Ajit Ninan: चला गया कार्टून की दुनिया का सुपरस्टार अजीत नैनन
Ajit Ninan: कार्टून एक कोना ही रहा है अखबारों में, लेकिन इस कोने ने हर पाठक को अपनी ओर आकर्षित किया है। बहुधा जो बातें सीधे तौर पर नहीं कही जा सकतीं वो लाक्षणिक या व्यंगात्मक लहजे में कार्टून कैरेक्टर के जरिए बोल दी जाती हैं। अखबार के इस कोने को जीवंत करने वाले कार्टूनिस्टों में एक से बढ़कर एक नाम रहे हैं जो न केवल अखबार की संपादकीय नीति को, बल्कि बड़े पाठक वर्ग को भी प्रभावित करते थे। ऐसा ही एक नाम अजीत नैनन का रहा है जिनका 68 वर्ष की उम्र में 08 सितम्बर को मैसूर के उनके आवास पर निधन हो गया।
अजीत नैनन का जन्म 15 मई 1955 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने चेन्नई में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से बी.ए और एमए किया। वह कार्टूनिस्ट अबु अब्राहम के भतीजे थे और उनका पहला कार्टून स्कूल में पढ़ते समय प्रकाशित हुआ था, यह 1960 के दशक की बात है।

अजीत नैनन के काम को समझिए
अजीत नैनन द्वारा सृजित डिटेक्टिव मूंछवाला का कार्टून चरित्र बच्चों और युवाओं के बीच 80 के दशक में खूब लोकप्रिय हुआ। इस चरित्र की कहानियों को अजित नैनन इंडिया टुडे समूह की पत्रिका 'टारगेट' के लिए गढ़ रहे थे। पत्रिका 1991 में बंद हो गई। डिटेक्टिव मूंछवाला और उसके कुत्ते पूंछ की पैठ युवाओं के बीच सालों तक बनी रही। पत्रिका को अपने इलस्ट्रेशन के लिए आज भी याद किया जाता है, जिसमें इलस्ट्रेशन की गुणवत्ता, विस्तार से किया हुआ काम, जिसमें चरित्र को गढ़ते हुए, उसके आस पास की बारीकियों पर अच्छे से काम किया जाता था।
अमेरिकन लेखक, कवि शेल सिल्वरस्टिन ने अजीत नैनन जैसे कार्टूनिस्टों के बारे में कभी लिखा था, "यदि आपको यह समझना है कि कोई लेखक या कार्टूनिस्ट क्या सोचते हैं या कैसे सोचते हैं, इसको महसूस करना हो तो आप उनके काम को देखिए और समझिए इतना काफी है।''
जब अजीत नैनन के काम को देखते हैं तो वे अपने समय के दूसरे कार्टूनिस्टों से इसलिए अलग दिखते हैं क्योंकि उनके कार्टून सिर्फ भारतीय राजनीति के आस पास मंडराने वाले कार्टून नहीं हैं। वे अपने कार्टून में उन दृश्यों को भी सफलता पूर्वक उकेर रहे थे, जिसे मीडिया चैनल और समाचार पत्रों में कवरेज नहीं मिल पा रहा था।
इस संदर्भ में बढ़ते प्रदूषण के सवाल को उठाते उनके एक कार्टून को याद किया जा सकता है। जिसमें गांधीजी के तीन बंदर के तर्ज पर चार बंदर दिखाए गए हैं। इनमें एक कहता है कि बुरा मत देखो, दूसरा कहता है कि बुरा मत सुनो और तीसरा कहता है कि बुरा मत बोलो। निनान ने देश में बढ़ रहे प्रदूषण की तरफ समाज का ध्यान केन्द्रित करने के लिए कार्टून में तीन बंदरों के साथ चौथा बंदर भी दिखाया है। कार्टून में इस चौथे बंदर ने अपनी नाक बंद कर रखी हैं ताकि वातावरण में फैले जहरीली हवा से अपना बचाव कर सके। वह बंदर मानो कह रहा है कि बुरी हवा में सांस मत लो। पर्यावरण पर आए संकट पर संकेत करने वाला यह एक शानदार कार्टून है।
कार्टूनिंग के सुपर स्टार
एक कार्टूनिस्ट ने उन्हें याद करते हुए लिखा कि जब वह 'इंडिया टुडे' में पहली बार उनसे मिलने के लिए गये तो वह इस अहसास के साथ गये कि वह अपने सुपर स्टार से मिलने जा रहे हैं। वास्तव में अजीत कार्टून की दुनिया के सुपर स्टार ही थे। उनके राजनीतिक व्यंग्य भी बेहद धारदार थे। केशव शंकर पिल्लई और रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण (आरके लक्ष्मण) जैसे कार्टूनिस्टों की कड़ी में अजीत का नाम भी शामिल किया जा सकता है।
नए कार्टूनिस्ट से अजीत बड़े प्यार से मिले। उनका काम देखा। उनके काम की सराहना की। अजीत ने उन्हें कहा कि तुम्हारे काम में सबसे खास बात यह है कि इस पर किसी कार्टूनिस्ट की छाप दिखाई नहीं देती है। फिर विदा करते हुए अजीत ने अपना बनाया हुआ बिल्कुल ताजा इलस्ट्रेशन शुभकामना संदेश के साथ उन्हें दिया। उन दिनों इस क्षेत्र में अपना हाथ आजमा रहे उस कार्टूनिस्ट ने लिखा कि अजीत नैनन से उनका बनाया हुआ इलस्ट्रेशन लेकर ऐसा लग रहा था कि जैसे बीसवी सदी में स्पेन के सबसे महान चित्रकार पाब्लो पिकासो ने अपनी बनाई कोई कृति हाथ में पकड़ा दी हो।
अमेरिकन कार्टूनिस्ट टेड रॉल ने एक जगह लिखा है कि ''मैं इसलिए अपने समय का गलती से सबसे अच्छा संपादकीय कार्टूनिस्ट हूं क्योंकि इस दौर के कार्टूनिस्ट बहुत खराब काम कर रहे हैं।'' टेड रॉल ने यह बात चाहे व्यंग्य में कही हो लेकिन आज के समय की ये सच्चाई है कि व्यंग्य कार्टून अब समाचार माध्यमों में हाशिए पर पहुंचा दिए गए हैं। जैसे समाचार पत्रों को इनकी बहुत आवश्यकता नहीं रह गयी है। कार्टून सिर्फ खाना पूर्ति के लिए एक कोने में डाल दिए जाते हैं। अब समाज में कार्टून को लेकर अधिक चर्चा नहीं होती। वहां से कोई बहस खड़ी नहीं होती। आज के कार्टून समाज से काट दिए गए मालूम पड़ते हैं। अब राजनीतिक कार्टूनों को भी अपने व्यंग्य की धार की वजह से नहीं बल्कि अश्लीलता और अभद्रता की वजह से ही चर्चा मिलती है।
विवादों से रहे दूर
अजीत निनान आज इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि इतना लंबा कॅरियर होने के बावजूद उन्हें पहचान काम की वजह से मिली, विवाद की वजह से नहीं। उनके कार्टून राजनीतिक विचारधारा और पार्टी देखकर किसी को रियायत नहीं देते थे। नवंबर 2015 में अजीत नैनन का कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी पर केन्द्रित कार्टून खूब वायरल हुआ था, जिसमें राहुल के साथ खड़ी सोनिया गांधी भाजपा के तानाशाही शासन की आलोचना करते हुए कहती है कि प्रधानमंत्री मोदी को हमारी कलेक्टिव लीडरशिप से सीखने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि जब सोनिया गांधी ऐसा कह रहीं हैं, कार्टून में दिखाया गया है कि कांग्रेस के सारे नेता उनके पैरों में दंडवत हैं।
अजीत के कार्टून में शब्द कम से कम इस्तेमाल होते थे और कार्टून की प्रस्तुति अपना संदेश देती थी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर उन्हें याद करते हुए लिखा "भारत के सबसे प्रतिभाशाली राजनीतिक कार्टूनिस्टों में से एक अजीत नैनन का आज निधन हो गया। उन्होंने अपने अनोखे अंदाज में इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ इंडिया को जीवंत बना दिया था।''
कार्टूनिस्टों के मददगार
कार्टून भले ही हमें हंसते गुदगुदाते हुए कोई गंभीर संदेश दे जाते हों लेकिन कार्टूनिस्टों की अपनी दुनिया इतनी खुशगवार नहीं है। कार्टूनिस्टों की संख्या कम है और मीडिया में उनके लिए जगह भी सिमटती जा रही है। डिजिटल एनिमेशन ने भी उनके सामने एक नये तरह की चुनौती पेश किया है। ऐसे में कार्टून के जरिए जीवन यापन उनके लिए एक कठिन काम हो चला है।
ऐसे कठिन समय में अजीत नैनन कार्टूनिस्टों की मदद करने के लिए भी तत्पर रहते थे। कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य उन्हें याद करते हुए लिखते हैं कि कैसे जब एक अंग्रेजी समाचार पत्र ने चीन संबंधित उनके कार्टून में बदलाव की मांग की और वे तैयार नहीं हुए तो उनका स्तम्भ समाचार पत्र ने रोक दिया। सतीश ने इस संबंध में विरोध दर्ज किया और अपना दुख सोशल मीडिया पर साझा किया जिसके बाद बड़ी संख्या में कला प्रेमियों और कलाकारों का उन्हें समर्थन मिला। उन्हें समर्थन करने वालों में अजीत नैनन का नाम भी शामिल था, जिन्होंने सतीश आचार्य के काम की सराहना और उन्हें आर्थिक सहयोग की पेशकश भी की।
सतीश आचार्य ने लिखा कि यह उनके लिए भावुक पल था। उन्होंने विनम्रता के साथ अजीत नैनन के प्रस्ताव के लिए ना कहा। सतीश के शब्दों में लिखा जाए तो आज कल हम किसी के लिए भी लीजेंड लिख देते हैं लेकिन भारतीय कार्टूनिंग में अजीत सच्चे अर्थो में लीजेंड हैं। वे सिर्फ अपने कार्टूनों के साथ ही हमारे बीच जीवित नहीं रहेंगे बल्कि उन बहुत सारे कामों के साथ भी हमारे बीच रहेंगे, जिनमें उनकी प्रेरणा हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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