Child Sexual Abuse: अश्लीलता के प्रसार से यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहे बच्चे-बच्चियां

सोमवार 25 सितंबर को गुड़गांव से 35 वर्षीय सतेंद्र की गिरफ्तारी की गई है। सतेंद्र पर 6 साल की बच्ची, जो उसे मामा कहती थी, के साथ बलात्कार का आरोप है। बच्ची आरोपी के कमरे में खेलते खेलते जब गई उस समय आरोपी मोबाइल पर अश्लील वीडियो देख रहा था। उसने कमरा बन्द कर घिनौने काम को अंजाम दिया और बच्ची को धमकाया कि वह किसी को ना बताये। जब बच्ची की माँ ने बच्ची को देखा तो उसकी हालत देखकर सकते में आ गई और बेटी से पूछताछ करने पर पूरी घटना की जानकारी मिली।

अभी पिछले हफ्ते ही नोएडा में 6 साल की बच्ची से रेप का आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर की पिस्तौल छीन कर भागने के उपक्रम में पुलिस की गोली का शिकार होकर घायल हुआ था। आरोपी सौरभ पर पोक्सो के तहत एफ आई आर दर्ज़ है। इसी तरह 5 दिन पहले ही मधुबनी से सलामत अली अंसारी को 6 साल की बच्ची से बलात्कार और निर्मम हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने कुकर्म को महाराष्ट्र के भिवंडी में अंजाम दिया था। बच्ची से हैवानियत करके उसे मार दिया था और उसकी लाश बाल्टी में छुपाकर रखी थी।

Children victims of sexual harassment due to the spread of obscenity

इसी तरह पिछले महीने पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग से दिल बैठाने वाली घटना सामने आई थी। एक 68 वर्षीय हैवान 9-10 वर्षीय बच्ची को एक महीने से अपनी हवस का शिकार बना रहा था। बच्ची जब भी अकेली होती वो घर आता और बलात्कार करता। रोती बच्ची को चुप कराने के लिए वो हर बार 10 रुपया दे देता था और जान से मारने की धमकी भी देता था। इसी तरह एक सितंबर को मेरठ से भी ऐसी ही घटना सामने आई थी जहां एक छोटी बच्ची के साथ खेत में दुष्कर्म किया गया था। उस बच्ची का बलात्कारी 40 वर्षीय पड़ोसी है। दोनों केस में पोक्सो के तहत F.I.R. दर्ज कर ली गई है। गाँववालों के मुताबिक दोनों ही नशेड़ी हैं और लड़कियों व महिलाओं से पहले भी कई बार यौन दुर्व्यवहार कर चुके हैं।

अगस्त में ही गोरखपुर में 3 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने भी यही सवाल उठाया था कि आर्थिक तरक्की की सीढी चढ़ता भारत सामाजिक मामलों में कहाँ खड़ा है? मासूम घर से बाहर अपनी माँ के साथ सोयी थी। मानवता के कलंक ने वही से उसका अपहरण किया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने ऐसे शख़्स की तलाश आरम्भ किया जिस पर बलात्कार या यौन हिंसा जैसे आरोप लगे हों। पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। अपनी ही सगी भतीजी के साथ बलात्कार का एक आरोपी जमानत पर छूट कर बाहर आया था। सख्ती के साथ पूछ-ताछ में उसने बच्ची के अपहरण, बलात्कार, हत्या और फिर कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लाश के साथ भी दुष्कर्म की बात कबूल की।

ऐसी घटनाएं ना तो पहली है और ना ही आखिरी होगी। हमारी मनुष्यता, सभ्यता और कर्तव्य परायणता सवालों के कटघरे में हैं, जहाँ हम थोड़ी चर्चा, कुछ कैंडल मार्च, लड़कियों पर थोड़े और पहरे लगाकर, कानून व्यवस्था को थोड़ा गाली देकर आरोप मुक्त हो जाएंगे। फिर देश के किसी कोने में किसी बच्ची, किसी नाबालिग को हवस का शिकार बनाया जाएगा। हम पुनः चंद पलों के लिए जागेंगे और इस प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती ही रहेगी।

25 जुलाई 2023 को बाराबंकी की ऐसी ही घटना सामने आई जब 40 वर्षीय दरिंदे ने पड़ोस की 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के प्राइवेट पार्ट में गन्ना डाला और उसका गला दबाकर मृत समझ तालाब में फेंक दिया। पर उस बच्ची को कष्ट भोगना था। वो बच गई। उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार उसका प्राइवेट पार्ट इतना क्षत-विक्षत हो गया था कि वो कभी माँ नहीं बन पाएगी।

जुलाई में ही राजस्थान पाली की घटना जहाँ 50 साल के रिश्तेदार ने 5 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया पर असफल रहा। खून से लथपथ बच्ची और आरोपी के कपड़े पर भी खून को देख माँ को शक हुआ। इसी माह केरल में 5 साल की बच्ची का बलात्कार और हत्या हुई थी जिस मामले ने खूब तूल पकड़ा था। पुलिस ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी, पर इस माफीनामे का क्या फ़ायदा है? पुलिस थाने ऐसे मामलों से भरे पड़े हैं। ये तो एक दो महीने की वो प्रमुख घटनाएं हैं जो खबरों में दिखाई दीं। हर पल हैवानियत का नंगा नाच चल रहा और हम समाज, परिवार, कानून, प्रशासन, मनुष्य के रूप में सिर्फ बड़े से शून्य ही साबित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 2021 में, देश में हर दिन कम से कम 90 नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया। ये मामले भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और धारा 4 (पेनेट्रेटिव यौन हमले के लिए सजा) और 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए सजा) के तहत यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं।

पोक्सो के तहत सबसे जघन्य यौन अपराधों से संबंधित धाराओं के तहत आने वाले मामलों में 33,503 पीड़ितों की आयु प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि हमारी सोच कितनी विकृत हो चुकी है। इनमें से 675 छह साल से कम उम्र के बच्चे थे। 3,297 पीड़ित बच्चे 6 से 12 साल के बीच थे। 13,256 बच्चियाँ 12 से 16 साल के बीच की थी और 16,275 पीड़ित 16 से 18 वर्ष के बीच की आयु की थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि इन पीड़ितों में से 317 लड़के थे। मतलब कि बच्चियाँ तो बच्चियाँ, अब बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। आंकड़ें यह भी बताते हैं कि यौन अपराध की शिकार बच्चियों के 96% अपराधी रिश्तेदार, परिवार या जान पहचान वाले हैं।

ऐसा नहीं है कि इन समस्याओं का समाधान नहीं है। समाधान है लेकिन कमी है इच्छा शक्ति की। हम वासना के अंधे पुरुषों का पारिवारिक बहिष्कार भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे मामले सामने आते हैं तो उनकी कमियां या तो ढक दी जाती हैं या दोष लड़की के माथे मढ़ दिया जाता है। गलती से केस दर्ज हो गया तो जमानत करा दी जाती है। और यहाँ विडंबना यह है कि परिवार के पुरुष का पक्ष महिलाएं ही लेती हैं। अविवाहित है तो ब्याह भी करा दिया जाता है।

हम लोक- लाज का टोकरा स्त्री पर ही रखते हैं, चाहे वह 5 साल की बच्ची ही क्यों न हो। पाली वाले केस में माँ बाप ने तथाकथित लोक लाज के भय से हफ्ते भर बाद केस दर्ज करवाया। इस भय से कितने केस तो दर्ज ही नहीं होते हैं यह एक कड़वी सच्चाई है। पता नहीं यह कौनसी संस्कृति है कि जिसका शोषण हो रहा हो "मर्यादा" उसी की भंग होती है? जो अमर्यादित होकर अमानवीय कृत्य करता है, उसके लिए तो सुनाई नहीं देता कि उसकी इज्जत चली गई।

समाज को भी अपनी पुरुषवादी मानसिकता का बचाव करने से पहले उसके दूरगामी परिणाम जरूर सोच लेने चाहिए। मीडिया पर अश्लीलता का प्रचार प्रसार बढ़ता जा रहा है, और उसके लिए समाज भी कम दोषी नहीं हैं। सस्ती लोकप्रियता और कमाई के लालच में अश्लील वीडियो बनाकर सोशल और डिजिटल मीडिया पर डाले जा रहे हैं। वीडियो बनाने और दिखाने वाले तो अपनी कमाई कर लेते हैं लेकिन ऐसे अश्लील कंटेंट का असर अमर्यादित पुरुषों के जघन्य कृत्यों के रूप में दिख रहा है। अपनी बेटियों के लिए हम कैसा भविष्य तैयार कर रहे हैं, यह समाज के सभी सदस्यों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। अन्यथा, लालची बाजार की अनैतिकता, हमारे सामाजिक ढांचे को नष्ट भ्रष्ट कर देगी।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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