Byju's Crisis: क्या अपनी ही आक्रामक नीति का शिकार हो गये बायजू रवीन्द्रन?
Byju's Crisis: जिस बायजू ने तेजी से तरक्की करते हुए एड टेक (EdTech) सेक्टर में अपनी छाप जमा दी थी, आज उसी बायजू को उसके विद्यार्थी छोड़कर जा रहे हैं, डायरेक्टर बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं, कर्जदाता अदालतों में घसीट रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय ऑडिट एजेंसियां साथ काम करने से मना कर रही हैं। जिस बायजू के खिलाफ आयकर विभाग, ईडी और कंपनी लॉ बोर्ड जांच कर रहे हैं, वह बायजू आज भी दावा कर रहा है कि बाउंस बैक करेगा और कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा। 29 जून को अपने कर्मचारियों के साथ 45 मिनट के अपने संबोधन में बीजू रवीन्द्रन ने माना कि एक साल से वे संकट में है, पर साथ ही यह विश्वास दिलाने की कोशिश भी की कि फिर से अच्छे दिन लौट आएंगे।
अब सवाल यह है कि शाहरूख खान को अपना ब्रांड एम्बेसेडर बनाकर, आईपीएल में खुद को प्रायोजक घोषित कर ट्यूशन की दुनिया में एक तूफान मचाने वाले वाले बायजू (मूल नाम बीजू) रवीन्द्रन अपना तिलिस्म बरकार रखेंगे, या इतिहास बनाते बनाते इतिहास में समा जाएंगे?

बायजू के विज्ञापन को रोजाना दसियों बार टीवी पर देखने वालों को संभवतः यह अंदाज नहीं होगा कि बायजू की दुनिया कितनी तिलिस्मी है। केरल का एक मैकेनिकल इंजीनियर कुछ लोगों को 'कैट' एक्जाम की तैयारी कराने से शुरूआत कर सिर्फ आठ साल पहले बायजू ऐप के जरिए एजुकेशन बाजार में उतरकर 10 हजार करोड़ का एम्पायर खड़ा कर देता है। दुनिया भर में घूम-घूम कर वह अपनी ट्यूशन की फैक्ट्री लगाता है। जो पहले से चल रही थी उन्हें मुंह मांगी कीमत दे कर खरीद लेता है। अपनी कमाई के बड़े बड़े आंकड़े पेश कर दुनिया भर से पैसे भी इकठ्ठा करता है। बायजू ने अभी तक 16 अधिग्रहण किए हैं, जिनमें भारत में मेडिकल की तैयारी करने वाली सबसे बड़ी संस्था आकाश इंस्टीट्यूट भी है। अपने मेगा विस्तार के लिए निवेशकों से बायजू ने 6 अरब डॉलर से अधिक के निवेश प्राप्त किए हैं। पर अब बायजू अपनी इसी आक्रामक नीति का शिकार हो रहा है। निवेशकों से लेकर ग्राहकों तक में बायजू को लेकर अफरा तफरी फैली हुई है।
बायजू की सफलता की कहानी किसी तिलिस्म से कम नहीं है। केरल के साधारण परिवार में जन्मे बायजू (बीजू) रवीन्द्रन को पहली ख्याति उस समय मिली जब उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए प्रवेश परीक्षा 'कैट' में 100 परसेंटाइल नंबर हासिल किए। उन्होंने खुद तो मैनेजमेंट की पढ़ाई नहीं की, लेकिन 2006 में उन्होंने कैट की परीक्षा में बैठने वालों को गणित की कोचिंग देनी शुरू कर दी। कुछ ही समय में रवींद्रन का ऐसा प्रभाव हुआ कि विद्यार्थी लाइन लगा कर उनकी कोचिंग की मांग करने लगे। यहीं से कोचिंग को बिजनेस मॉडल में बदलने का ख्याल आया और 2011 में रवींद्रन ने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड का गठन कर दिया। साथ में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट उनकी पत्नी दिव्या गोकुलनाथ थी। रवीन्द्रन ने अपने नाम बीजू को ही बायजू नाम का ब्रांड बना डाला और इस तरह दुनिया के सबसे बड़े एजुकेशन स्टार्टअप बायजू की नींव पड़ी।
अगस्त 2015 में, रवीन्द्रन ने बायजूज (Byju's) द लर्निंग ऐप को लॉन्च किया और फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। आज कंपनी का दावा है कि उसके पास 15 करोड़ छात्रों का रजिस्ट्रेशन है और उसके बिजनेस का आकार 22 अरब डॉलर का है। विश्व के 21 देशों में बायजू ऑनलाइन व ऑफलाइन कोचिंग सेंटर चला रहा है।
अब सवाल यह है कि जब सबकुछ अच्छा चल रहा है तब बायजू इस समय गहरे संकट में क्यों है? 2021 में कंपनी ने 4,000 करोड़ से अधिक के घाटे की बैलेंस शीट पेश की है। इसके लिए लोग बायजू प्रबंधन को ही एक मात्र दोषी मान रहे हैं। खासकर वित्तीय अनुशासनहीनता और पारदर्शिता की कमी के कारण बायजू के निवेशक कंपनी पर अविश्वास जताते हुए पैसे वापसी और प्रबंधन बोर्ड से अलग होने पर आमादा हैं। बायजू के कामकाज के तरीके पर सरकार को भी ऐतराज है। अगस्त 2022 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने बायजू की ऑडिट में गड़बड़ी पाई और मार्च 2021 में समाप्त होने वाले वर्ष के लिए समय पर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर नोटिस जारी किया। बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि अधिग्रहण की कुछ डील में गड़बड़ी के कारण बायजू ने अपने खाते को जानबूझ कर क्लोज नहीं किया।
अप्रैल 2023 में प्रवर्तन निदेशालय ने भी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत बायजू के कार्यालयों में तलाशी ली और कई दस्तावेज साथ ले गए। ईपीएफ में भी भारी अनियमितता का मामला दर्ज है।
बायजू के प्रति निवेशकों और विदेशी ऑडिटरों का विश्वास पूरी तरह डोल गया है और उसका सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय ऑडिट एजेंसी डेलॉइट ने कंपनी के काम से मना कर दिया। इसके साथ ही बायूज के बोर्ड में शामिल सिकोइया कैपिटल के जी वी रविशंकर, जुकरबर्ग इनिशिएटिव के विवियन वू और प्रोसस के रसेल ड्रेसेनस्टॉक के भी कपंनी छोड़ने की खबर आई है। बायजू ने खुद भी लगभग 5,000 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। लगभग इतने ही कर्मचारी इस्तीफा देकर जा चुके हैं। इस तरह मई 2023 तक बायजू को छोड़ने वालों की संख्या 10 हजार से अधिक हो गई है।
बायजू का अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं के साथ भी एक बड़ा विवाद चल रहा है। खासकर 1.2 बिलियन डॉलर के टर्म लोन बी (टीएलबी) पर गतिरोध तेज हो गया है। बायजू ने यह लोन 2021 में उत्तरी अमेरिका की कुछ ट्यूशन कंपनियों के अधिग्रहण के लिए लिया था। विदेशी कर्जदाताओं का कहना है कि नियम व शर्तोंं के मुताबिक बायजू को 5.5 प्रतिशत के साथ ब्याज देना था, जबकि बायजू का कहना है कि लोन देने वाली कंपनियां उनको परेशान कर रही हैं और कुछ सहयोगी कंपनियों में हिस्सेदारी मांग रही हैं। अब बायजू ने इन लेनदारों के खिलाफ ही मुकदमा कर दिया है।
साफ है, बायजू की चुनौतियां लगातार बढ़ रही है। डच निवेशक और रेटिंग एजेंसी प्रोसेस ने बायजू के बाजार मूल्यांकन को 22 अरब डॉलर से घटाकर 5.1 अरब डॉलर बताया है। यही नहीं उसने बायजू को 'गैर-नियंत्रित वित्तीय निवेश' के रूप में वर्गीकृत करना शुरू कर दिया है। ऐसे में बायजू के भविष्य पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी 2024 में आकाश इंस्टीट्यूट का एक आईपीओ लाने की योजना बना रही थी, मौजूदा समय में वह भी अधर में लटकता नजर आ रहा है।
हालांकि बायजू कोचिंग के संस्थापक बॉयजू रवींद्रन यह दुहाई दे रहे हैं कि वह कंपनी को खड़ा करने में 18 वर्षों से रोजाना 18 घंटे लगा रहे हैं और आने वाले 30 वर्षों तक ऐसे ही करते रहेंगे। परन्तु बड़ा सवाल यह है कि जिन गड़बड़ियों की खबर आ रही है उन्हें देखते हुए क्या वह अपनी मेहनत और ईमानदारी से कंपनी को ठीक कर पाएंगे या बायजू भी वी राजू की सत्यम साबित होगी?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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