Delhi CM: भ्रष्टाचार पर प्रहार या विपक्ष के नेताओं पर वार?
Delhi CM: लोकतंत्र के महापर्व आम चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद एक पार्टी के मुखिया की गिरफ्तारी को लेकर कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब देने से शासन सत्ता के जिम्मेवार लोग अक्सर बचते रहे हैं।
केन्द्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति का दावा करती है, लेकिन चुनावी चंदे में हुई हेरा-फेरी को लेकर खुद दबे पांव बच निकलने की कोशिश भी करती है। शराब घोटाले में जांच एजेंसियों को पहले से पता था कि घोटाले में केजरीवाल की संलिप्तता है तो उन्हें पहले ही क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया? क्योंकि तीसरे सम्मन के बाद गिरफ्तार करने का अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के पास था। फिर दो साल तक इंतजार करने के पीछे की मंशा क्या थी?

घोटाले में शामिल होने के बावजूद दो साल तक गिरफ्तारी नहीं हुई तो चुनाव तक रुककर भी इसे अंजाम दिया जा सकता था। यही जल्दबाजी जांच एजेंसियों को तो कटघरे में खड़ा करती ही है, सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान उठाती है।
क्या सरकार आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता से भयभीत है, जैसा कि आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं? क्या केंद्र की वर्तमान सरकार 2024 के चुनाव में जीत को लेकर जो 400 पार का दावा कर रही है, उसे अंजाम देने के लिए इस तरह की कार्यवाहियों की जरूरत है?
समूचा विपक्ष एकजुट होकर मोदी सरकार के खिलाफ अटैक के मूड में है। कांग्रेस, सपा, राजद, एनसीपी के शरद पवार, सीपीएम आदि विपक्षी दलों के नेताओं ने झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के बाद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, तथा कहा है कि न प्रधानमंत्री को और न ही उनकी सरकार को ऐसा करना शोभा देता है।
विपक्ष ने चुनौती दी है कि लोकतंत्र में रणभूमि में उतरकर लड़ना चाहिए और डटकर मुकाबला करना चाहिए। लेकिन वर्तमान सरकार का मुखिया डरा हुआ है इसीलिए देश की सारी संस्थाओं की ताकत अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा है कि भाजपा के पास तीन सूत्री एजेंडा है। पहला, जो भी बीजेपी का विरोध करेगा, उसे जेल के पीछे भेजा जाएगा। दूसरा, जो बीजेपी का विरोध करेगा उसके फंड खत्म कर दिए जाएंगे और तीसरा, यदि कोई अपराधी पेरोल पर बाहर आएगा तो बीजेपी उसके साथ गठबंधन करने में नहीं हिचकेगी।
पिछले दिनों आए आंकड़ों को आगे कर विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि साल 2014 से 2022 के बीच जिन 121 बड़े राजनेताओं से जुड़े मामलों की जांच ईडी कर रही है उनमें 115 नेता विपक्षी पार्टियों से है, यानी 95% मामले विपक्षी दलों के खिलाफ ही दर्ज हैं।
लोकराज में लोक लाज का बड़ा महत्व होता है। शासन के शीर्ष पर बैठे हुए व्यक्ति की हर एक बात को गंभीरता से लिया जाता है, यहां तक की नीतियों, कार्यक्रमों के साथ-साथ उसके खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा की भी चर्चा नजीर बनती है। अगर आपको याद हो तो हमारे देश के एक पूर्व गृह मंत्री को आतंकी हमले के दिन बार बार कपड़े बदलने के कारण पद से त्यागपत्र देना पड़ा था।
यह बात भी सही है कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार कोई नई चीज नहीं है, लेकिन मतभेदों के बावजूद संवाद की निरंतरता लोकतंत्र की सेहत के लिए जरूरी मानी जाती है। अब इसका सर्वथा अभाव होता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव से ठीक पहले पार्टी का खाता फ्रिज किए जाने के मामले को भी राजनीति प्रेरित बताया है।
मौजूदा मामले में तथ्य है कि कथित शराब घोटाला मामले में नौ बार सम्मन भेजने के बाद भी अरविंद केजरीवाल पूछताछ के लिए नहीं गए। वह प्रवर्तन निदेशालय के सम्मन को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताते रहे। फिर उन्होंने कहा कि अगर ईडी अदालत का आदेश ले आए तो पूछताछ के लिए हाजिर हो जाएंगे। जब उन्हें लगा कि जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार कर सकती है तो उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में गुहार लगाई कि आम चुनाव तक उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। इस पर अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया।
इस मौके का फायदा उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने उनके आवास पर छापा मारा और कुछ देर बातचीत करने के बाद उन्हें अपने दफ्तर ले गई और उनके गिरफ्तारी की घोषणा कर दी। हालांकि केजरीवाल की गिरफ्तारी की आशंका उसी समय से जताई जा रही थी जब उन्हें चौथा सम्मन भेजा गया था।
खुद आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी सार्वजनिक मंचों से कहते फिर रहे थे कि केंद्र सरकार अरविंद केजरीवाल की कभी भी गिरफ्तारी करवा सकती है। इसी हफ्ते सीबीआई ने जब कहा कि शराब घोटाला मामले में अभी कुछ और बड़े लोग गिरफ्तार होंगे, तो पक्का हो गया कि केजरीवाल जल्दी ही सलाखों के पीछे होंगे। कथित शराब घोटाले को लेकर पिछले एक डेढ़ वर्ष से खूब सियासत भी हुई है आम आदमी पार्टी की सरकार पर आरोप है कि उसने गलत तरीके से नई आबकारी नीति बनाई और भारी रिश्वत लेकर लोगों को शराब के ठेके बांट दिए।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि इस पूरे घोटाले के मुख्य षड्यंत्रकारी केजरीवाल हैं। इस तरह उनकी मुश्किलें बढ़ गई है। सवाल है कि केजरीवाल इतने समय तक क्यों जांच एजेंसियों के सवालों से बचने का प्रयास करते रहे। जैसा कि वे दावा करते हुए नहीं थकते थे कि आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार पार्टी है, और उसके पास कुछ भी छुपाने को नहीं है तो फिर क्यों बचते रहे। क्या वे इस बात से अनजान थे कि प्रवर्तन निदेशालय के सम्मन की अवहेलना से उनके खिलाफ मुकदमा बन सकता है।
फिर यह सवाल भी लोगों के जेहन में बना हुआ है कि जब केजरीवाल सचमुच दोषी हैं, उन्होंने ही शराब घोटाले की साजिश रची थी, तो प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी गिरफ्तारी में इतना समय क्यों लगाया, जबकि तीन सम्मन देने के बाद ही उन्हें गिरफ्तार करने का अधिकार था। इसी समय को उसने क्यों चुना जब लोकसभा चुनाव की तारीख घोषित हो चुकी है। इससे आम आदमी पार्टी की आशंका पुख्ता होती जान पड़ती है कि जांच एजेंसियों ने केंद्र के इशारे पर केजरीवाल को चुनाव प्रचार से दूर रखने के मकसद से ही ऐसा किया है।
मगर इन राजनीतिक आरोपों प्रत्यारोपों और ईडी की कार्रवाई के बाद भी लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि क्या वास्तव में शराब घोटाला हुआ है और दिल्ली सरकार की उसमें भूमिका है भी या नहीं?
कौन सही है, कौन गलत, इसका फैसला तो अदालत से होगा, लेकिन भारतीय राजनीति का यह दुखद अध्याय है कि जो व्यक्ति राजनीति से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आया हो उसे ही भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। सवाल यह है कि क्या चुनावी राजनीति में किसी भी दल के लिए बिना भ्रष्टाचार के राजनीति करना संभव है? अगर कट्टर ईमानदारी का दावा करने वाले केजरीवाल भ्रष्टाचार की शरण में जा सकते हैं या उन्हें साजिशन भ्रष्टाचार में लिप्त बताया जा सकता है, तो फिर मान लेना चाहिए की राजनीति में भ्रष्टाचार इतना बड़ा दानव है जिसे सहज ही नहीं हराया जा सकता।
केजरीवाल की विडंबनात्मक स्थिति वस्तुतः उन सभी लोगों के लिए एक चुनौती पैदा करती है जो राजनीति को भ्रष्टाचार से मुक्त देखना चाहते हैं। चुनावी फंड के मामले में भ्रष्टाचार की व्यापकता उजागर हुई है, तो केजरीवाल के मामले में भ्रष्टाचार की गहराई का पता चला है। यह सभी प्रकरण चेतावनी दे रहे हैं और हमें इन्हें चेतावनी के रूप में ही लेना चाहिए। क्योंकि इन कार्रवाइयों से राजनीतिक दलों, जांच एजेंसियों की कलई खुल रही है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
Delhi Ring Metro Network: PM मोदी ने लॉन्च की देश की पहली रिंग मेट्रो, 3 नए कॉरिडोर की भी नींव, हर डिटेल -
GPRA Type-5 Quarters Delhi: महिला दिवस पर PM मोदी का तोहफा! सरोजनी नगर में महिलाओं को दी नए घरों की चाबी -
Delhi Power Cut: दिल्लीवालों कि बिगड़ेगा संडे! नेहरू प्लेस- साकेत समेत कई इलाकों में बिजली ठप, देखें शेड्यूल -
Ajit Pawar Plane Crash: हादसे की जांच की मांग पर केजरीवाल से मिले रोहित पवार, DGCA पर लगाए आरोप -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में मौसम का डबल अटैक! अगले 24 घंटों में आने वाला है नया संकट, IMD ने जारी किया अलर्ट -
क्या जिंदा है खामेनेई? दुनिया को दिया गया धोखा? पूर्व जासूस का दावा- 2-3 लोगों को पता है सुप्रीम लीडर कहां हैं -
Silver Price Today: चांदी में बड़ी गिरावट! 29000 रुपये सस्ती, 36 दिन में ₹1.25 लाख गिरे दाम, क्या है रेट? -
तो इसलिए बदले जा रहे CM, गवर्नर–सीमांचल से नया केंद्रशासित प्रदेश? नया राज्य या UT बनाने के लिए क्या है नियम? -
IPS LOVE STORY: प्यार के आगे टूटी जाति की दीवार! किसान का बेटा बनेगा SP अंशिका वर्मा का दूल्हा -
T20 World Cup फाइनल से पहले न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने लिया संन्यास, क्रिकेट जगत में मची खलबली, फैंस हैरान -
Balen Shah Rap Song: वो गाना जिसने बालेन शाह को पहुंचा दिया PM की कुर्सी तक! आखिर क्या था उस संगीत में? -
PM Kisan Yojana: मार्च की इस तारीख को आएगी पीएम किसान की 22वीं किस्त! क्या है लेटेस्ट अपडेट?












Click it and Unblock the Notifications