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Kolkata Case: पश्चिम बंगाल सरकार ने मौत की सजा की मांग की, कोलकाता HC 27 जनवरी को करेगा मामले की सुनवाई

Kolkata Case: पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले में सियालदाह सिविल और क्रिमिनल कोर्ट द्वारा आरोपी संजय रॉय को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। राज्य सरकार ने इस सजा को अपर्याप्त मानते हुए आरोपी के लिए मृत्युदंड की मांग की है।

एडवोकेट जनरल ने दी याचिका

यह कदम राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता द्वारा उठाया गया। जिन्होंने मामले की सुनवाई के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति देबांगशु बसाक की अध्यक्षता में अदालत ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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मूल सजा और विवाद

इससे पहले सियालदाह कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था। यह फैसला पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ पीड़ित परिवार के लिए असंतोष का कारण बना। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अगर यह मामला कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में होता तो आरोपी को मृत्युदंड दिलाने के लिए सख्त कदम उठाए जाते।

उन्होंने इस तरह के मामलों में कोलकाता पुलिस द्वारा तेजी से की गई जांच और दोषियों को सजा दिलाने का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कोलकाता पुलिस ने केवल 54-60 दिनों के भीतर कई मामलों में दोषियों को मृत्युदंड दिलाया है।

पीड़ित परिवार का विरोध

पीड़िता के पिता ने भी अदालत के फैसले और 17 लाख रुपए के मुआवजे की पेशकश पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार मुआवजे को स्वीकार करने के बजाय दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने का इच्छुक है।

उन्होंने सीबीआई जांच पर भी असहमति जताई और कोलकाता पुलिस द्वारा मामले को संभालने में हुई परेशानियों की ओर इशारा किया। परिवार ने न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। जो उनके गहरे दुख और जवाबदेही की मांग को दर्शाता है।

मृत्युदंड की मांग पर बहस

आरजी कर मामला अब देश में जघन्य अपराधों के लिए सजा की पर्याप्तता और न्याय के स्वरूप को लेकर बहस का केंद्र बन गया है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मृत्युदंड की मांग से न्याय प्रणाली में सख्ती और अपराधियों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत संदेश देने का प्रयास दिखता है।

महत्वपूर्ण तिथियां और घटनाक्रम

सियालदाह कोर्ट ने आजीवन कारावास और 50,000 रुपए जुर्माना सुनाया है। 27 जनवरी उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई की तिथि है। राज्य सरकार मृत्युदंड की मांग पर अडिग है।

समुदाय में आक्रोश और न्याय की मांग

यह मामला न केवल पीड़ित परिवार के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए न्याय की मांग का प्रतीक बन गया है। इसने न्याय प्रणाली में पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई, और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त राहत प्रदान करने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया है।

आरजी कर बलात्कार और हत्या मामला भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली की चुनौतियों और गंभीर अपराधों के लिए सजा की प्रकृति पर चर्चा का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। जैसे-जैसे मामला उच्च न्यायालय में आगे बढ़ेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कैसे न्याय, नैतिकता और सजा के बीच संतुलन बनाएगी।

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