Bennu Asteroid: खतरनाक लेकिन मगर बड़े काम का है क्षुद्रग्रह बेन्नू
इस सप्ताह जिन चीजों को लेकर दुनिया सबसे ज्यादा उत्साहित और आशंकित नजर आ रही है, क्षुद्र ग्रह बेन्नू उनमें से एक है। इस क्षुद्रग्रह को लेकर दो एकदम अलग मिजाज की खबरें सामने आई हैं। पहली उम्मीद जगाने वाली है और दूसरी डरानेवाली। संयुक्त रूप से देखें तो बेन्नू की तुलना सोने से बने एक ऐसे विमान से कर सकते हैं, जो विस्फोटकों से भरा है।

इस क्षुद्रग्रह को बेन्नू नाम दिए जाने की भी एक कहानी है, जो इसके स्वरूप और स्वभाव जितनी ही रोचक है। इसके इस नामकरण का श्रेय जाता है उत्तरी कैरोलिना के तीसरी कक्षा के छात्र माइकल पुज़ियो को। माइकल ने 2012 में एरिज़ोना विश्वविद्यालय, द प्लैनेटरी सोसाइटी और लाइनर प्रोजेक्ट द्वारा इसका सुझाने के लिए नाम आयोजित एक प्रतियोगिता में दुनिया भर के 8,000 से अधिक छात्रों को पीछे छोड़कर यह जीत हासिल की थी। एक वर्ष बाद 2013 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनोमिकल यूनियन (आईएयू) ने भी बेन्नू नाम को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी। ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार बेन्नू प्राचीन मिस्र का देवता है जो सूर्य, सृजन और पुनर्जन्म से जुड़ा है और फीनिक्स संबंधी किंवदंतियों का प्रेरणास्रोत माना जाता है।
बेन्नू का पता, सबसे पहली बार 1999 में लगा था। यह करीब आधा किलोमीटर चौड़ा है और इसका द्रव्यमान लगभग 78 बिलियन किलोग्राम है। इसका अध्ययन करने और इसकी सतह पर मौजूद सामग्री का एक नमूना एकत्र करने के लिए नासा ने 2016 में ओसाइरिस-रेक्स मिशन लॉन्च किया था, जो 2018 में बेन्नू पर पहुंचा और दो साल तक इसका अध्ययन करने के बाद 2020 में बेन्नू की सतह सामग्री का 250 ग्राम वजन का नमूना लेकर वापसी की राह पकड़ी और पिछले महीने सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आया।
हाल ही में नासा ने इन नमूनों के अध्ययन से अभी तक प्राप्त निष्कर्षों को सार्वजनिक किया है। इनसे पता चला है कि बेन्नू एक बहुत ही सक्रिय क्षुद्रग्रह है, जिसकी सतह से धूल और कण नियमित रूप से निकलते रहते हैं। बेन्नू वैज्ञानिकों की अपेक्षा से कहीं अधिक कार्बनयुक्त है। यह कार्बनिक अणुओं का एक अच्छा स्रोत हो सकता है, जो पृथ्वी पर जीवन के विकसित होने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक माने जाते हैं। साथ ही इस पर भारी मात्रा में पानी की मौजूदगी के भी संकेत मिले हैं।
इस सबने वैज्ञनिकों को सोच में डाल दिया है कि क्या बेन्नू धरती या इसके जैसे किसी अन्य ग्रह से टूटकर बना है या पृथ्वी पर पानी किसी उल्का अथवा धूमकेतु की टक्कर से आया। वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे है कि इन नमूनों से प्रारंभिक सौर मंडल के बारे में और अधिक जाना जा सकेगा। और पता लगाया जा सकेगा कि पृथ्वी और जीवन के निर्माण में बेन्नू जैसे क्षुद्रग्रहों ने किस तरह से अपना योगदान दिया होगा।
इस तरह से बेन्नू जीवन की उत्पत्ति के अबूझ रहस्यों को समझने में वैज्ञानिकों की काफी सहायता कर सकता है। लेकिन, इन्हीं खबरों के बीच एक खबर ऐसी भी है, जो सारे उत्साह पर पानी फेर देती है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि 24 सितंबर 2182 को बेन्नू पृथ्वी से टकरा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इससे पृथ्वी को इतना नुकसान होगा, जितना कि दो दर्जन परमाणुबम गिराए जाने से हो सकता है।
इससे होने वाली तबाही का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। अगर यह धरती के किसी हिस्से से टकराता है तो करीब दस किमी गहरा गड्ढा बन जाएगा और इस जगह से करीब एक हजार किमी के दायरे में कुछ भी नहीं बचेगा। अगर यह समंदर में गिरता है तो सुनामी जैसी जल प्रलय की वजह बनकर बहुत बर्बादी कर सकता है। बेन्नू के गिरने से अमेरिका, कनाडा, रूस, चीन, जापान, दक्षिण व उत्तरी कोरिया, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया व ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जो समुद्र के करीब हैं।
हालांकि इस तरह की टक्कर होने की संभावना 2,700 में से एक है, यानि करीब 0.037%। यह दर बहुत कम लगती है, फिर भी अगली डेढ़ सदी में धरती के पास से गुजरने वाले अन्य क्षुद्रग्रहों की तुलना में बहुत ज्यादा है। इसलिए बेन्नू को अधिक खतरनाक माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में जिन क्षुद्रग्रहों से पृथ्वी का सामना होने वाला है उनमें 300 मीटर चौड़ा 1999 एएन10 (वर्ष 2044 में पृथ्वी से टकराने की संभावना 847,000 में से 1), 275 मीटर चौड़ा एपोफिस (वर्ष 2068/150,000 में से 1), 120 मीटर चौड़ा 2007 वीके184 (वर्ष 2100/1.3 मिलियन में से 1) प्रमुख हैं।
अतीत में भी ऐसे कई क्षुद्रग्रह पाए गए हैं, जो पृथ्वी के बहुत करीब रहे हैं। अनुमान लगाया गया है कि 6-12 मीटर आकार के कई दर्जन क्षुद्रग्रह हर साल चंद्रमा जितनी दूरी पर पृथ्वी के पास से गुजरते हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम का ही पता लग पाता है। पृथ्वी के गुजरने से पहले खोजा जाने वाला पहला क्षुद्रग्रह, 1979 टीसी3 पृथ्वी के 65,000 मील पास से गुजरा था। इसके बाद 1994 एक्सएम1 हमसे 70,000 मील की दूरी से गुजरा, जो ज्ञात इतिहास में पृथ्वी के इतने करीब से गुजरने वाला सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह था। इसके बाद 2004 एक्सपी14, 266,000 मील और 2012 टीसी4, सात हजार मील की दूरी से गुजरा था। यह उस समय का सबसे निकटतम ज्ञात क्षुद्रग्रह था। तीन साल पहले भी 2020 एसडब्ल्यू क्षुद्रग्रह पृथ्वी के 16,000 मील की दूरी पर से होकर गुजरा।
बेन्नू चाहे कितना ही खतरनाक क्यों न हो, लेकिन हमें बहुत ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हमारे पास इससे निपटने की तैयारी के लिए डेढ़ सदी का समय है। नासा और दुनिया की और भी कई प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां हमसे टकराने के इरादे से पृथ्वी के करीब आ रहे क्षुद्रग्रहों को पथ-विचलित करने की तकनीकों के विकास पर काम कर रही हैं।
जहॉं तक बेन्नू की बात है, वह 2182 से पहले भी एक बार पृथ्वी के करीब आएगा, 25 सितंबर, 2135 को। लेकिन यह निकटता भी पृथ्वी से लगभग लगभग 130,000 मील की दूरी के बराबर है। इसके बाद बेन्नू की कक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। अंतरिक्ष एजेंसियां बेन्नू पर कड़ी नजर रख रही हैं ताकि बेन्नू की कक्षा को बेहतर ढंग से समझने और इसके भविष्य के प्रक्षेप पथ की सटीक भविष्यवाणी की जा सके और जोखिम का आकलन कर उसे कम से कम करने के लिए योजनाएं विकसित की जा सकें।
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