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इंडिया गेट से: राजनीतिक पैंतरेबाजी में केजरीवाल सबसे तेज

'एकला चलो रे' की नीति अपनाते हुए भी अरविन्द केजरीवाल अपनी पार्टी को राजनीतिक फोकस में ले आए हैं। राहुल गांधी की पदयात्रा से ज्यादा केजरीवाल के बयान सुर्खियाँ बन रहे हैं। वह सिर्फ चौंकाने और लुभाने वाले बयान ही नहीं देते। कुछ काम भी ऐसे करते हैं कि सुर्खियाँ बटोर लेते हैं। मीडिया को पता होता है कि उनके काम में भी ड्रामा है और बयान में भी ड्रामा है। इसके बावजूद मीडिया उन्हीं को तवज्जो देता है, क्योंकि अब जनता को भी राजनीति ड्रामेबाजी और विवादास्पद हरकतें ही आकर्षित करती हैं।

arvind kejriwal is ahead of others in political acumen

पिछले दिनों कांग्रेस ने आरएसएस की यूनिफार्म के अंग रहे खाकी नेकर में आग की फोटो ट्विटर पर डाल दी, तो मीडिया की सुर्खी बन गई। जबकि यह एक निम्न स्तर की भद्दी हरकत थी। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उस तस्वीर को रि-ट्विट करते हुए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। इस एक हरकत ने जितनी सुर्खियाँ बटोरी, उतनी राहुल गांधी की पदयात्रा और बयानों ने नहीं बटोरी, जबकि महत्वपूर्ण पदयात्रा है।
इसी तरह दिल्ली सरकार के घोटालों की खबरों ने उतनी सुर्खियाँ नहीं बटोरी, जितनी इस आरोप ने कि भाजपा आम आदमी पार्टी के विधायक खरीद रही है। दिल्ली सरकार के तीन तीन घोटालों की सीबीआई की जांच चल रही है, लेकिन सुर्खियाँ बटौर रहे हैं केजरीवाल के बयान और उनकी हरकतें।

गुजरात में हाल ही में उन्होंने थ्री व्हीलर चालक के घर खाना खाने को उसी तरह पब्लिसिटी दिलवाई, जो पंजाब में और उससे पहले दिल्ली में कर चुके थे। सिर्फ उसे दोहराया ही नहीं, पब्लिसिटी के लिए पुलिस से भी भिड़ गए। पहली बार चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल ने विधायकों की खरीद फरोख्त होने का नाटक किया था। उस नाटक का एक प्रमुख पात्र आम आदमी पार्टी का वह कार्यकर्ता टीवी पर आकर बता चुका है कि उसी ने आम आदमी पार्टी के विधायकों को अरुण जेटली और गडकरी के नाम से फोन किया था।

उसी आरोप को अब केजरीवाल ने चार विधायकों को सामने लाकर दिल्ली में दोबारा दोहराया है। लेकिन भाजपा की मांग के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करवाई, क्योंकि दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है। अब उसी नाटक को पंजाब में किया गया है कि भाजपा ने आम आदमी पार्टी के दस विधायकों को 25-25 करोड़ रूपए की ऑफर दी है। लेकिन पंजाब में एफआईआर दर्ज करवा दी, क्योंकि पंजाब पुलिस पंजाब सरकार के अधीन है।

दोनों ही मामलों में समझने वाली बात यह है कि दोनों राज्यों में स्पीकर आम आदमी पार्टी का है। क़ानून के मुताबिक़ दलबदल या पार्टी तोड़ने के लिए दो-तिहाई विधायक चाहिए होते हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना और गोवा में कांग्रेस के दो तिहाई विधायक टूटे हैं। कर्नाटक और मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस के दो-तिहाई विधायक इकट्ठे नहीं हुए थे, वहां दलबदल करने वाले विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की थी।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 62 विधायक हैं, जब तक 41 विधायक इकट्ठे नहीं होंगे, दलबदल नहीं हो सकता। इसी तरह पंजाब में 92 विधायक हैं, जब तक 62 विधायक इकट्ठे नहीं होते, दलबदल नहीं कर सकते। दोनों राज्यों में 20-20 विधायक भी इस्तीफा दे दें, तो भी आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं गिरने वाली, तो फिर कोई 20-20-25-25 करोड़ दे कर विधायक क्यों खरीदेगा, जैसा कि केजरीवाल आरोप लगा रहे हैं। केजरीवाल ने साफ सुथरी छवि वाले लोगों को नेता बनाने का वायदा कर पार्टी बनाई थी। लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी के 92 विधायकों में से 52 पर और 11 मंत्रियों में से 7 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

केजरीवाल आज कल गुजरात और हिमाचल में ही सबसे ज्यादा समय लगा रहे हैं, जहां वह मुफ्त सुविधाओं के बड़े बड़े वायदे कर रहे हैं। दोनों ही राज्यों में उन्होंने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का एलान किया है। यही वायदा उन्होंने दिल्ली और पंजाब में भी किया था। दिल्ली में यह वायदा निभाया भी, जिस से आकर्षित हो कर पंजाब में उन्हें बंपर जीत मिली। लेकिन अब दिल्ली में क्या हो रहा है?

दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने नया फरमान जारी किया है कि 200 यूनिट मुफ्त बिजली उसी को दी जाएगी, जो आवेदन करेगा। एक फ़ार्म भी सर्कुलेट किया गया है, आवेदन सीधे मुख्यमंत्री के नाम देना होगा। ताकि वोटर को यह एहसास हो कि उसे केजरीवाल ने फ्री बिजली दी। उन आवेदनकर्ताओं की सूची बना कर आम आदमी पार्टी अलग से संपर्क साधेगी और आवेदनकर्ताओं को बताएगी कि उसे फ्री बिजली आम आदमी पार्टी ने दी है। लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार सभी को फ्री बिजली देने का वायदा निभाने में विफल रही है। चुनाव में सभी घरों को 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया था, लेकिन चुनाव बाद इतनी शर्तें लगा दीं कि 30 प्रतिशत घरों को भी फ्री बिजली नहीं मिली।

दिल्ली के अस्पतालों और स्कूलों का जो प्रचार हिमाचल और गुजरात में किया जा रहा है, वह भी केजरीवाल की कलाकारी ही है। अस्पताल एक भी नया नहीं बना है और अभी 15 सितंबर को भी जब दूरदर्शन की टीम एक स्कूल की शूटिंग करने गई तो स्कूल में उपस्थित दिल्ली सरकार से जुड़े लोगों ने दूरदर्शन का कैमरा छीन कर तोड़ दिया, जो कई लाख रूपए का था। अगर स्कूलों की हालत विश्वस्तरीय हो गई है, तो दूरदर्शन का कैमरा तोड़ने की क्या वजह थी?

सीबीआई केजरीवाल के पीछे पड़ गयी है। शराब नीति की जांच सीबीआई कर रही है। स्कूल निर्माण की जांच सीबीआई कर रही है, बसों की खरीद और उनकी मेंटेनेंस की जांच सीबीआई कर रही है। केजरीवाल के व्यक्तिगत प्लाट बिक्री में राजस्व चोरी की जांच चीफ सेक्रेटरी कर रहे हैं। शराब घोटाले के संबध में हुए दो स्टिंग आपरेशन में कुछ नयी बातें सामने आ चुकी है।

एक आरोपी अमित अरोड़ा ने स्टिंग आपरेशन में दावा किया कि डीलर का कमिशन 2 प्रतिशत से बढा कर 12 प्रतिशत किया गया था, लेकिन इसमें से छह प्रतिशत आम आदमी पार्टी को दिया जा रहा था। डीलर सिर्फ दो बनाए गए थे, इन दोनों से पहले एकमुश्त राशि ली गई थी। इसी तरह ठेकेदारों की जमानत राशि 5 करोड़ रूपए कर दी गई थी ताकि छोटा व्यापारी बीच में आ ही न सके।

घोटाले का हंगामा मचने पर दिल्ली की शराब नीति तो वापस ले ली गई, लेकिन उन्हीं दोनों डीलरों को पंजाब में शराब सप्लाई का कारोबार दे दिया गया है। बाकी सारी नीति वही है, जो दिल्ली में अपनाई गई थी, अंतर सिर्फ यह है कि कमीशन 12 प्रतिशत की बजाए 10 प्रतिशत रखा गया है। यानी दिल्ली की कमाई बंद हुई तो पंजाब से इंतजाम किया गया है।

स्टिंग आपरेशन का सीबीआई और ईडी ने संज्ञान लेते हुए 16 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की। हैदराबाद, बेंगुलुरु, मेंगलूरू और चेन्नई समेत शराब निर्माताओं और डीलरों के 40 ठिकानों पर छापे मारे गए। स्टिंग आपरेशन के बाद मनीष सिसोदिया ने कहा कि अगर स्टिंग आपरेशन सही है, तो सीबीआई उन्हें चार दिन में गिरफ्तार कर ले।

केजरीवाल की एक अन्य योजना का उदाहरण देखिए। दिल्ली में घर घर राशन पहुँचाने की योजना बनाई गई। दो मकसद थे, एक तो यह कि केंद्र सरकार की इस योजना का नाम बदल कर आम आदमी पार्टी सरकार की योजना बताना, और दूसरा मकसद था राशन की दुकानों का धंधा चौपट करके अपनी किसी चहेती बड़ी कंपनी को ठेका देना। केंद्र सरकार ने इस योजना पर ब्रेक लगा दिया, क्योंकि यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसका नाम बदल कर केजरीवाल खुद श्रेय लेना चाहते थे।

दिल्ली में यह योजना लागू नहीं हो सकी तो केजरीवाल ने इसे पंजाब में लागू करवा दिया, लेकिन राशन डिपो एसोसिएशन हाईकोर्ट चली गई। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने योजना के असली मकसद को पकड़ लिया और 15 सितंबर को अपने फैसले में इस योजना पर स्थाई ब्रेक लगा दी। इस तरह केजरीवाल के तेज दिमाग से उपजी हर योजना का असली मकसद अब लोगों की समझ में आने लगा है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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