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स्मार्टफोन की मरम्मत करना मुश्किल क्यों है

नई दिल्ली, 16 अप्रैल। स्मार्टफोन बनाने वाली जर्मन कंपनी शिफ्ट का दावा है कि उसके ग्राहकों ने जितनी मात्रा में टूटे हुए डिस्प्ले लौटाए हैं वह एक सामान्य मूविंग बॉक्स में फिट हो जाएंगे. यह कंपनी जर्मनी के हैसेन राज्य के फॉल्केनबर्ग में है. यह स्मार्टफोन बनाने वाली पहली ऐसी कंपनी है जिसने 2016 में अपने शिफ्ट फोन मॉडल के लिए डिपॉजिट सिस्टम की शुरुआत की थी.

अगर आप अब इस कंपनी के फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो बस इसे वापस कर दें. आपने जितने दिनों तक इस फोन का इस्तेमाल किया है और फिलहाल किस स्थिति में आप उसे वापस कर रहे हैं, उसके मुताबिक पैसे चुकाएं और अपना डिपॉजिट वापस पाएं. यह आमतौर पर 22 यूरो के करीब होता है.

शिफ्ट कंपनी के इस असामान्य बिजनेस मॉडल का लक्ष्य अपने फोन में लगे ज्यादा से ज्यादा कंपोनेंट का फिर से इस्तेमाल करना है. कंपनी ने डॉयचे वेले को बताया कि उन पार्ट्स की संख्या काफी कम होती है जिनका फिर से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, जैसे कि टूटे हुए डिस्प्ले. कंपनी का कहना है कि फोन के मॉड्यूलर डिजाइन की वजह से ही पुराने फोन में इस्तेमाल किए गए ज्यादातर कंपोनेंट का फिर से इस्तेमाल संभव हो पाया है.

जादुई जोड़तोड़

एक तरफ यह कंपनी अपनी वेबसाइट पर "दुनिया में सबसे मॉड्यूलर स्मार्टफोन" के रूप में अपने Shift6m मॉडल का प्रचार करती है. वहीं, दूसरी ओर बर्लिन का फ्रॉउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर रिलायबिलिटी एंड माइक्रोइंटीग्रेशन (आईजेडएम) वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विश्वसनीय और टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को विकसित करने में मदद करता है.

आईजेडएम की मरीना प्रोस्के और कार्स्टन शिश्के ने स्मार्टफोन विकसित करने के लिए शिफ्ट के साथ मिलकर काम किया. जिसे वे "मॉड्यूलराइजेशन" कहते हैं वह पहले से ही डेस्कटॉप कंप्यूटरों के निर्माण में मानक के तौर पर सेट है. हालांकि, अभी तक स्मार्टफोन और टैबलेट पीसी के मामले में इस मानक का सामान्य तौर पर ध्यान नहीं रखा जा रहा है.

मामूली टूटफूट से भी कई बार स्मार्टफोन बेकार हो जाते हैं

प्रोस्के ने डॉयचे वेले को बताया, "शिफ्ट ने दिखाया कि बहुत ही छोटे कंपोनेंट को भी बदला जा सकता है. ऐसी स्थिति में अगर स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध होते हैं, तो स्मार्टफोन की मरम्मत करना महंगा सौदा साबित नहीं होता है. इससे समय की भी बचत होती है. समय ही पैसा है, खासकर मरम्मत करने वाली दुकानों के लिए."

प्रोस्के ने कहा कि किसी भी फोन में कंपोनेंट को सही तरीके से फिट करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, ताकि अगर फोन का कोई हिस्सा टूट जाए और उसे बदलने की जरूरत हो, तो दूसरे कंपोनेंट को नहीं निकालना पड़े. अगर किसी एक कंपोनेंट को बदलने के लिए दूसरे कई कंपोनेंट को निकालना पड़ता है, तो फिर इसका कोई मतलब नहीं रह जाता.

मरम्मत ना होने वाले उपकरणों पर रोक

फ्रॉउनहोफर के रिसर्चरों ने पाया कि किसी भी स्मार्टफोन में डिस्प्ले टूटने और बैटरी खराब होने के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं. इसलिए, प्रोस्के यह मांग करती हैं कि इन्हें इस तरह बनाया जाना और फिट करना चाहिए कि सामान्य ग्राहक भी इन्हें आसानी से बदल सकें. उन्होंने इशारा किया कि इससे मरम्मत की दुकानों में होने वाली भीड़ कम होगी. उन्होंने कहा, "जब मरम्मत के बाद ग्राहकों को डिवाइस वापस किए जाते हैं, तब तक उस फोन में मौजूद उनका पूरा निजी डेटा मिटा दिया जाता है. यही वजह है कि घर पर मरम्मत करना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है."

वह आगे कहती हैं कि हालांकि इससे यह समस्या हो सकती है कि फोन वाटरप्रूफ और डस्ट-रेजिस्टेंस ना रहें और वायरलेस चार्जिंग भी खराब हो सकती है.

यूरोपीय आयोग यूरोपीय संघ में बेचे जाने वाले स्मार्टफोन और टैबलेट पीसी से जुड़े कानून तैयार कर रही है, ताकि इन उपकरणों को कथित तौर पर पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके और इनमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सके जिसकी वजह से ये लंबे समय तक काम कर सकें. तैयार किए जा रहे इस कानून में आईजेडएम के शोध के नतीजे भी शामिल किए गए हैं.

स्मार्टफोन की बैटरी बदलना भी अब पहले की तरह आसान नहीं रहा

इन नियमों और कानूनों का उद्देश्य नए प्रॉडक्ट के डिजाइन से जुड़ी जरूरतों को तय करना है. जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी बनाना. साथ ही, उपकरण लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकें, इसके लिए दूसरे मानकों को पूरा करना.

यह भी पढ़ेंः लैपटॉप और स्मार्टफोन का अदृश्य कचरा

आईजेडएम के शोधकर्ता कार्स्टन शिश्के ने कहा, "हमारा न्यूनतम लक्ष्य यह है कि ऐसे गैजेट्स के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए जिसे मरम्मत नहीं किया जा सकता." वह ग्राहकों को प्रॉडक्ट का विकल्प देने के लिए 'मरम्मत लेबल' की वकालत करते हैं. ठीक उसी तरह जैसे कि बिजली की खपत को लेकर डिवाइस पर लेबलिंग की जाती है.

ग्रीनवाशिंग और लेबलिंग से जुड़ी अन्य समस्या

राष्ट्रीय स्तर पर, फ्रांस ने अप्रैल 2021 में टीवी-सेट, स्मार्टफोन, लैपटॉप कंप्यूटर, वाशिंग मशीन और लॉन मोवर के लिए रिपेयर फ्रेंड्लीनेस इंडेक्स लॉन्च किया. इसमें निर्माताओं को खुद के लिए 1 से 10 नंबर देने थे. इसके एक साल बाद, उपभोक्ताओं के हितों के लिए काम करने वाले समूह एचओपी ने एक सर्वे कराया. इस सर्वे में पाया गया कि आधी आबादी को इस इंडेक्स के बारे में जानकारी थी और वे इस इंडेक्स के नतीजों का इस्तेमाल खरीदारी करने से जुड़े फैसले लेने के लिए कर रहे थे.

एचओपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "निर्माता और विक्रेता इंडेक्स को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं. जैसे कि मैन्युअल तौर पर मरम्मत करने की सुविधा को आसान बना रहे हैं और स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध करा रहे हैं."

एचओपी ने यह भी कहा कि बहुत कम ही ऐसे प्रॉडक्ट थे जो कम इंडेक्स वाली कैटगरी में शामिल थे. इसका मतलब यह हुआ कि या तो ज्यादातर प्रॉडक्ट का मरम्मत करना आसान था या इसके पालन के लिए किसी तरह का कड़ा मानदंड नहीं अपनाया गया था.

हालांकि समूह ने इस बात को लेकर निराशा जाहिर किया कि जिन उपकरणों को अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता है, उन्हें भी बेहतर अंक मिले. अगर किसी उपकरण को अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता है, तो उसका मरम्मत करना भी काफी मुश्किल हो जाता है.

स्मार्टफोन के कारण धरती पर कचरे का बोझ बढ़ रहा है

एचओपी ने एप्पल और सैमसंग को उदाहरण के तौर पर पेश किया. "इंडेक्स में शामिल इन कंपनियों के तीन गैजेट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाना संभव नहीं था, क्योंकि वे या तो एक साथ चिपकाए हुए थे या वे आपस में पूरी तरह जुड़े हुए थे."

अपनी खोज के नतीजों को देखते हुए, एचओपी ने ज्यादा पारदर्शिता की मांग की. समूह ने कहा कि वह प्रकाशित किए गए इंडेक्स से जुड़ी विस्तृत जानकारी देखना चाहता है, जिसमें यह भी डेटा शामिल हो कि कितने समय तक कोई स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध रहता है और उसकी कीमत कितनी रहती है.

यह भी पढ़ेंः मुसीबत हैं आपके पुराने स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्युटर

जर्मनी की गैर-लाभकारी संस्था रूंडर टिश रिपारटुअर भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत क्षमता में सुधार के उपायों की मांग कर रही है. इस संस्था को रिपेयर राउंडटेबल के नाम से भी जाना जाता है. यह संस्था पर्यावरण और उपभोक्ताओं के हित के लिए बात करने वाले समूहों के साथ-साथ हस्तशिल्प कारोबारियों को एक मंच पर लाने का काम करती है. जर्मन सरकार को भेजी गई मांगों की सूची में, वे मरम्मत की लागत को कम करने के उपायों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं. जैसे कि इस पर वैट कम किया जाए या ग्राहकों को सरकार की तरफ से बोनस दिया जाए.

शॉपिंग मॉल में रिपेयर सेंटर

रिपेयर राउंडटेबल के जोनाथन शॉट ने कहा कि जर्मनी में ग्राहकों को अभी भी "मरम्मत करने वाले भरोसेमंद लोग" काफी कम मिल पाते हैं, क्योंकि लोगों को मरम्मत की दुकान शुरू करने में दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया कि सॉफ्टवेयर और स्पेयर पार्ट्स पर निर्माताओं का एकाधिकार और डिवाइस के टेक्निकल डेटा तक सीमित पहुंच की वजह से मरम्मत की दुकान चलाना मुश्किल हो जाता है.

ग्रीनपीस इस स्थिति को जन जागरूकता अभियान के माध्यम से बदलना चाहती है. इसलिए, इसने सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा से ज्यादा रिपेयरिंग शॉप खोलने की मांग की है. सर्कुलर इकोनॉमी और रिसोर्स प्रोटेक्शन पर ग्रीनपीस विशेषज्ञ वियोला वोलगेमुथ ने कहा, "हम जर्मनी में सभी खुदरा क्षेत्रों के दसवें हिस्से को उन कारोबारों को किराए पर देने का अभियान चला रहे हैं जो नए सामान खरीदने की जगह कोई अन्य विकल्प उपलब्ध कराते हैं." इनमें मरम्मत की दुकानों के साथ-साथ इस्तेमाल किए जा चुके और फिर से इस्तेमाल होने लायक प्रॉडक्ट बेचने वाले स्टोर का समर्थन करना शामिल है.

उन्होंने डॉयचे वेले को बताया, "ये जगहें खुदरा सामान बेची जाने वाली जगहों के बीच में होनी चाहिए. साथ ही, इन्हें स्थानीय सरकारी विभागों द्वारा टैक्स में छूट दी जानी चाहिए, किराए में सब्सिडी मिलनी चाहिए और दूसरे तरह से आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए."

ग्रीनपीस ने हाल ही में घोषणा की है कि वह जर्मनी में अपने अभियान को लॉन्च करने के लिए स्थानीय समुदायों और नगर पालिकाओं से बातचीत कर रही है.

Source: DW

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