नारदा स्टिंग केस में टीएमसी नेताओं को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, अंतरिम जमानत मिली
कोलकाता, 28 मई: नारदा स्टिंग केस में गिरफ्तार किए गए पश्चिम बंगाल सरकार के दो मंत्रियों समेत चारों नेताओं को कोलकाता हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने चारों नेताओं को दो लाख रुपए के निजी बॉन्ड पर कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सीबीआई ने बीते हफ्ते नारदा स्टिंग केस में टीएमसी सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत बनर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद ये नेता कोर्ट के आदेश पर घरों में ही नजरबंद थे।
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने चारों नेताओं को अंतरिम जमानत देते हुए कहा है कि वह जांच में सीबीआई का सहयोग करेंगे। साथ ही नारदा मामले पर लंबित मुकदमे पर कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे।
नारदा स्टिंग टेप केस में कैबिनेट मंत्री फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी के घरों पर रेड के बाद सीबीआई ने 17 मई को इनको गिफ्तार किया था। सीबीआई की विशेष अदालत ने चारों को 17 मई को ही अंतरिम जमानत दे दी थी। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने चारों को हाउस अरेस्ट में भेज दिया गया था। हाउस अरेस्ट के आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अर्जी खारिज कर दी थी।
2016 में सामने आया था स्टिंग
नारदा स्टिंग टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले सामने थे। बताया गया था कि ये स्टिंग 2014 में किया गया था। इस स्टिंग में कथित तौर पर कई टीएमसी नेताओं को रिश्वत लेते दिखाया गया था। इसी स्टिंग में फरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी का नाम भी सामने आया था। ये स्टिंग ऑपरेशन नारद न्यूज पोर्टल ने किया था। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2017 में स्टिंग सीबीआई जांच का आदेश दिया था। जिसके बाद सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। बता दें कि इस समय सोवन चटर्जी टीएमसी में नहीं हैं। वहीं फरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी इस समय राज्य सरकार में मंत्री और मदन मित्रा टीएमसी के विधायक हैं। स्टिंग में दिखे कुछ नेता अब भाजपा में भी शामिल हो चुके हैं।












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