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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: नामांकन पर BJP-TMC की तकरार जारी, शुभेंदु अधिकारी ने कहा- ममता का जंगलराज

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव (West Bengal Panchayat Elections) के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। नामांकन पर BJP-TMC की तकरार जारी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा, प्रदेश में ममता का जंगलराज है।

कोलकाता में पुलिस बैरिकेडिंग खुद से हटाने की कोशिशों के बीच रिपोर्ट्स से शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ममता बनर्जी का जंगलराज खत्म होना चाहिए। भाजपा पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने नहीं दिया जा रहा है।

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तृणमूल पर चुनाव में साजिश के आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी उम्मीदवारों को बशीरहाट, कैनिंग, इंडस और अन्य जगहों पर नामांकन दाखिल करने नहीं दिया जा रहा। 20,000 सीट में निर्विरोध चुनाव जीतने की साजिश चल रही है।

चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल पुलिस पर भी गंभीर आरोप

आक्रोशित शुभेंदु अधिकारी ने और गंभीर आरोप लगाए और कहा कि राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा और बंगाल की पुलिस ममता बनर्जी के साथ मिली हुई है। उन्होंने Kolkata Election Commission Office के बाहर लगी बैरिकेडिंग की रस्सी खुद खोल डाली।

भाजपा नेताओं को नॉमिनेशन से रोका?

पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पंचायत चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल न करने देने का आरोप लगाया और कहा, "यह लोकतंत्र की हत्या का प्रयास है, हम इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। राज्य के लोग प्रबल विरोध करेंगे।

TMC का दावा- केंद्रीय बल जरूरी नहीं

भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया, टीएमसी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कोई बूथ संवेदनशील है ही नहीं। इसलिए पंचायत चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती की कोई जरूरत नहीं है।

बता दें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को संवेदनशील घोषित किए गए सभी क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती की जरूरत पर आदेश पारित किया।

एक दिन बाद, भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि आयोग केंद्रीय बलों को चार्ज लेने की अनुमति नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा, हाईकोर्ट के फैसले के बाद से कोई पहल नहीं हुई है।

मजूमदार ने कहा, "ऐसे कई ब्लॉक हैं जहां उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग ठीक से काम नहीं कर रहा है। वे केंद्रीय बलों को प्रभार लेने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।" उन्होंने कहा, यदि यह जारी रहा, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे। कोई पहल नहीं की गई है।

गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को संवेदनशील घोषित सभी क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "ऐसे क्षेत्रों में जहां केंद्रीय बल तैनात नहीं हैं, राज्य पुलिस और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) पर मतदान एजेंटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी।"

हाईकोर्ट ने कहा, राज्य निर्वाचन आयोग को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग पर विचार कर जरूरी संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसा करना चाहिए।" अदालत ने केंद्रीय बलों की तैनाती के अलावा आयोग को मतगणना केंद्रों के हर बूथ और कोने पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी आदेश दिया।

अदालत ने आगे निर्देश दिया कि पंचायत के तीनों स्तरों के लिए मतगणना एक साथ और एक ही जगह पर की जानी है। बता दें कि 8 जुलाई को एक ही चरण में मतदान के बाद मतगणना 11 जुलाई को होनी है।

हिंसा पर क्या बोल गईं महिला भाजपा नेता

शुभेंदु के अलावा एक और भाजपा नेता ने अपना आक्रोश प्रकट किया। महिला भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, अगर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय सुरक्षाबल तैनात नहीं होते तो बंगाल में भीषण हिंसा का माहौल होता।

भाजपा के अलावा एक और पार्टी ने भी आरोप लगाए

भाजपा के अलावा एक नई पार्टी के विधायक ने भी ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगाए हैं।इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नेता और भांगड़ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा, "जैसे-जैसे समय बीत रहा है, हिंसा बढ़ रही है।"

विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा, पश्चिम बंगाल में हर जगह नामांकन दाखिल करने में समस्याएं आ रही हैं। हम आज मुख्यमंत्री से मिलने गए, लेकिन उनकी व्यस्तता के कारण हम नहीं मिल सके।

दोनों दलों की अग्निपरीक्षा होगी

बता दें कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों में भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के चैलेंजर माना जा रहा है। ये चुनाव दोनों पार्टियों के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।

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