China and India: मीडिया के जरिए जनमत को प्रभावित करने का विदेशी षड्यंत्र?
China and India: कुछ दिन पहले पूर्व न्यायाधीशों एवं राजदूतों समेत 250 से अधिक बुद्धिजीवियों ने भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है। इसमें इन सभी प्रतिष्ठित लोगों ने 'न्यूज़क्लिक' नामक वेबसाइट के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई की मांग की है। न्यूजक्लिक वेबसाइट चलाने वालों पर चीनी हितों के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिकी अरबपति नेविल राय सिंघम से धन प्राप्त करने का आरोप है। इन बुद्धिजीवियों ने कहा है कि चीन द्वारा गुप्त रूप से वित्त पोषित यह पोर्टल हमारे लोकतंत्र को चुनौती दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी खबरों और छल-कपट से भारतीय मतदाताओं को बरगलाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में 'न्यूयॉर्क टाइम्स' में छपी खबरों के अनुसार अमेरिकी उद्योगपति नेवेल रॉय सिंघम अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे कई देशों समेत भारत में भी चीन सरकार व चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का प्रोपेगैंडा अभियान चलाता है। गैर लाभकारी संगठनों एवं शेल कंपनियों की आड़ में चीन अपने दुष्प्रचार को फैलाने के लिए रॉय को भारी मात्रा में फंडिंग कर रहा है। रॉय दान के रूप में मिले इस पैसे को दुनिया भर के तथाकथित उदारवादी एवं प्रगतिशील संगठनों को दे रहा है, जो उदारता, प्रगतिशीलता एवं समानता के नारों की आड़ में चीनी सरकार के इशारे पर स्थानीय जनमत को प्रभावित एवं भ्रमित करने में जुटे हैं।

गौरतलब है कि नेवेल खुद को कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बताता है। वह थॉटवर्क नाम की आईटी कंपनी का फाउंडर और चेयरमैन है। नेविल ने अमेरिका सहित दुनियाभर के कई देशों में गैर सरकारी संगठनों को एक साल में 27.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 2,275 करोड़ रुपये बांटे हैं। नेविल का दुष्प्रचार तंत्र कई मीडिया कंपनियों तक फैला हुआ है। नेवेल ने भारत में चीनी दुष्प्रचार और एजेंडा चलाने के लिए न्यूजक्लिक को जरिया बनाया। न्यूजक्लिक को नेवेल की कंपनियों व उसके समर्थन वाले दूसरे स्रोतों से करीब 38 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 20 करोड़ रुपये निर्यात भुगतान के रूप में मिले हैं, जबकि 10 करोड़ रुपये एफडीआई के तौर पर मिले। इसके अलावा 1.5 करोड़ रुपये दफ्तर के रखरखाव के लिए मिले। शेष रकम सीधे तौर पर न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को दी गयी।
इन बातों की पुष्टि ईमेल्स की उन शृंखलाओं से भी होती है जो न्यूज़क्लिक के निदेशक प्रबीर पुरकायस्थ, सीपीआईएम के प्रकाश करात, विभिन्न पत्रकारों और नेवेल राय सिंघम के बीच हुई है। न्यूज़क्लिक के खिलाफ दर्ज मनी लांड्रिंग जाँच के सिलसिले में प्रवर्त्तन निदेशालय को ये ईमेल्स प्राप्त हुए। 'टाइम्स नाऊ' की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूजक्लिक के पुरकायस्थ और सिंघम के बीच भारत-चीन सीमा विवाद को खबरों में कैसे रिपोर्ट करना है, इसे लेकर ईमेल के जरिए बात हुई है।
इसके अलावा भी भारत में चीन से संबंधित अन्य खबरें कैसे दिखाईं और प्रकाशित की जाएं, इस बारे में दोनों के बीच बातचीत हुई। इन ईमेल्स में चीन के नजरिए को बढ़ावा देने की वकालत की गई है। इन ईमेल्स में से एक में लिखा है, "मुझे लगता है कि भारत-चीन सीमा विवाद के मुद्दों पर चर्चा करते समय हम भारत और चीन के बीच (भूटान के बाईं तरफ) डॉटेड लाइन से चूक गए।" इसमें आगे कहा गया है, "साफ तौर पर चीन और भारत को अपने देशों के अंदर दो नक्शे रखने होंगे।" चीनी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले एक विवादास्पद नक्शे के साथ, ईमेल में ये भी कहा गया है, "ये नक्शा चीन के कूटनीतिज्ञों की तरफ से बनाया गया है, जहाँ चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है।" इन ईमेल्स से साफ पता चलता है कि किस प्रकार चीनी हितों को साधने एवं बढ़ावा देने के लिए मीडिया को उपकरण की तरह इस्तेमाल करने की साजिशें रची जा रही थी।
यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि इससे पूर्व जब 2021 में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चीनी हितों को बढ़ावा देने के लिए न्यूज़क्लिक पर शिकंजा कसा था, तब कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने लोकतंत्र एवं अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इसका पुरजोर बचाव किया था। उस समय भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाया था कि चीन भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने, रक्षा प्रणाली की जासूसी करने और भारत से चीन में मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए मोबाईल फोन एप्लिकेशन, गेमिंग एप्लिकेशन और कुछ फर्मों का उपयोग कर रहा था। तब सरकार ने टिकटॉक, जेंडर, शीइन और कैमस्कैनर जैसे ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। PUBG मोबाइल और फ्री फायर जैसे लोकप्रिय मोबाइल गेम्स को भी भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार भारत ही नहीं, विश्व भर में चीन विरोधी भावनाओं से ध्यान हटाने और चीन समर्थक माहौल तैयार करने के लिए कई स्वयंसेवी संगठनों और मीडिया संस्थानों तथा पत्रकारों पर अरबों डालर खर्च कर रही है।
भारत की प्रमुख समाचार एजेंसियों में भी चीन का खासा प्रभाव है। स्मरण रहे कि गलवान में चीनी हमले के तुरंत बाद एक एजेंसी ने चीनी राजदूत का लंबा साक्षात्कार चलाया था। उसमें राजदूत ने चीनी पक्ष को सही ठहराया था। एक अन्य एजेंसी का तो चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के साथ वर्षों पुराना अनुबंध है। हालांकि इंटरनेट के माध्यम से समाचार संस्थानों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता की आड़ में एजंडा चलानेवालों में किस प्रकार चीनी रेवड़ियां बांटी जा रही हैं, न्यूजक्लिक मामला उसकी जीती-जागती मिसाल है। इसी तरह कुछ वर्ष पूर्व ही दिल्ली के एक पत्रकार द्वारा पत्रकारिता की आड़ में चीन के लिए जासूसी करने का मामला सुर्खियों में आया था।
इनके अलावा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा कई भारतीय पत्रकारों, राजनेताओं और सभी पार्टियों एवं विचारधाराओं से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को चीन की यात्रा हेतु समय समय पर आमंत्रित किया जाता रहा है और उन्हें चीन द्वारा स्पॉन्सर किए जा रहे प्रोपेगेंडा में भागीदार बनाया जाता रहा है। इनमें कई ऐसे लोग भी हैं जो दिखावे के लिए बाहरी तौर पर चीन के खिलाफ बोलते और लिखते नजर आते हैं लेकिन चीन से गुपचुप संबंध बनाए रखते हैं।
इस तरह के कई मामले हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता एवं खोजी पत्रकारों की गहन पड़ताल से भी उजागर नहीं हो पाए हैं। दुनिया भर में राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करने के चीन के प्रयासों से यह अनुमान लगा पाना कठिन नहीं कि भारत में भी पर्दे के पीछे न जाने ऐसे कितने ही खेल चल रहे होंगें।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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