Opposition Unity: विपक्ष के नेताओं को भ्रष्टाचार में फंसाने के खिलाफ मिलकर लड़ने पर मतभेद
मनीष सिसोदिया को हाल ही में शराब घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कांग्रेस ने इस मामले में बयान देने या चिट्ठी पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।

यह तय था कि विपक्ष के कुछ नेता मनीष सिसोदिया के पक्ष में चिठ्ठी लिखेंगे। यह उम्मीद इसलिए थी, क्योंकि लोकसभा के चुनाव नजदीक हैं और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशें चल रही हैं। ऐसे में अगर केजरीवाल कहेंगे कि सिसोदिया के पक्ष में बोला जाए, तो वे बोलेंगे। वे इसलिए बोलेंगे क्योंकि विपक्ष को केजरीवाल की जरूरत है। और जरूरत इसलिए है क्योंकि वह भाजपा का खेल बिगाड़ सकें या न बिगाड़ सकें, विपक्ष का खेल जरूर बिगाड़ देंगे।

गुजरात, गोवा और उत्तराखंड में सब देख चुके हैं कि केजरीवाल ने किस तरह कांग्रेस का खेल बिगाड़ा था। वह ज्यादा राज्यों में विपक्ष का खेल न बिगाड़े, इसलिए सभी नेता सिसोदिया के पक्ष में खड़े होंगे। लेकिन कांग्रेस ने सिसोदिया के पक्ष में कोई बयान देने या ऐसी चिठ्ठी पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया, जिसमें लिखा गया था कि सिसोदिया निर्दोष है। केजरीवाल ने अगर किसी का खेल बिगाड़ा है, तो कांग्रेस का ही।
विपक्ष के जिन 9 बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को सिसोदिया के पक्ष में चिठ्ठी लिखी है, उन्होंने चिठ्ठी में यह भी लिखा है कि वह निर्दोष है। चिठ्ठी में यह भी लिखा है कि जनता ही सर्वोच्च है और लोकतंत्र का सम्मान किया जाना चाहिए। शायद उनका इशारा शराब घोटाले के बाद हुए एमसीडी चुनावों की ओर है, जिसमें आम आदमी पार्टी जीती है।
वैसे संविधान की दुहाई देने वाले नेता, जब फंसते हैं तो न्यायपालिका और विधायिका का घालमेल करने लगते हैं। अगर वोटों से अपराधियों का फैसला किया जाएगा, तो लालू यादव पर चारा घोटाले का केस चलाने की जरूरत ही क्या थी, वह तो चारा घोटाले के बाद भी चुनाव जीत रहे थे। अगर जनता की अदालत को ही फैसला करना था तो उन्हें सजा क्यों काटनी पड़ी।
अब आप को बताते हैं कि किस किस नेता ने सिसोदिया के समर्थन में चिट्ठी लिखी है। सबसे पहला नाम है तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का, जिनके साथ मिल कर अभी हाल ही में केजरीवाल ने एक रैली की थी। चन्द्रशेखर राव की बेटी कविता का नाम भी शराब घोटाले में आया है। सीबीआई एक बार उनसे पूछताछ कर चुकी है और उनकी गिरफ्तारी भी कभी भी हो सकती हैं, क्योंकि दक्षिण की शराब लॉबी से केजरीवाल और सिसोदिया की मुलाक़ात कविता चन्द्रशेखर ने ही करवाई थी।
दूसरी नेता हैं ममता बनर्जी। ममता बनर्जी खुद तो किसी जांच का सामना नहीं कर रही, लेकिन उनकी पार्टी के कई सांसद, मंत्री विधायक घोटालों में फंसे हुए हैं। पार्थो चटर्जी, अणुब्रत मंडल, फिरहद हकीम आदि कई लोग अभी भी जेल में हैं। ममता बनर्जी का भतीजा अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी पर ईडी की जांच चल रही है। तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं पर शारदा घोटाले की तलवार भी लटक ही रही है। पिछले साल ममता की केबिनेट के एक मंत्री पार्थो चटर्जी की निकट सहयोगी के घर से नोटों का जखीरा मिला था, जिसे सारी दुनिया ने देखा। वह अभी भी जेल में है।
इसके बाद नाम आता है तेजस्वी यादव का। रेलवे में नौकरी के बदले लोगों की जमीनें हड़पने के मामले में वह खुद जमानत पर रिहा है। इसके बाद नाम आता है फारूख अब्दुल्ला का। 113 करोड़ के क्रिकेट घोटाले में वह भी जमानत पर रिहा है। चिठ्ठी पर दस्तखत करने वालों में अगला नाम अखिलेश यादव का है, जिनकी पार्टी के कई नेताओं के घरों पर आजकल बुलडोजर चल रहा है।
अभी पिछले साल विधानसभा चुनाव के समय जब अखिलेश यादव ने अपनी सम्पत्ति का खुलासा किया था, तो उसमें पता चला था कि वह जब मुख्यमंत्री थे तो उनकी संपत्ति चार गुना बढ़ गई थी, जबकि 2017 से 2022 तक विपक्ष में रहते सिर्फ 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। पिछले 22 साल में उनकी सबसे कम कमाई 2017 से 2022 के बीच योगी काल में हुई। तो जांच की तलवार तो उन पर भी लटक सकती है। इसके अलावा शरद पवार और उद्धव ठाकरे हैं, जिन्हें सीबीआई और ईडी का डर सता रहा है। आठवां और नौंवा नाम आम आदमी पार्टी के दोनों मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल और भगवंत सिंह मान का है।
चिठ्ठी की वही भाषा है, जिसका आम आदमी पार्टी के नेता उपयोग करते हैं। चिठ्ठी में चिठ्ठी में लिखा है कि 2014 के बाद केन्द्रीय जांच एजेंसियां ज्यादा सक्रिय हो गई है, और वे विपक्ष के नेताओं के खिलाफ सक्रिय हैं। सिसोदिया की गिरफ्तारी को राजनीतिक षड्यंत्र बताया गया है। चिठ्ठी लिखने वाले नेताओं ने लिखा है कि देश के लोग सिसोदिया की गिरफ्तारी से नाराज हैं।
लेकिन कांग्रेस ने इस चिठ्ठी पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया। सुप्रीमकोर्ट ने जिस दिन सिसोदिया को जमानत देने का आदेश देने से इंकार कर दिया था, उस दिन कांग्रेस के नेता अजय माकन ने शराब घोटाले की निष्पक्ष जांच करवाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि शराब घोटाले में कमाया गया पैसा पंजाब और गुजरात के चुनाव में खर्च किया गया।
गुजरात और गोवा में नुकसान पहुँचाने के बाद अब केजरीवाल और भगवंत मान कर्नाटक पहुंच गए हैं। इसके बाद वे मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और राजस्थान में भी कांग्रेस को हानि पहुँचाने जाएंगे। कांग्रेस बखूबी समझ रही है कि आम आदमी पार्टी के विस्तार की कीमत कांग्रेस अदा कर रही है। शायद इसीलिए सिसोदिया के बचाव में अन्य विपक्षी नेताओं के साथ उतरने से कांग्रेस ने इंकार कर दिया।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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