BJP Survey: बिहार में संभावित नुकसान की भरपाई यूपी से करेगी भाजपा?
BJP Survey: भाजपा को केंद्र में फिर से सरकार बनानी है तो उसे यूपी और बिहार से फिर उतनी ही सीटों की दरकार होगी जितनी बीते दो चुनावों में रही है। इसलिए बिहार के साथ साथ यूपी में जहां भाजपा को कोई तगड़ी चुनौती नहीं है, पार्टी लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुट गयी है। भाजपा न केवल अपने सांसदों के काम काज की समीक्षा कर रही है, बल्कि अलग अलग सर्वे भी करवा रही है जिससे जनता के मूड का पता चल सके।
दरअसल यूपी को लेकर अतिरिक्त सावधानी का कारण बिहार में नीतीश कुमार का भाजपा से अलग होना है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन में थे तब बिहार की 40 सीटों में से 39 पर एनडीए को जीत मिली थी। एक सीट कांग्रेस को मिली थी, जबकि राजद का खाता नहीं खुला था। लेकिन अब नीतीश कुमार द्वारा राजद और कांग्रेस से गठबंधन करने के बाद भाजपा के लिए बिहार आसान नहीं रह गया है।

वर्ष 2014 में भी एनडीए नीतीश कुमार के बिना चुनाव में उतरी थी तथा 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। तब जदयू और राजद अलग-अलग लड़े थे जिसका फायदा बीजेपी को मिला था लेकिन इस बार दोनों एक साथ हैं जिसमें कांग्रेस भी शामिल है। बिहार में भाजपा को महागठबंधन की चुनौती के साथ उत्तर बिहार के क्षत्रियों की नाराजगी का डर भी सता रहा है। बिहार के क्षत्रिय मतदाता बीते दो लोकसभा चुनावों में पूरी तरह भाजपा के साथ थे, लेकिन आनंद मोहन सिंह की रिहाई का विरोध करने की वजह से क्षत्रिय मतदाताओं का एक वर्ग भाजपा से नाराज है।
खासकर उत्तर बिहार के जिलों में यह नाराजगी ज्यादा है, जिसका असर कई सीटों पर पड़ने की संभावना है। एनडीए गठबंधन को यूपी और बिहार की कुल 120 सीटों पर 2014 में 105 तथा 2019 में 103 सीटें मिली थीं। यह एनडीए को मिली कुल सीटों का लगभग 30 प्रतिशत था। लेकिन इस बार बिहार में एनडीए को महागठबंधन से तगड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। इसलिए भाजपा को केंद्र में सरकार बनानी है तो इन दोनों राज्यों से एक बार फिर 100 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। ऐसी मुश्किल स्थिति में भाजपा को बिहार में होने वाले नुकसान की भरपाई यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर ही संभव है। भाजपा इसी दिशा में काम कर रही है।
यूपी में माहौल भाजपा के अनुकूल है। यहां उसे विपक्ष से कोई तगड़ी चुनौती मिलती नहीं दिख रही है। इसके बावजूद भाजपा अपने सांसदों के काम एवं लोकप्रियता का सर्वे करा रही है। चुनाव के पहले पार्टी तीन सर्वे कराने वाली है। इसी सर्वे के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय किये जायेंगे। सर्वे टीम द्वारा समस्त लोकसभा क्षेत्रों में जाकर वर्तमान सांसद की छवि, जनता से व्यवहार का फीडबैक, क्षेत्र में सांसद की मौजूदगी तथा सोशल मीडिया पर सांसद के प्रति जनता के नजरिये का आकलन किया जा रहा है। हालांकि, कुछ सांसदों का टिकट कटना लगभग तय हो चुका है। पहले सर्वे में इनके कामों को लेकर जनता में नाराजगी दिखी है। कुछ सीटों पर सांसदों की उम्र को देखते हुए टिकट कटना निश्चित है।
तीन स्तर पर हो रहे इस सर्वे में मोदी एवं योगी सरकार के जनहित के कार्यों एवं उपलब्धियों का जनता में असर, राम मंदिर निर्माण एवं अन्य मंदिरों के उद्धार पर जनता की राय, राष्ट्रवाद का जनता में प्रभाव समेत कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई जायेगी। सर्वे में यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि अगर किसी सीट से मौजूदा सांसद का टिकट कटता है तो कौन सा उम्मीदवार बेहतर रहेगा, दूसरे दल से कौनसा उम्मीदवार मजबूती से लड़ सकता है, तथा कौन सा जातीय समीकरण जीत के लिये फिट बैठेगा। भाजपा 2024 के आम चुनाव में हर हाल में जीत सुनिश्चित करना चाहती है।
सर्वे में यह भी पता लगाया जायेगा कि विपक्षी दल जो मुद्दे उठा रहे हैं, उनकी जनता में कितनी स्वीकार्यता है। क्या उनके मुद्दों का प्रतिकूल असर भाजपा पर पड़ सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर भाजपा आगे की रणनीति तय करेगी। साथ ही भाजपा संगठन ने यूपी के सांसदों से परफार्मेंस रिपोर्ट भी मांगी है। इसके लिये सांसदों को एक फॉर्म दिया गया है, जिसमें उन्हें अपने कामों का ब्योरा देने के साथ क्षेत्र के 100 इन्फ्लुएंसर तथा 1000 विशिष्ट लोगों की लिस्ट देनी है। केंद्र व राज्य सरकार के लाभार्थियों से संपर्क करने के अलावा कितने सम्मेलन किये इसकी जानकारी भी सांसदों को देनी है।
2019 चुनावों में गठबंधन के साथ उत्तर प्रदेश की 64 सीटें जीतने वाली भाजपा 2024 में सभी 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। 2014 और 2019 के परिणामों के आधार पर भाजपा ने 16 लोकसभा सीटों को रेड जोन में रखा है। हारी हुई सीटों पर भाजपा विधानसभा चुनाव के बाद से केंद्रीय एवं यूपी के मंत्रियों को जिम्मेदारी देकर जीतने की तैयारी शुरू कर चुकी है। भाजपा ने जिन सीटों को रेड जोन में रखा है, उनमें रामपुर, आजमगढ़, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर, नगीना, संभल, मैनपुरी, अंबेडकरनगर, जौनपुर, लालगंज, श्रावस्ती, घोसी, गाजीपुर एवं रायबरेली शामिल हैं।
सर्वे के साथ भाजपा लोकसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा से भी गठबंधन करने की रणनीति बना रही है। सुभासपा के साथ आने से भाजपा को रेड जोन की जौनपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, गाजीपुर, घोसी तथा श्रावस्ती यानी कुल छह सीटों पर फायदा मिलेगा। राजभर को गठबंधन में शामिल करने के लिए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को जिम्मेदारी दी गई है। सुभासपा के अलावा रालोद को लेकर भी आकलन किया जा रहा है कि क्या उसके जुड़ने से पश्चिम यूपी में कोई फायदा मिल सकता है?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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