Mamata Banerjee: अगर उपचुनाव में फंसा पेंच तो TMC के पास क्या है मास्टरस्ट्रोक ? जानिए

कोलकाता, 6 जुलाई: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा का चुनाव हार चुकी हैं। इसलिए उन्हें शपथग्रहण के 6 महीने के अंदर उपचुनाव जीत कर विधानसभा का सदस्य बनना संवैधानिक मजबूरी है। उपचुनाव के जरिए तृणमूल सुप्रीमो को विधानसभा में पहुंचाने के लिए पार्टी के विधायक शोभनदेव चटोपाध्याय उनकी परंपरागत भवानीपुर सीट खाली भी कर चुके हैं। लेकिन, कोरोना की वजह से भवानीपुर समेत राज्य की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव टलने की सियासी अटकलें लगाई जा रही हैं। जबकि, संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी को 9 नवंबर तक विधानसभा का चुनाव जीतकर आना है और चुनाव आयोग के पास उपचुनाव करवाने के लिए अभी काफी वक्त है। लेकिन, अगर कोविड की संभावित तीसरी लहर के चलते उपचुनाव टालना ही पड़ा तो क्या होगा? कुछ भी हो टीएमसी ने हर स्थिति के लिए अपनी वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रखी है।

विधान परिषद गठित करने के लिए प्रस्ताव पास

विधान परिषद गठित करने के लिए प्रस्ताव पास

मंगलवार को टीएमसी सरकार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधान परिषद गठन करने के लिए प्रस्ताव पास कराया है। सदन में उपस्थित 265 विधायकों में से 196 ने इसके पक्ष में वोट दिया है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है और यह सिर्फ ममता बनर्जी को उपचुनाव नहीं होने की स्थिति में विधान पार्षद बनाने के लिए किया गया है। बता दें कि ममता ने विधानसभा चुनाव के दौरान इस तरह का वादा भी किया था। नियमों के मुताबिक राज्य विधानसभा में सीटो की संख्या 294 है तो एक-तिहाई नियम के आधार पर अधिकतम 98 सदस्यीय उच्च सदन की व्यवस्था हो सकती है। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे भी विधान परिषद के ही सदस्य हैं।

पहले भी बंगाल में रह चुकी है विधान परिषद की व्यवस्था

पहले भी बंगाल में रह चुकी है विधान परिषद की व्यवस्था

ऐसा नहीं है कि बंगाल में यदि विधान परिषद गठित होती है तो यह पहली बार होगा। 5 जून, 1952 को ही वहां पर विधान परिषद गठित की जा चुकी थी, जिसमें 51 सदस्य होते थे। लेकिन, 21 मार्च, 1969 को यह व्यवस्था खत्म कर दी गई। ममता बनर्जी अपने पहले कार्यकाल से ही इसे पुनर्गठित करने का वादा करती आ रही हैं। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में तृणमूल नेता के लिए यह राजनीतिक कदम इतना आसान भी नहीं है। क्योंकि, इस प्रस्ताव को संसद की दोनों सदनों की भी मंजूरी लेनी पड़ेगी, जिसके लिए ममता को मोदी सरकार का साथ चाहिए।

टीएमसी का अंतिम मास्टरस्ट्रोक क्या है ?

टीएमसी का अंतिम मास्टरस्ट्रोक क्या है ?

तृणमूल कांग्रेस इत्मिनान है कि यदि विधान परिषद के रास्ते में भी अड़ंगा लगता है तो भी उसके पास एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उपचुनाव टलने पर पैदा होने वाली संभावित संवैधानिक संकट से भी बचा सकता है। पार्टी सांसद और प्रवक्ता सौगत रॉय ने ईएनएस से कहा है,'यदि उपचुनाव नहीं होते, तो वह 6 महीने खत्म होने के समय से दो दिन पहले इस्तीफा दे देंगी और दो दिन बाद फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले लेंगी।' यानी तृणमूल के नेता वहां तक सोच रहे हैं, जहां तक संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि भी नहीं पहुंची थी! गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट पर अपने पूर्व सहयोगी और मौजूदा नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई थीं।

किन राज्यों में है विधान परिषद ?

किन राज्यों में है विधान परिषद ?

बता दें कि इस समय देश के कुल 6 राज्यों में ही विधान परिषद हैं। ये राज्य हैं- आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश। पहले जम्मू और कश्मीर में भी विधान परिषद होती थी, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से वहां यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है। यदि, पश्चिम बंगाल में भी इसके गठन का रास्ता साफ हो जाता है तो देश में बंगाल सातवां ऐसा राज्य हो जाएगा।

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