डब्ल्यूटीओ में जीते ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत ने ठुकराया फैसला
नई दिल्ली, 15 दिसंबर। विश्व व्यापार संगठन में भारत को करारा झटका लगा है. मंगलवार को चीनी पर आयात-निर्यात कर के एक मामले में डब्ल्यूटीओ के पैनल ने ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भारत को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने का निर्देश दिया.

विश्व व्यापार संगठन में यह मामला 2019 से चल रहा है जब चीनी उत्पादक देशों ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला ने भारत की शिकायत की थी. इन देशों का कहना है कि अपने गन्ना और चीनी उत्पादक देशों को सब्सिडी देकर भारत डब्ल्यूटीओ के नियमों का उल्लंघन कर रहा है.
क्या कहा WTO ने?
पैनल ने कहा, "हमारी सिफारिश है कि भारत कृषि समझौते और सब्सिडियों पर एससीएम (सब्सिडीजी ऐंड काउंटरवेलिंग मैजर्स) नियमों के अनुकूल डब्ल्यूटीओ के उपायों के तहत नियम बनाए."
ब्राजील के बाद भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. पैनल के 115 पेज के इस फैसले पर उसने मंगलवार को कहा कि वह इसके खिलाफ अपील करेगा. हालांकि उस अपील का क्या होगा, यह अनिश्चित है क्योंकि डब्ल्यूटीओ की अपीलेट बॉडी में काम करने के लिए समुचित जज ही नहीं है.
डब्ल्यूटीओ की रिपोर्ट कहती है कि 2014-15 से 2018-19 के बीच चीनी के पांच मौसमों के दौरान भारत ने अपने गन्ना उत्पादकों को तय सीमा 10 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दी. 10 प्रतिशत की यह सीमा कृषि समझौते के तहत तय की गई है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने चीनी निर्यात पर सब्सिडी के बारे में डब्ल्यूटीओ की कमिटी को सूचित नहीं किया जो एक अन्य समझौता का उल्लंघन है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया द्वारा लगाए गए एक आरोप को पैनल ने सही नहीं माना. ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि भारत ने चीनी का स्टॉक जमा किया हुआ है जिसके बारे में उसे डब्ल्यूटीओ को 1990 के दशक में ही बता देना चाहिए था.
भारत ने कहा, नहीं मानेंगे
पैनल की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह अस्वीकार्य है और इसका देश की मौजूदा चीनी नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मंत्रालय ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की यह रिपोर्ट 'गलतियों से भरी' और 'असंगत' है.
ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने डब्ल्यूटीओ के फैसले का स्वागत किया है. देश के व्यापार मंत्री डैन टेहन ने एक बयान जारी कर कहा, "हम नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था का समर्थन करते हैं. उसी के तहत इस मामले में हमने डब्ल्यूटीओ का प्रयोग वैसे ही किया जैसे पहले किया जाता रहा है."
ब्राजील के चीनी उत्पादकों के संगठन यूनिका ने भी इस रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट साबित करती है कि भारत की चीनी नीति से व्यापारिक बाधाएं पैदा हुई हैं. यूनिका ने कहा कि ब्राजील और भारत गन्ना आधारित एथेनोल के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर सहयोग कर रहे हैं और उम्मीद है कि दोनों देश इस मुद्दे का भी एक साझा हल खोज लेंगे.
डब्ल्यूटीओ के इस फैसले का व्यापार पर अमली असर होने में वक्त लग सकता है. लेकिन अपील के बाद भी अगर यह फैसला कायम रहता है तो विजयी पक्षों को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं. जैसे कि वह हारने वाले पक्ष के खिलाफ ज्यादा ऊंचे कर लगा सकता है.
वीके/एए (रॉयटर्स)
Source: DW
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