बंगाल के राज्यपाल ने विधायकों को शपथ दिलाने का अधिकार स्पीकर से लिया वापस

कोलकाता, अक्टबर 04: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य विधानमंडल के सदस्यों को पद की शपथ दिलाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी की शक्तियों वापस ले लिया है। सोमवार को अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह पहली बार है जब बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ऐसा कदम उठाया है। गवर्नर धनखड़ के इस कदम के बाद उनके और स्पीकर के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।

West Bengal governor withdrawn assembly speaker power to administer oath of office to legislature

कोलकाता के भवानीपुर और मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों पर विधानसभा उपचुनाव से कुछ दिन पहले रविवार को राजभवन से एक नोट विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचा। पत्र में संविधान की धारा 188 का हवाला दिया गया है, जो राज्यपाल को शपथ दिलाने का अधिकार देता है। मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने के लिए, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अध्यक्ष ममता बनर्जी को 4 नवंबर तक विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने की जरूरत है। उन्होंने हाल ही में हुए उपचुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज की थी।

टीएमसी नेताओं ने कहा कि वह चाहती हैं कि औपचारिकताएं दुर्गा पूजा उत्सव से पहले पूरी हो जाएं, जो एक सप्ताह दूर है। नंदीग्राम से मार्च-अप्रैल के विधानसभा चुनावों में हारने वाली बनर्जी ने 5 मई को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। जुलाई 2019 में राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के बाद से राज्य सरकार और धनखड़ के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। टीएमसी नेताओं ने कहा कि धनखड़ का ये फैसला राज्य सरकार और गवर्नर के बीच चल रहे विवाद को गहरा सकता था।

कुछ दिन पहले राजभवन से विधानसभा सचिवालय को एक पत्र आया था, जिसमें कहा गया था कि वह विधानसभा स्पीकर से शपथ दिलाने का अधिकार वापस ले रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि राजभवन के पत्र में कहा गया है कि यह राज्यपाल है जिसे मंत्रियों और विधायकों को पद की शपथ दिलाने का अधिकार है। जब राज्यपाल राजभवन में मंत्रियों को पद की शपथ दिलाते हैं, तो स्पीकर राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है जब विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाई जाती है। राजभवन ने उस अनुमति को वापस ले लिया है।

पत्र में कहा गया है कि संविधान भारत के राष्ट्रपति या उनके प्रतिनिधि को संसद के सदस्यों को पद की शपथ दिलाने का अधिकार देता है। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति यह शक्ति लोकसभा अध्यक्ष को सौंपते हैं। अनुच्छेद 188 सांसदों की शपथ या प्रतिज्ञान से संबंधित है। जिसमें कहा गया है कि, राज्य की विधान सभा या विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य, अपना स्थान ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष निर्धारित प्रपत्र के अनुसार शपथ लेगा।

वहीं दूसरी ओऱ संसदीय मंत्री पार्थ चटर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को पत्र लिखकर विधानसभा में आकर सीएम सहित तीन विधायकों को शपथ दिलाने का आग्रह किया है। तृणमूल के सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी को शपथ दिलाने की तैयारी चल रही है। हालांकि यह तभी संभव है जब राजभवन से हरी झंडी मिले। बिमान बनर्जी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि बनर्जी ने सोमवार को स्पीकर को फोन किया और उनके कार्यालय के लोग राजभवन के संपर्क में हैं।

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