Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Al Nino Effect: धरती का सबसे गर्म जुलाई और भारत का सबसे सूखा अगस्त

Al Nino Effect: मानवजाति के ज्ञात इतिहास के सबसे गर्म जुलाई के बाद भारत का सबसे सूखा अगस्त आकर चला गया है। जुलाई की गर्मी दुनिया भर में महसूस की गई, अगस्त के सूखे को भारत भर में झेला गया और सितंबर में भी स्थिति बहुत बदलने की संभावना नहीं है।

वैश्विक स्तर पर गर्म और ठंडे प्रदेशों के तापमान का औसत निकालने पर बीता जुलाई अब तक के इतिहास में सबसे गर्म साबित हुआ है। इसकी बकायदा घोषणा की गई। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की ओर से यह घोषणा महीना पूरा होने के पहले ही कर दी गई। बयान में कहा गया कि जुलाई महीने के कई दिनों को अब तक का सबसे अधिक गर्म पाया गया है। वैश्विक स्तर पर पूरे महीने का औसत दैनिक तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। इतना औसत तापमान पहली बार है। यह सबसे गर्म अफ्रीकी देशों और सबसे ठंडे ध्रुवीय प्रदेशों व हिमाच्छादित शिखरों के तापमान को मिलाकर निकाला गया औसत है।

Al Nino Effect: Earths hottest July and Indias driest August

मोटे तौर पर जुलाई महीने के पहले तीन सप्ताह अब तक के सबसे गर्म तीन सप्ताह रहे। पहले और तीसरे सप्ताह में तापमान पूर्व औद्योगिक स्थिति से 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को कई बार पार किया। तापमान की यह सीमा पेरिस समझौते के आधार पर निर्धारित की गई है। यह जानकारी यूरोपीय कमीशन की ओर से संचालित कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने दी है। जुलाई महीने के विभिन्न दिनों के तापमान को देखें तो 6 जुलाई का दिन सबसे गर्म रहा। उस दिन धरती का औसत तापमान 17.08 डिग्री सेंटिग्रेड था।

17 डिग्री सेंटिग्रेड देखने में बहुत अधिक तापमान नहीं लगता, पर यह किसी खास जगह का तापमान नहीं है। वैश्विक स्तर पर दैनिक औसत है जिसमें 50 डिग्री सेटिग्रेड दैनिक तापमान वाली जगहों से साथ उन इलाकों के तापमान का औसत शामिल है जहां साल भर बर्फ जमी रहती है और तापमान -50 तक चला जाता है।

जुलाई की गर्मी से जूझकर निकले भारत के लोगों के लिए अभी अगस्त का महीना बाकी था। इस साल का अगस्त भारत का अब तक का सबसे कम वर्षा वाला अगस्त रहा है। कम वर्षा की वजह से गर्मी अधिक रही। भारतीय मौसम विभाग के पास 1901 से वर्षा का आंकड़ा उपलब्ध है। उसके अनुसार इस साल अगस्त में सबसे कम वर्षा हुई है। वर्षा में इलाकेवार भिन्नता है, जिसमें हर इलाके में कमी बनी रही है।

इस अगस्त में पूरे देश में 162.7 मिलीमीटर वर्षा हुई है, आमतौर पर अगस्त महीने में औसतन 255 मिलीमीटर वर्षा होती है। भारत में जुलाई और अगस्त सर्वाधिक वर्षा वाले महीने होते हैं। इस तरह इस वर्ष अगस्त में सामान्य से 36 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके पहले सबसे कम वर्षा वाला अगस्त 2005 में था जब 191.2 मिलीमीटर वर्षा हुई थी।

कम वर्षा होने का मतलब है कि औसत अधिकतम तापमान 32.09 डिग्री सेंटिग्रेड नापा गया जो 1901 से अब तक अधिकतम था। जो अगस्त महीने के औसत तापमान (31.09 डिग्री) से एक डिग्री अधिक था। औसत न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री सेंटिग्रेड था। वह भी 1901 से अब तक के आंकड़ों में दूसरा सबसे अधिक है।

कम वर्षा के क्षेत्रों में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और महाराष्ट्र रहे। हिमालयी राज्यों- हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में वर्षा से तबाही तो काफी हुई, पर वर्षा समान्य से अधिक नहीं हुई।

सितंबर में वर्षा की इस कमी की भरपाई होने की उम्मीद तो नहीं है लेकिन यह जरुर है कि सितंबर महीने की अनुमानित वर्षा सामान्य होने की उम्मीद है। इस वर्ष 1 जून से 31 अगस्त के बीच देश में 629.7 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य 700.7 मिलीमीटर से काफी कम है।

भारतीय मौसम विभाग के निदेशक मृत्युंजय महापात्र ने वर्षा की इस कमी के लिए अल नीनो परिघटना को जिम्मेवार ठहराया है। अल नीनो प्रशांत महासागर में विषुवत रेखा के पास की सतह के गर्म हो जाने से पैदा होती है। इसका भारतीय मानसून पर खराब प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही मौसम से संबंधित कुछ दूसरी परिघटनाएं भी इसके लिए जिम्मेवार हैं। जैसे निम्न दबाव के क्षेत्रों का नहीं बनना, अल नीनो की तरह ही हिन्द महासागर में बनने वाली इंडियन ओसन डायपोल का निष्क्रिय रहना।

प्रशांत महासागर में अल नीनो परिघटना इस बार कुछ अधिक ताकतवर है और लगातार बना हुआ है। इसके मजबूत होने और अगले साल के शुरुआत तक बने रहने की संभावना है। महापात्र के अनुसार, इंडियन ओसियन डायपोल का अब सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे सितंबर महीने में अल नीनो का प्रभाव संतुलित हो सकता है। इसलिए मौसम विभाग द्वारा सितंबर के महीने में वर्षा सामान्य रहने की संभावना जताई जा रही है।

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2 सितंबर से मानसून के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है। इसका प्रभाव पूर्वी और दक्षिणी प्रदेशों में पड़ने वाला है, इसके बाद धीरे धीरे यह पूरे देश में फैलेगा।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सितंबर के बारे में अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो न केवल गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि कृषि पैदावार का नुकसान नहीं होगा। लेकिन इस साल के मौसम ने एक चेतावनी तो दे ही दी है कि विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ अंतत: धरती के अस्तित्व के लिए ही चुनौती बन जाएगा जिससे हर मनुष्य प्रभावित हुए बिना नहीं रह पायेगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+