Dinajpur Unrest: तनाव के कारण धारा 144 लगाई गई, NCPCR चीफ ने ममता बनर्जी की सरकार को घेरा
दिनाजपुर में नाबालिग की मौत मामले में विपक्षी दल भाजपा पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ-साथ ममता बनर्जी की सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर रही है। NCPCR प्रमुख ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर में नाबालिग बच्ची की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार लड़की की मौत पर विरोध के बाद बंगाल के कालीगंज में निषेधाज्ञा लागू की गई है।
अधिकारी के अनुसार 17 वर्षीय एक लड़की की मौत के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हुई। रविवार को उत्तर दिनाजपुर जिले के कालीगंज के कुछ हिस्सों में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लगानी पड़ी।
इस मामले में NCPCR प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने कहा, पश्चिम बंगाल सरकार का बर्ताव वर्षों से एक जैसा है, वे खुद गलतियां करते हैं और फिर उन्हें छिपाने की कोशिश करते हैं। इसी कारण सरकार आयोग के काम में हमेशा बाधा डालती है।
उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज में एक दलित लड़की के कथित बलात्कार और हत्या पर एनसीपीसीआर प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने कहा, जिलाधिकारी (DM) अक्षम हैं। आयोग उनका इंतजार कर रहा है, लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता के परिवार ने आरोपियों के राजनीतिक संबंध होने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। एनसीपीसीआर प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी आड़े हाथों लिया।
कानूनगो ने कहा, सीएम हमेशा यहां के अक्षम अधिकारियों को बचाने की कोशिश करती हैं। जब राज्य में बच्चों की सुरक्षा की बात आती है तो मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अक्षम मानता हूं। उनकी लापरवाही के कारण घटनाएं होती हैं और बच्चे मर जाते हैं।
बकौल NCPCR प्रमुख कानूनगो, मुख्यमंत्री की लापरवाही से लोगों की मौत के बाद सीएम के आदेश के आधार पर ही प्रशासन इन घटनाओं पर पर्दा डालने का प्रयास करता है। बता दें कि रविवार को कानूनगो के दौरे से कुछ ही देर पहले धारा 144 लगाई गई।
दिनाजपुर की घटना के बारे में इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में आयोग के प्रतिनिधि मृतका के परिवार से मिलने जाने वाला था। हालांकि, कुछ घंटे पहले निषेधाज्ञा यानी धारा 144 का ऐलान कर दिया गया।
कालीगंज में तनाव के बारे में अधिकारी ने कहा, सीआरपीसी की धारा 144 के तहत एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। रविवार से एक पखवाड़े के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई है। कानून के अनुसार, चार या अधिक लोगों की सभा की अनुमति नहीं होगी। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।
कानूनगो को एनसीपीसीआर के तीन अन्य प्रतिनिधियों के साथ लड़की के परिवार से मिलने की अनुमति दी गई थी। उनके साथ पुलिस भी थी। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए पश्चिम बंगाल आयोग ने आरोप लगाया कि कानूनगो और उनकी टीम ने "मामले का राजनीतिकरण" कर रही है।
एनसीपीसीआर चीफ कानूनगो पर सीपीसीआर अधिनियम के उल्लंघन का आरोप भी लगा है। WBCPCR की चेयरपर्सन अनन्या चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि NCPCR टीम के दौरे की "बिल्कुल ज़रूरत नहीं थी।" राज्य को बदनाम करने की कोशिश की गई।
चक्रवर्ती के अनुसार, NCPCR ने अवैध रूप से पश्चिम बंगाल में प्रवेश किया। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए पत्रकारों की बड़ी टुकड़ी को अपने साथ मृतक के घर ले गए। यह शर्मनाक है। कानूनगो की टीम के दौरे से बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।
भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, "राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार को रोकने में पूरी तरह से विफल रही है। कलियागंज के लोगों ने लड़की की नृशंस हत्या के खिलाफ आंदोलन किया, तो पुलिस ने उन्हें पीटा। असंवेदनशील तरीके से शव कब्जे में लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि NCPCR के साथ काम करने के बजाय पश्चिम बंगाल का आयोग (WBCPCR) टीएमसी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। समिक भट्टाचार्य ने कहा, हम नाबालिगों के लिए न्याय चाहते हैं। इंसाफ केवल एनसीपीसीआर द्वारा ही दिया जा सकता है।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि एनसीपीसीआर प्रमुख ने "राजनीतिक कारणों" से उस जगह का दौरा किया। उन्होंने कहा, नाबालिग लड़की की मौत दुखद है। पुलिस घटना की जांच कर रही है, लेकिन जांच से पहले, भाजपा हिंसा भड़काने की ताक में है।
घोष ने कहा, भाजपा नेता अफवाह उड़ाकर लोगों को भड़का रहे हैं। इस कारण प्रशासन को कुछ क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एनसीपीसीआर प्रमुख को पत्रकारों की बड़ी टुकड़ी के साथ तत्काल दौरे की जरूरत क्यों पड़ी? यात्रा राजनीतिक है।
बता दें कि दिनाजपुर के कालियागंज में पुलिस बल की भारी तैनाती के बीच तनावपूर्ण शांति है। शुक्रवार को एक नहर से नाबालिग का शव बरामद होने के बाद स्थानीय लोगों की पुलिस के साथ झड़प हुई। हिंसा के मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
मृतक लड़की की मां ने शिकायत दायर की है। इसके आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
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उत्तर दिनाजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) एमडी सना अख्तर के अनुसार, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कोई चोट नहीं दिखी है। अब इस मामले में NCPCR की सक्रियता भी दिख रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट ता इंतजार किया जा रहा है।












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