CIC on Salary to Imams: इमाम को वेतन तो पुजारी को क्यों नहीं?
उदय माहूरकर ने इमामों के वेतन को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि करदाताओं के योगदान से सरकार इमामों को वेतन कैसे दे सकती है, जबकि अन्य धर्मों के पुजारियों एवं धर्मगुरुओं हेतु ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
CIC on Salary to Imams: यदि मस्जिद के इमामों को सरकारी खजाने से पैसा दिया जा रहा है और यह पैसा देना सही है तो फिर यह वेतन मंदिर के पुजारियों और गुरुद्वारे में ग्रंथी को क्यों नहीं दिया जा सकता? यह सवाल लंबे समय से चौक चौराहों की चर्चाओं में शामिल होता रहा था लेकिन केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहूरकर की टिप्पणी के बाद देश भर में इस मुद्दे पर बहस प्रारंभ हो गई है। संविधान जब कहता है कि देश में सभी नागरिक और धर्म समान हैं, फिर किसी एक मजहब को चुनी हुई सरकार द्वारा विशेष सुविधा क्यों?

मुख्य सूचना आयुक्त की टिप्पणी का मामला दिल्ली सरकार द्वारा इमामों को वेतन से जुड़ा है। सुभाष अग्रवाल एक आरटीआई कार्यकर्ता हैं। वे आरटीआई अधिनियम के अन्तर्गत दिल्ली की मस्जिदों में इमामों को वेतन देने के फैसले से संबंधित जानकारी चाहते थे। इसके लिए उन्होंने आवेदन लगाया था।
अग्रवाल ने दिल्ली के अंदर उन मस्जिदों की संख्या जानने की भी कोशिश की, जहां इमामों को सरकारी खजाने से नियमित वेतन दिया जा रहा है। अग्रवाल ने यह भी जानना चाहा कि इमामों को दिए जाने वाली कुल राशि कितनी है, वार्षिक खर्च में उन पर कितना भुगतान किया जा रहा है।
अग्रवाल ने सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत यह भी जानना चाहा कि क्या हिंदू मंदिरों के पुजारियों को भी वह सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो दिल्ली सरकार में इमामों को उपलब्ध है। यह सवाल उन्होंने दिल्ली के उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री के कार्यालयों से पूछा भी लेकिन उन्हें अपनी आरटीआई आवेदन का जवाब नहीं मिला। उनके सवाल को मुख्य सचिव के कार्यालय ने राजस्व विभाग और दिल्ली वक्फ बोर्ड को भेज दिया।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अग्रवाल को अपने जवाब में कहा कि कोई भी प्रश्न उनसे संबंधित नहीं है। इससे तय हो गया कि जवाब वहां से मिलना नहीं है। इसके बाद मामला सूचना आयुक्त के पास पहुंचा। सूचना आयुक्त ने इन दोनों विभागों के जन सूचना अधिकारियों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए पेश होने को कहा। सीआईसी ने दोनों विभाग के अधिकारियों से मामले से जुड़ी सारी फाइलें सुनवाई के लिए लाने को भी कहा।
उसके बाद जो कुछ हुआ, उसकी उम्मीद तो प्रश्न पूछने वाले सुभाष अग्रवाल को भी नहीं होगी। उनके द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सूचना आयुक्त ने कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला संविधान के अनुरूप नहीं है। करदाताओं के पैसे को किसी धर्म विशेष पर खर्च करना गलत है। ये बात संविधान के आर्टिकल 27 में कही गई है।
यहां केंद्रीय सूचना आयुक्त यह कहना चाह रहे थे कि 1993 में सर्वोच्च न्यायालय ने इमामों को तनख्वाह देने को सही ठहराया था वो निर्णय संविधान के अनुरूप नहीं है। सूचना आयुक्त का यह भी कहना था कि इससे अलग अलग धर्म और वर्ग के लोगों के बीच में एक गलत संदेश गया है।
सूचना आयुक्त माहुरकर का कहना था कि इससे न केवल देश में एक गलत संदेश गया, बल्कि समाज में द्वेष की भावना भी पनपी है। अपने जवाब में सूचना आयुक्त ने कहा कि 1947 से पहले भी मुसलमानों को विशेष प्रावधान के अन्तर्गत रियायतें हासिल हुई थीं। इसी प्रकार के विशेषाधिकारों ने भारत के बंटवारे में तुष्टीकरण की भूमिका अदा की।
अपने आदेश में सूचना आयुक्त का कहना था कि दिल्ली सरकार हर साल वक्फ बोर्ड को 62 करोड़ रुपये का अनुदान देती है, जबकि वक्फ की अपनी आमदनी मात्र 30 लाख मासिक है। इस तरह दिल्ली में वक्फ बोर्ड इमामों को पारिश्रमिक देने के लिए करदाताओं के धन का उपयोग कर रहा है।
दिल्ली में कुछ समय पहले यह बात सामने आई थी कि दिल्ली सरकार द्वारा मस्जिद के मुअज्जिन और इमाम को हर माह 16 हजार और 18 हजार रूपया वेतन के रूप में दिया जाता है। यह भारत के अलग अलग धर्मों में विभाजन पैदा करता है। सूचना आयुक्त के अनुसार जितनी बातें उनके संज्ञान में लाई गई, सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए ये मसले बेहद अहम हैं।
आयुक्त ने अपने आदेश में यह भी अनुशंषा की है कि संविधान के अनुच्छेद 25 से लेकर 28 को लागू करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता सुभाष अग्रवाल की आरटीआई एप्लीकेशन के जवाब में दिल्ली सरकार द्वारा अनावश्यक देरी करने पर चिन्ता व्यक्त की और दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वो याचिकाकर्ता को हर्जाने के रूप में 25 हजार रुपए दें।
केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा सुनाया गया यह निर्णय ऐतिहासिक है। सूचना आयुक्त ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने इमामों को तनख्वाह देने के फैसले को सही ठहराया था वो संविधान के अनुरूप नहीं है।
यह भी पढ़ें: जामा मस्जिद के शाही इमाम के बिगड़े बोल, बोले- जो महिलाओं को टिकट देते हैं वह इस्लाम से बगावत करते हैं
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
Raghav Chadha:'परिणीति ने खत्म किया पति का करियर',अभिनेत्री पर क्यों भड़के लोग? क्या है PM मटेरियल वाली बात? -
Ajay Devgn की जीप के सामने आया बच्चा, 15 Minute तक बीच सड़क पर 25 लोगों ने जमकर पीटा, क्या हुई बात? -
US Pilot कौन है, जिसे F-15E विमान मार गिराने के बाद ईरान की IRGC ने दबोचा? पेंटागन चुप क्यों? -
LPG Cylinder Price Today: आज बदल गए घरेलू गैस के दाम? सिलेंडर बुक करने से पहले चेक करें नई रेट लिस्ट -
BJP लिस्ट से बाहर ‘सिंघम’ Annamalai! क्यों नहीं मिला टिकट? ‘साउथ फेस’ गायब होने के पीछे ये है अंदर की कहानी -
Gold Rate Today: गुड फ्राइडे पर सोने में बड़ी गिरावट! ₹4245 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22K, 18K के रेट -
Gold Rate Today: सोना लगातार हो रहा सस्ता, 3500 गिरे दाम, क्या खरीदारी का सही मौका? 22K-18K गोल्ड के नए रेट -
समोसा से पैटरनिटी लीव तक—क्या यही वजह बनी राघव चड्ढा को राज्यसभा में ना बोलने देने की! 7 मुद्दे चर्चा में -
Seema Haider Kids: सीमा हैदर ने छठी औलाद का रखा ऐसा नाम, पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची! 5 बच्चों की क्या पहचान? -
Hormuz Strategic Plan: होर्मुज का खेल खत्म! भारत के हाथ लगा वो 'जादुई रूट', तेल -LPG की किल्लते होंगी दूर -
'जो डर गया, समझो मर गया'- Raghav Chadha को लेकर AAP ने खोला मोर्चा, आतिशी-सौरभ भारद्वाज ने गिनवाईं गलतियां -
IPL 2026: 'धोनी के साथ मेरा रिश्ता एक दाग', कौन हैं Lakshmi Rai जिसने MS संग रिलेशन को बताया जिंदगी की गलती?












Click it and Unblock the Notifications