके सहयोगियों की टीम पिछले साल फरवरी में प्रशांत महासागर के बिग आइलैंड स्थित मौना केआ वेधशाला पहुंच गई और वहां सीएफएचटी (कनाडा-फ्रांस - हवाई टेलीस्कोप) के साथ इसके चुंबकीय होने की संभावनाओं का अध्ययन शुरू कर दिया। उन्हें सफलता मिली और वे ये जानने में सफल रहे कि एच डी 45166 एक विशाल मैग्नेटर यानि चुंबकीय तारा है।

यह पहली बार है जब एक विशाल हीलियम तारे में इतने सशक्त चुंबकीय क्षेत्र की मौजूदगी का पता चला है। ज्ञात ब्रह्मांड की सर्वाधिक चुंबकीय चीज माने जा रहे एच डी 45166 का चुंबकीय क्षेत्र 43 हजार गॉस है, जो किसी तारे में पाया गया अभी तक का सबसे शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र है। पृथ्वी से लगभग तीन हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इस मैग्नेटर का द्रव्यमान हमारे सूर्य से दोगुना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्यतः हीलियम सितारे एक रेड सुपरजॉइंट से विकसित होते हैं, लेकिन यह विशेष मैग्नेटर स्टार संभवतः दो मीडियम-मास वाले सितारों के विलय से निर्मित है।

मैग्नेटारों की उत्पत्ति की कहानी बड़ी दिलचस्प है। जब किसी तारे के अंदर घूमता हुआ परमाणु संलयन खत्म होने लगता है तो उसका गुरुत्वाकर्षण तारे के घटते ईंधन-भंडार में हाइड्रोजन परमाणुओं को कुचलकर उन्हें भारी हीलियम नाभिक में बदल देता है। ऐसे में आमतौर पर ब्रह्मांड उस तारे को अपना अंत सम्मानजनक बनाने के लिए कुछ विकल्प प्रदान करता है। सुपरनोवा ऐसा ही एक विकल्प है। इसके बाद कुछ तारे बौने या ड्वार्फ स्टार के रूप में अपना अस्तित्व बचाए रखते हैं, कुछ अपने पीछे घने अवशेष छोड़कर नष्ट हो जाते हैं। इन अवशेषों को न्यूट्रॉन स्टार कहा जाता है। कुछ न्यूट्रॉन स्टार अपने चुंबकीय क्षेत्र के कारण मैग्नेटार्स कहलाते हैं। हालांकि यह स्वयं में अभी भी रहस्य ही है कि ये चुंबकीय क्षेत्र कैसे निर्मित या उत्पन्न होता है।

हालाँकि एक थ्योरी यह मानती है कि मैग्नेटार्स का परिवर्तन इसके मूल में तीव्र गर्मी और घूर्णन के कारण होता है। लेकिन चूंकि मैग्नेटार्स को खोजना और निरीक्षण करना कठिन होता है, इससे इस थ्योरी का परीक्षण करना कठिन हो जाता है। एचडी 45166 के साथ भी यही स्थिति थी।

अब सवाल यह उठता है कि ब्रह्मांड के इस सबसे अधिक चुंबकीय तारे की खोज का पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ेगा? कहा जा रहा है कि इस विशाल मैग्नेटार एचडी 45166 का चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से एक लाख गुना अधिक है। ये इतना खतरनाक है कि अगर धरती के इतना पास आ गया जितना कि चंद्रमा है, तो दुनिया के सारे क्रेडिट कार्ड बेकार हो जायेंगे।

यह तो बहुत दूर की कौड़ी है। सच तो यह है कि अभी से इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी ही होगा। यह भी संभव है कि एचडी 45166 की खोज का पृथ्वी पर कोई बड़ा प्रभाव न पड़े। हालाँकि, कुछ संभावनाएं तो हैं जिन पर वैज्ञानिकों द्वारा चर्चा की गई है। इनमें एक यह है कि एचडी 45166 की खोज से हमें तारों के निर्माण और विकास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है। इस अनोखे तारे का अध्ययन करके, हम इस बारे में अधिक जानने में सक्षम हो सकते हैं कि तारे कैसे बनते हैं और अंततः कैसे मर जाते हैं।

एक और संभावना यह है कि एचडी 45166 की खोज से चुंबकीय क्षेत्र की प्रकृति में नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हो सकती है। एचडी 45166 का बेहद मजबूत चुंबकीय क्षेत्र एक रहस्य है और वैज्ञानिक अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका निर्माण कैसे हुआ। इस तारे का अध्ययन करके, हम चुंबकत्व के मूलभूत गुणों के बारे में अधिक जानने में सक्षम हो सकते हैं।

अंततः, एचडी 45166 की खोज के व्यावहारिक लाभ भी हो सकते हैं। जैसे कि एचडी 45166 के मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग बिजली उत्पन्न करने या नई प्रकार की मेडिकल इमेजिंग तकनीक बनाने के लिए किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि यह एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज है जो भविष्य में नई खोजों को जन्म दे सकती है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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