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Aliens on Earth: दावों और खंडनों के बीच धरती पर एलियन का वजूद

Aliens on Earth: धरती पर एलियन की मौजूदगी को लेकर पृथ्वीवासियों में हमेशा से एक कौतूहल व रोमांच की भावना रही है। इन भावनाओं में इस हफ्ते फिर से उफान आया है। इसकी वजह मेक्सिको में असामान्य आकार वाले सिर और हाथों में तीन लंबी उंगलियों वाली दो ममियों का सार्वजनिक प्रदर्शन है। मेक्सिकन पत्रकार जोस जैमी मौसन जो कि एक यूएफओ (अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स) विशेषज्ञ भी हैं, का दावा है कि ये ममी एक एलियन (पराग्रही) युगल की हैं। 2017 में पेरू के नाज्का मरुस्थल में दफन मिले इन शवों को मौसन मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज मान रहे हैं। अपने दावे के पक्ष में वह वैज्ञानिक अध्ययन व कार्बन डेटिंग विश्लेषण की रिपोर्ट भी पेश कर चुके हैं, जिनके अनुसार ये शरीर, पृथ्वी पर पाई जाने वाली किसी प्रजाति के नहीं हैं। हालांकि मौसन के इस दावे को मैक्सिकन संसद ने अपने एक विशेष सम्मेलन में संदिग्ध करार दिया है।

मौसन ने ऐसा ही दावा छह साल पहले पेरू में ही मिली विचित्र सी आकृतियों को लेकर भी किया था। बाद में पाया गया कि वे पेपरमैशे और गोंद से बनाई गई गुड़ियाएं थीं। लेकिन ऐसे दावे पिछले सौ, सवा-सौ सालों में बार-बार किए गए हैं। कभी लोग अनोखे प्राणियों से मिलने का दावा करते हैं, कभी उड़नतश्तरियाँ देखने का। ऐसे अनुभव बताने वाले लोगों में सामान्य जनता से लेकर बड़े-बड़े विशेषज्ञ और वैज्ञानिक तक शामिल हैं।

Aliens on Earth: Existence of aliens on Earth amid claims and denials

2017 में पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने कहा था कि एलियन जीवन धरती पर पहुँच चुका है, इसके साक्ष्य मौजूद हैं। इस अधिकारी ने यूएफओ की संभावनाओ की तलाश के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा चलाए गए एक रिसर्च प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया था। 2020 में, पहली ब्रिटिश अंतरिक्ष यात्री हेलेन शर्मन ने भी यही दावा किया था कि एलियंस हैं और हो सकता है कि वे हमारी जानकारी में आए बगैर, हमारे बीच ही मौजूद हों। इसके बाद 2021 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खगोलभौतिकी-विद् एवी लोएब ने एक कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि एलियन धरती पर आ चुके हैं।

अभी तक इस तरह के दावों को लेकर जो आम आधिकारिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं, उनमें इन्हें सनसनी फैलाने की कोशिश या पब्लिसिटी स्टंट करार देकर बात खत्म कर दी जाती है। हम सोच लेते हैं कि जब कोई दावा सही नहीं पाया गया है, तो एलियनों के होने की बात पर कैसे यकीन किया जा सकता है।

अब हाल ही में आई नासा की 36 पन्नों की रिपोर्ट भी इसी परिपाटी पर चल रही है। रिपोर्ट कहती है कि यूएफओ और यूएपी (Unexplained Aerial Phenomena अज्ञात असामान्य घटना) को पराग्रही जीवन या एलियंस के धरती पर आने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मौसन का 'पराग्रही दावा' और उसके तुरंत बाद नासा का इस रिपोर्ट को जारी करना भी संदेह पैदा कर रहा है कि क्या यह सिर्फ एक संयोग है या कोई सोची समझी रणनीति। वजह जो भी हो, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या वाकई हर बार ऐसे दावों को खारिज किया जाना उचित है।

पहले ऐसा नहीं था। दूसरे ग्रहों पर जीवन के विचार को सकारात्मक और उम्मीद की दृष्टि से देखा जाता था। 1961 में फ्रैंक ड्रेक, कार्ल सागान और कुछ अन्य वैज्ञानिकों ने पृथ्वी इतर बुद्धिमत्तायुक्त जीवन की तलाश के लिए एक वैज्ञानिक कार्यक्रम सेती (सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्टरियल इंटेलिजेंस) शुरू किया था। 2011 में ख़बर आई थी कि इसे बंद किया जा रहा है, क्योंकि पचास सालों में यह कुछ भी साबित करने में असफल रहा है। हालांकि, बाद में खबर गलत निकली। असल में सिर्फ सेती का खर्च कम करने के लिए कुछ कर्मचारियों की छंटनी की गई थी।

जहां तक नासा की बात है, उसका तो वैसे भी पराग्रहियों के अस्तित्व को नकारने का पुराना इतिहास रहा है। इसलिए, इस मामले में भी उसका यह व्यवहार आश्चर्यजनक नहीं है। और जब ऐसे दावों के पीछे कोई पुख्ता प्रमाण न पेश किया जा सकता हो तो उन्हें सिरे से खारिज कर देना और भी आसान हो जाता है।

लेकिन, विश्व की सर्वाधिक एडवांस्ड और साधनसंपन्न अंतरिक्ष एजेंसी के तौर पर नासा से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पृथ्वी इतर सौरमंडल या ब्रह्मांड में पराग्रहियों के होने की संभावनाओं में विश्वास न रखती हो। तो क्या यह नहीं हो सकता कि नासा गुपचुप ढंग से इस दिशा में रिसर्च करवा रही हो और बाकी दुनिया को इसकी खबर नहीं लगने देना चाहती हो? और इसीलिए पराग्रहियों संबंधी दावों को झूठा साबित कर देना उसने अपनी 'स्पेस डिप्लोमेसी' का हिस्सा बनाया हुआ हो।

आपके दिमाग में सवाल आ सकता है कि नासा का भला इसमें क्या फायदा है। लेकिन, अगर आपने हॉलीवुड की एलियन आधारित फिल्में देखी हैं, तो लगभग हर फिल्म में एक चीज महसूस की होगी कि पृथ्वी पर आने वाले सभी पराग्रही अमेरिकी धरती पर ही उतरते हैं, चाहे वे दोस्ती के इरादे से आए हों या हम पर अधिकार करने के इरादे से। और उनसे निपटने की जिम्मेदारी कौन निभाता है? अमेरिकी राष्ट्रपति।

फिल्मों के माध्यम से हम सभी के अवचेतन में एक बात बिठाई जा चुकी है कि अगर कभी पृथ्वी पर एलियंस का आगमन होता है तो पृथ्वी का प्रतिनिधित्व अमेरिका ही करेगा। नासा के इस रूटीन रिस्पॉन्स के पीछे अमेरिकी सरकार की यही नीति काम कर रही हो सकती है कि भविष्य में जब भी कभी पराग्रहियों से हमारी भेंट हो तो धरती के ठेकेदार के रूप में अमेरिका उनके साथ डील करे। अभी यह विचार कपोलकल्पना जैसा लग सकता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से अंतरिक्ष में बेशकीमती खनिजों और धातुओं की मौजूदगी के प्रमाण मिल रहे हैं, उन्हें देखते हुए इस संभावना को भी ध्यान में रखना होगा कि पृथ्वी के प्रतिनिधित्व की आड़ में अमेरिका इस ब्रह्मांडीय संपदा का मालिक तो नहीं बनना चाहता है।

दूसरी संभावना यह हो सकती है कि नासा मानव जाति को उस भय और घबराहट से बचाने के लिए इस तरह के दावों को झुठलाता रहता हो, जो पृथ्वी पर पराग्रहियों के मौजूद होने की बात सुनकर हमारे बीच फैल सकती है। कहने का आशय यही है कि नासा के इस व्यवहार के पीछे आर्थिक, सामारिक, सामाजिक आदि कई प्रकार के घटक हो सकते हैं।

लेकिन वास्तव में, एलियंस भी एक संभावना है, जिस पर अगर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता तो एकदम से नकारा भी नहीं जा सकता। इसलिए चिंतन का विषय यह होना चाहिए कि अगर पराग्रहियों का पृथ्वी पर आगमन होता है, तो उनके साथ हमारे रिश्ते किस प्रकार के रहेंगे? 'ई.टी.' और 'जादू' जैसे किरदारों ने एलियन के प्रति हमारे मन में एक बेहद अव्यवहारिक और भावुक किस्म की रोमानियत का सृजन किया है। हो सकता कि वास्तविकता इसके एकदम विपरीत हो।

मानव सभ्यता का इतिहास हमारे सामने है, जिसमें एक भू-भाग से दूसरे भू-भाग पर जाने वाले समूहों ने स्थानीय आबादी के दमन और उन्मूलन को ही प्राथमिकता दी है। फिर पराग्रहियों से हम यह आशा और अपेक्षा कैसे कर सकते हैं कि वे हमसे सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए पृथ्वी पर आएंगे? 2010 में डिस्कवरी पर प्रसारित एक डॉक्यूमेंट्री में प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने आगाह भी किया था कि एलियंस से संपर्क का प्रयास एक बुरा विचार है। अगर वे पृथ्वी पर आते हैं तो हमारे साथ वही होगा, जो कोलंबस के अमेरिका आने के बाद वहाँ के मूल अमेरिकियों के साथ हुआ था।

लेकिन यह भी सच है कि जिंदगी भय और आशंकाओं से नहीं बल्कि साहस और जोखिम लेने की प्रवृत्ति से आगे बढ़ती है। अगर पराग्रहियों को पृथ्वी पर आना है तो हम उन्हें रोक नहीं सकते। फिर चाहे वे जीवित प्राणियों के रूप में आएं या सूक्ष्म जीवाणुओं के रूप में। इसलिए हमारी आगे की नीतियां उन संभावित परिस्थितियों को दिमाग में रखकर बनाई जानी चाहिएं, जिनका सामना हमें एलियंस की मौजूदगी में करना पड़ सकता है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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