पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए प्रचार थमा, राजनीतिक हिंसा में 18 लोगों की मौत, 8 जुलाई को मतदान

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले हुई हिंसा में 18 लोगों की जान चली गई है। गुरुवार को हुई हिंसा में 3 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि 8 जुलाई को पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होने हैं, लेकिन मतदान से पहले चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश में राजनीतिक हिंसा जमकर देखने को मिली है।

बता दें कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम गया है। प्रदेश में 8 जुलाई को मतदान होगा। बता दें कि इस बार पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में 73887 सीटों के लिए दो लाख से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं।

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यहां टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है। इसके कांग्रेस और लेफ्ट यहां गठबंधन हैं, दोनों दल मिलकर पंचायत चुनाव लड़ रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुर्शीदाबाद में कमल शेख नाम के व्यक्ति की बम विस्फोट में मौत हो गई है। वह देसी बम बना रहा था, इसी दौरान विस्फोट से उसकी मौत हो गई।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बीरभूम में दिलीप महारा नाम के व्यक्ति का शव पाया गया है। दिलीप भाजपा समर्पित निर्दलीय उम्मीदवार के पति थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिलीप की गला घोंटकर हत्या की गई है।

वहीं मरने वाले तीसरे व्यक्ति की पहचान अल्फजुद्दीन के तौर पर हुई है, जिसे टीएमसी समर्थकों और कुलपी साउथ 24 परगना में निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों के बीच हुई हिंसा में गंभीर चोट आई थी। गंभीर रूप से घायल अल्फजुद्दीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गई।

बता दें कि 2018 में कुल 23 लोगों की पंचायत चुनाव के दौरान मौत हुई थी। वहीं प्रदेश की पुलिस का कहना है कि इस साल 18 लोगों की मौत हुई है। पुलिस का कहना पुरुलिया में टीएमसी नेता और भाजपा नेता व कूच बिहार में भाजपा कार्यकर्ता की मौत चुनाव से संबंधित नहीं है।

राजभवन में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गवर्नर सीवी आनंद बोस ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अग पंचायत चुनाव के दौरान लोकतंत्र की मौत हो गई तो हत्यारा कौन है। क्या प्रदेश का चुनाव आयोग हाथ उठाएगा। आपको पता होना चाहिए हत्यारा कौन है।

बता दें कि चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा को 7 जून को राज्यपाल ने नियुक्त किया था। राज्यपाल ने कहा कि अधिकारियों ने लोगों को निराश किया है। मेरी राय में आप अपनी जिम्मेदारी निभाने में फेल हो गए। वहीं टीएमसी ने राज्यपाल पर पलटवार करते हुए कहा कि वह भाजपा की ओर से बोल रहे हैं।

टीएमसी के प्रवक्ता कुनाल घोष ने कहा कि राज्यपाल ने जो किया , वह उन्हें भाजपा का एजेंट बनाता है। वह राजनीति कर रहे हैं। वह चुनाव आयुक्त की शिकायत कर सकते थे, राष्ट्रपति को पत्र भेज सकते थे। लेकिन इसके बजाए उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपने प्रभाव का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने में किया।

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