शादी के बाद छूटी थी पढ़ाई: बेटियों के सपोर्ट पर लिया एडमिशन, एक ही क्लास में साथ में करती हैं पढ़ाई
नई दिल्ली, 23 सितंबर। सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। अगर आपके अंदर सीखने और कर गुजरने का जज्बा है, तो आप किसी भी उम्र में अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। ऐसी ही कुछ कहानी कोलकाता की रहने वाली संगीता डे की है। संगीता 40 वर्ष की उम्र में जर्नलिज्म की पढ़ाई कर रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी बेटी भी उनके साथ ही पढ़ती है। मां-बेटी क्लास में एक ही सीट पर एक साथ बैठती हैं। संगीता के इस जज्बे की सभी तारीफ कर रहे हैं।

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शादी के 26 साल बाद पूरी कर रही हैं उच्च शिक्षा का सपना
संगीता की शादी जल्दी हो गई थी। यही वजह थी संगीता का उच्च शिक्षा का सपना टूट गया था। संगीता की दो बेटियां हैं। एक बेटी का नाम शर्मिष्ठा और दूसरी बेटी का नाम सहेली है। संगीता अक्सर अपनी दोनों बेटियों के साथ इस बात पर चर्चा करती थीं कि वह शादी की वजह से पढ़ाई नहीं पूरी कर पाईं। संगीता की ये बातें सुनकर बेटियों ने उन्हें प्रेरित किया और उन्होंने एडमिशन ले लिया।

मां-बेटी एक साथ पढ़ती हैं ऐसे हुआ खुलासा
संगीता अपनी बेटी सहेली के साथ हर दिन क्लास करने जाती थीं, लेकिन पूरे क्लास में किसी को भी नहीं पता था कि यहां मां-बेटी एक साथ पढ़ाई करती हैं। हालांकि, 19 सितंबर को उत्तरी कोलकाता के महाराजा मनिंद्र चंद्र कॉलेज की शिक्षिका शिल्पी मुखर्जी हायर सेकेंडरी (एचएस) में टॉप लिस्ट में जगह बनाने वाली छात्राओं की फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही थीं। इस दौरान उनकी नजर क्लास में दो छात्रों के आयु के अंतर पर पड़ी। इस पर उन्होंने तुरंत पूछा तो पता चला कि मां-बेटी एक साथ क्लास में पढ़ाई करती हैं। संगीता और सहेली दोनों ने हाल ही में दूरस्थ शिक्षा के जरिए एचएस क्लियर किया था। मां को 500 में 438 और बेटी को 500 में से 397 अंक मिले हैं।

1996 में शादी के बाद छूट गई थी पढ़ाई
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक संगीता आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती थीं, लेकिन 1996 में शादी होने के बाद उन्हें मजबूरी में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। संगीता के मुताबिक शर्मिष्ठा का जन्म 1997 में, सहेली का 2004 में हुआ था। दो बच्चों की देखभाल और घर के कामों की वजह से वह पढ़ाई से पूरी तरह दूर हो गईं थीं।

टेलीकॉलिंग की जॉब करती हैं संगीता
संगीता ने बताया कि साड़ी में कॉलेज जाना उन्हें अजीब लगता था। ऐसे में उन्होंने अपने बैग में यूनिफॉर्म ले रखी थी और कॉलेज पहुंचने पर उसे बदल दिया करती थीं। वहीं, कॉलेज से छूटने पर साड़ी पहन लिया करती थीं। संगीता ने बताया कि शादी के 26 साल बाद स्कूल जाना कभी आसान नहीं होता। लेकिन मेरी बेटियों ने मेरा समर्थन किया और मैं फिर से पढ़ाई करने लगी। वहीं, संगीता की बेटी सहेली का कहना है कि जब एचएस के नतीजे आए तो बाबा बहुत खुश हुए। उन्होंने मुझे चिढ़ाते हुए कहा कि मां ने मुझसे ज्यादा अंक हासिल किए। हालांकि, जर्नलिज्म की डिग्री पूरी करने के बाद भी संगीता का इस फील्ड में करियर बनाने का कोई इरादा नहीं है। संगीता टेली-कॉलिंग की जॉब ही करेंगी। वहीं, संगीता के इस जज्बे की एचओडी बिस्वजीत दास ने भी सराहना की।












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