'दीदी को चांसलर बनाने वाले विधेयक को दिल्ली भेजें राज्यपाल', सुवेंदु अधिकारी की मांग पर TMC का निशाना
कोलकाता, जून 14। पश्चिम बंगाल विधानसभा से सोमवार को एक ऐसा विधेयक पारित हो गया, जिसके लागू होते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की सभी सरकारी यूनिवर्सिटीज की वाइस चांसलर बन जाएंगी, जो कि अभी तक राज्य का राज्यपाल होता था, लेकिन अब राज्यपाल की जगह ममता बनर्जी सभी स्टेट यूनिवर्सिटीज की कुलपित होंगी। इस विधेयक के पारित होते ही बीजेपी और टीएमसी के बीच एक वॉकयुद्ध शुरू हो गया है, जिसमें दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
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सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल से किया अनुरोध
विधानसभा में विधेयक के पारित होने के बाद विपक्ष के नेता और बीजेपी के बड़े चेहरे सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल से यह अनुरोध किया है कि वो इस विधेयक को रैटिफाई ना करें और सीधा इसे केंद्र सरकार के पास भेजें। सुवेंदु अधिकारी के इस अनुरोध को लेकर टीएमसी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने ने यह साबित कर दिया है कि राज्यपाल बीजेपी नेताओं के निर्देश पर ही चलते हैं और उनके अनुसार ही काम करते हैं।
क्या कहा है सुवेंदु अधिकारी ने ?
सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि हम पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ जी से यह अनुरोध करते हैं कि यह विधेयक समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है और इस पर अंतिम निर्णय दिल्ली में ही लिया जाएगा। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी चांसलर बनने का सपना देख रही हैं, जो पूरा नहीं होगा।
टीएमसी की प्रतिक्रिया
सुवेंदु अधिकारी के इस अनुरोध पर टीएमसी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनकी इस मांग से यह साबित हो जाता है कि हम जो कहते आए हैं, वो अब सबके सामने है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ और भाजपा मिलकर बंगाल के विकास को लगातार बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। टीएमसी की ओर से कहा गया है कि सुवेंदु अधिकारी ने खुलै तौर पर यह स्वीकार किया है कि वो राज्यपाल के कार्यकाल कैसे प्रभावित करते हैं।
टीएमसी ने बताया राज्यपाल का कार्यक्षेत्र
टीएमसी के नेता सौगत रॉय ने तो राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र का भी जिक्र कर दिया है। उन्होंने राज्यपाल के दायरे के बारे में बताते हुए कहा है कि जगदीप धनखड़ के पास इस वक्त तीन विकल्प थे। एक तो बिल पर हस्ताक्षर करना, बिल को वापस विधानसभा में वापस भेजना और तीसरा अगर बिल विधानसभा में लौटाया जाता है तो इस पर विचार के लिए इस राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है, लेकिन अगर इस विधेयक को वापस विधानसभा में लाया जाता है तो हम इसे फिर से पारित करा लेंगे।
आपको बता दें कि इस विधेयक के पक्ष में 182 विधायकों ने वोट डाला था, जबकि 40 ने इसके खिलाफ वोट किया था। हालांकि सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि सदन में 57 बीजेपी के विधायक थे और वोटिंग के दौरान मानदंडों का पालन नहीं किया गया था।












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