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दिव्या काकरान का सम्मान करने की बजाय अपमान करने पर क्यों उतर आई केजरीवाल सरकार?

हाल ही में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ खेलों में कुश्ती में कांस्य पदक जीतने वाली दिव्या काकरान और दिल्ली की केजरीवाल सरकार पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार एवं सहायता के मामले में आमने-सामने हैं। युवा पहलवान काकरान ने अपना यह आरोप दोहराया है कि वर्षों तक दिल्ली के लिए पदक लाने के बावजूद उन्हें उचित सुविधाएं और सम्मान नहीं मिला। इस बारे में दिल्ली सरकार के दो जवाब सामने आए हैं। इनमें से एक जवाब शिक्षा उप निदेशक (खेल) का है जबकि दूसरा जवाब दिल्ली जल बोर्ड उपाध्यक्ष और आप विधायक सौरभ भारद्वाज की तरफ से आया है।

CWG22 winner Divya Kakran vs Kejriwal government

दूसरे जवाब पर पहले चर्चा करते हैं। दिल्ली के लिए कई मैडल जीत चुकी दिव्या ने सुविधाओं और सम्मान के अभाव का मामला पहली बार नहीं उठाया है। उन्होंने 2018 में मुख्यमंत्री केजरीवाल की मौजूदगी में भी यह बात कही थी। 2022 में कॉमनवेल्थ खेलों में दोबारा पदक जीतने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की बधाई वाली ट्वीट पर उनसे सम्मान और सुविधाओं की फिर से मांग की।

खिलाड़ी के इस अनुरोध से आम आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज इतने खफा हुए कि उन्होंने ट्वीट कर दिया कि उनके अनुसार दिव्या कभी दिल्ली की तरफ से खेली ही नहीं। हालांकि उनकी अपनी सरकार का रिकॉर्ड बताता है कि 2011 से लेकर 2017 तक वह दिल्ली का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। खेल और खिलाड़ियों के प्रति आम आदमी पार्टी सरकार की उपेक्षा का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि सरकार में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग खिलाड़ियों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगाने से पहले अपना ही रिकॉर्ड तक देखना गवारा नहीं समझते।

आप विधायक को हालांकि इसका भी जबाव देना चाहिए कि यदि कॉमनवेल्थ विजेता खिलाड़ी का दिल्ली से कोई संबंध नहीं है तो मुख्यमंत्री ने सम्मान समारोह में उन्हें क्यों बुलाया था? भारद्वाज यहीं नहीं रुके। उन्होंने और उनकी पार्टी नेता शालिनी सिंह ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार का समर्थन करने वाली खिलाड़ी दिल्ली से सम्मान-सुविधाएं कैसे मांग सकती हैं। उन दोनों नेताओं ने इस खिलाड़ी को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।

हालांकि सच यह है कि इन दोनों नेताओं को खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। देश के आम नागरिकों की तरह खिलाड़ियों को भी यह अधिकार है कि वह राजनीति में भाग लें, अपनी राय व्यक्त करें या किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करें। इस आधार पर भेदभाव वस्तुतः खेलों के राजनातिकरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कुचलने का भद्दा प्रयास है।

आइए अब शिक्षा उप निदेशक (खेल) के जबाव पर चर्चा करें। सरकार के इस जबाव में बताया गया कि दिव्या 2010 से लेकर 2017 तक दिल्ली की तरफ से खेलती रही हैं और इस दौरान उन्हें एक लाख निन्यानवे हजार रुपए प्राप्त हुए। यह जबाव दिल्ली में खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं-पुरस्कार के अभाव का प्रमाण है।

दिव्या अपनी श्रेणी में राष्ट्रीय चैंपियन और देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा रही हैं। ऐसी खिलाड़ी को सरकार तैयारियों, खानपान और प्रशिक्षण के लिए मात्र दो हजार रुपए प्रतिमाह दे रही है। दो हजार रुपए प्रति माह से दिल्ली सरकार खिलाड़ियों से ओलंपिक या विश्व चैंपियन जीतने की उम्मीद कर रही है। हालांकि इस जवाब में यह भी साफ नहीं किया गया है कि इस राशि में कहीं प्रतियोगिताओं के लिए आने-जाने का किराया या दैनिक खर्च तो शामिल नहीं किया गया है।

दिल्ली सरकार पर उपेक्षा और प्रोत्साहन के आरोप लगाने वाली दिव्या काकरान अकेली खिलाड़ी नहीं हैं। ओलंपिक खिलाड़ी सार्थक भांबरी भी ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। 2020 में टोक्यो ओलंपिक से पहले दिल्ली में अपने साइन बोर्ड देखकर भांबरी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की कि पोस्टरों पर करोड़ों खर्च करने की बजाय सरकार यदि इसका कुछ हिस्सा हमारी सुविधाओं पर खर्च करती तो बेहतर होता।

बकौल भांबरी "मैंने कहीं देखा है कि ओलंपिक के लिए होर्डिंग्स और पोस्टरों पर करोड़ों खर्च किए गए हैं। हालांकि उन्होंने अगर इसका 10-15 प्रतिशत भी ओलंपिक में जाने से कुछ माह पहले हमारी तैयारियों के लिए हमें दिया होता तो हम बेहतर प्रदर्शन करने के लिए इसका बेहतर उपयोग कर पाते।"

गौरतलब है कि 2020 ओलंपिक से पहले दिल्ली की केजरीवार सरकार ने दिल्ली के खिलाड़ियों के बड़े-बड़े बोर्ड लगवाए थे जो खिलाड़ियों से ज्यादा अपनी ब्रांडिंग के लिए थे। इस पूरे मामले में चिंताजनक यह है कि आम आदमी पार्टी आखिर खिलाड़ियों के प्रति इतनी असंवेदनशील क्यों है। मामला सिर्फ इतना था कि एक खिलाड़ी ने सिस्टम की खामियां उजागर कीं। सरकार को चाहिए था कि खुले मन से खिलाड़ियों की दिक्कतें सुनी जातीं और उनके लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाता।

आम आदमी पार्टी की सरकार खिलाड़ी को सिर्फ खिलाड़ी के रूप में देखने की बजाय जिस तरह से उनका राजनीतिक बंटवारा कर रही है वह न सिर्फ दिल्ली के लिए बल्कि अंतरर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भारत के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है। खिलाड़ियों के नाम पर इस तरह की स्तरहीन राजनीतिक सोच से केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी को बचना चाहिए।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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