सुंदरबन: चक्रवात से बचने के लिए महिलाएं लगा रही हैं मैंग्रोव के पौधे

नई दिल्ली, 11 नवंबर। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24-परगना जिले में सुंदरबन अपनी जैविक विविधता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. हाल के सालों में यहां आने वाले चक्रवात ने क्षेत्र पर काफी कहर बरपाया है. समय के साथ भारत में शक्तिशाली चक्रवात तूफानों की आने की श्रृंखला बढ़ी है. सुंदरबन में दुनिया का सबसे बडा मैंग्रोव जंगल है और अब महिलाओं ने जलवायु परिवर्तन की मार को कम करने के लिए मैंग्रोव के पौधे लगाने का बीड़ा उठाया है.

Provided by Deutsche Welle

दक्षिण 24-परगना जिले में बांग्लादेश की सीमा से लगा सुंदरबन रॉयल बंगाल टाइगर और दुर्लभ डॉल्फिनों के लिए मशहूर है. यही कारण है कि इसका नाम यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में भी शामिल है. लेकिन जंगल को अतीत में अवैध कटाई का सामना करना पड़ा है और वह नियमित रूप से तीव्र मानसूनी तूफानों से प्रभावित हुआ है.

जलवायु परिवर्तन का असर

जलवायु परिवर्तन से सुंदरबन इलाके पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से मुकाबले के लिए मैंग्रोव जंगल को बचाना बेहद जरूरी हो गया है. इसीलिए पिछले हफ्ते मैंग्रोव के पौधे लगाने की मुहिम की शुरुआत हुई. तट के पास युवा महिलाओं का दल सिर पर मैंग्रोव के पौधे की टोकरी लिए हुए निकल पड़ा है. महिलाएं खाली इलाकों में मैंग्रोव के पौधे लगा रही हैं.

इस मुहिम में शामिल शिवानी अधिकारी कहती हैं, "यह तूफान और चक्रवात की संभावना वाला क्षेत्र है. इसलिए तटबंधों की रक्षा के लिए हम सभी महिलाएं पौधे लगा रही हैं."

गांव की महिलाएं लगा रही हैं पौधे

आफत से बचाएगा मैंग्रोव

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक मैंग्रोव के पेड़ समुद्र तटों को कटाव और चरम मौसम की घटनाओं से बचाते हैं. वे प्रदूषकों को छानकर पानी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और कई समुद्री जीवों के लिए नर्सरी के रूप में काम करते हैं. यही नहीं मैंग्रोव हर साल लाखों टन कार्बन को अपनी पत्तियों, तनों, जड़ों और मिट्टी में सोख कर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद कर सकते हैं.

मैंग्रोव के जंगल तटीय समुदायों को उन चक्रवातों से बचाने में भी मदद करते हैं जो उस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं. परियोजना स्थल के पास रहने वाले गौतम नश्कर कहते हैं, "अगर इन तटबंधों की रक्षा की जाती है तो हमारा गांव बच जाएगा. अगर हमारा गांव बच जाएगा तो हम बच जाएंगे." वे कहते हैं, "यह हमारी आशा और हमारी इच्छा है."

एक स्थानीय गैर-लाभकारी संस्था और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा समर्थित इस परियोजना का लक्ष्य लगभग 10,000 मैंग्रोव पौधे लगाना है. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट नियमित रूप से चक्रवातों से प्रभावित हैं, जिनकी वजह से बीते सालों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है.

हाल के सालों में तूफानों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है जिसका कारण जलवायु परिवर्तन को ठहराया जाता है लेकिन तेजी से निकासी, बेहतर पूर्वानुमान और अधिक आश्रयों के कारण मौतों में कमी आई है.

एए/सीके (एएफपी)

Source: DW

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+