कोलकाता रेप-मर्डर केस: कहीं असली गुनहगारों को बचाना तो नहीं चाहतीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी? 5 सवाल

Kolkata Doctor Rape Murder case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन मांगों लेकर टीएमसी नेताओं के साथ सड़कों पर उतर गईं, उसने हस भयानक वारदात में राज्य सरकार से जवाब मिलने की जगह उसी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ममता बनर्जी सिर्फ सीएम ही नहीं हैं। वह पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य मंत्री भी हैं और गृह विभाग भी उन्हीं के पास है। मतलब, मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ जिस जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया, उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की है और 14-15 अगस्त की दरमियानी रात वहां जो कथित तौर पर 'प्रायोजित' हिंसक भीड़ ने हमला किया, गृहमंत्री के तौर पर उसकी भी जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

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ममता बनर्जी किससे मांग रही हैं जवाब?
सवाल है कि तब मुख्यमंत्री किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं और किससे जवाब मांग रही हैं? जबकि, महिला डॉक्टर के रेप से लेकर उसकी निर्मम हत्या तक में सीधे तौर पर जवाबदेही उनकी ही बनती है।

ममता बनर्जी सीबीआई से जो मांग कर रही हैं, वह कानून का मजाक है?
16 अगस्त को ममता की अगुवाई में टीएमसी का जो प्रदर्शन हुआ, उस दौरान मुख्यमंत्री ने सीबीआई से जो मांग की है, वह उनके 14 साल से मुख्यमंत्री होने और उससे पहले केंद्र में मंत्री होने की समझदारी पर भी सवालिया निशान खड़े करता है।

उन्होंने कहा, 'रविवार तक (18 अगस्त) सीबीआई को जांच खत्म करके दोषी को फांसी दिलाने में मदद करनी है। हमारी कोलकाता पुलिस ने 90 फीसदी जांच पूरी कर ली थी।' प्रश्न उठता है कि देश के किस कानून के तहत यह मुमकिन है? क्या ममता एक महिला डॉक्टर के साथ हुई इस रूह कंपा देने वाली वारदात के कसूरवारों को सजा दिलाने के प्रति वाकई गंभीर हैं?

पीड़िता के माता-पिता की आशंका से खुल रही है बंगाल सरकार की पोल
जबकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की माता-पिता ने सीबीआई को बताया है कि पिछले कुछ हफ्ते से उनकी बिटिया इतने दबाव में थी कि अस्पताल भी नहीं जाना चाहती थी। उन्हें शक है कि यह गैंग रेप का केस है, इसलिए बाकी गुनहगारों की भी गिरफ्तारी की उम्मीद कर रहे हैं। फिर बंगाल की पुलिस जांच पूरी करने के करीब थी या फिर इसे निपटाने में लगी हुई थी?

उन्होंने यहां तक कहा है कि आरोपी संजय रॉय अगर इस अपराध में शामिल है भी तो वह किसी के इशारे पर काम रहा था। उनका कहना है कि अस्पताल की और से इस मामले को पूरी तरह से रफा-दफा करने की कोशिश हुई। जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बेटी का शव देखने तक के लिए तीन घंटे रोक दिया गया। सवाल है कि यह सब किसके इशारे पर हो रहा था?

बंगाल सरकार पर उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जिस तरह से उपद्रवी भीड़ ने हमला किया, उसमें आंदोलनकारी भी टीएमसी के लोगों का हाथ होने की आशंका जता रहे हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की नाकामी की विपक्षी दलों पर ठीकरा फोड़ने से भी परहेज नहीं किया। तथ्य यह है कि हमला हुआ और ममता सरकार उसे रोकने में नाकाम रही है।

यहां तक कि आंदोलनकारी डॉक्टरों की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह सब उस सेमिनार हॉल से सबूत मिटाने के लिए किया गया, ताकि सीबीआई के हाथ कोई अहम साक्ष्य न लग जाए! मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में कुछ हमलावारों को टीएमसी पार्षदों का करीबी तक बताया जा रहा है।

अबतक जो रिपोर्ट सामने आई हैं, उससे यह दावा करने की कई वजहें सामने आ रही हैं कि यह सिर्फ रेप का मामला नहीं है और न ही इसमें सिर्फ एक अपराधी के शामिल होने की स्थिति लग रही है। फिर ममता सीबीआई के हाथ में केस जाने के बाद ही इसपर राजनीति क्यों करने लगी हैं?

1) डॉक्टर रेप और हत्या के केस को रफा-दफा करने की कोशिश के पीछे कौन?
बंगाल सरकार को आज चंद सवालों का जवाब देना चाहिए। जैसे, ट्रेनी का शव जब भयावह स्थिति में था, फिर भी इसे सुसाइड कहने वाले तत्कालीन प्रिंसिपल संदीफ घोष को बचाने की कोशिश क्यों की गई? इस्तीफे के बावजूद उन्हें दूसरे अस्पताल में उसी पद पर क्यों भेजा गया। जबकि, उनपर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं।

2) आरोपी प्रिंसिपल पर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
संदीप घोष ने पीड़ित का नाम और पहचान प्रेस कांफ्रेंस में क्यों जाहिर किया? तब ममता की पुलिस ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की? जबकि, सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों के पीछे तो उन्होंने तुरंत पुलिस छोड़ना शुरू कर दिया है।

3) परिजनों को पीड़िता का शव दिखाने से घंटों रोका क्यों गया?
परिजनों को अपनी इकलौती बेटी के शव को देखने तक से घंटों रोका क्यों गया और किसके कहने पर रोका गया? क्राइम सीन पर आखिर ऐसा क्या चल रहा था, जिसे सामने आने का डर सता रहा था?

4) चेस्ट विभाग में जांच के दौरान मरम्मत की क्यों पड़ी?
जब जांच चल ही रही है तो चेस्ट विभाग में मरम्मत का काम क्यों शुरू करवाया गया? गौरतलब है कि इसी विभाग से पीड़िता जुड़ी हुई थी और यहीं के सेमिनार हॉल में उसका कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बहुत ही बेरहमी से मौत की नींद सुला दिया गया।

5) क्या पकड़ा गया आरोपी सिर्फ प्यादा है?
क्या यह सामान्य रेप और हत्या के मामले से भी बड़ा कांड है? क्या यह सबकुछ साजिश के तहत किया गया है और पकड़ा गया आरोपी सिर्फ मोहरा है या इस गुनाह का एक छोटा सा प्यादा है? क्या वारदात के पीछे मेडिसिन माफिया का हाथ है? अगर ऐसा है तो इस माफिया के सिर पर किसका हाथ है?

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