क्या सच में डर गई हैं ममता बनर्जी,बोलीं.....तो भाजपा बना लेगी सरकार
कूच बिहार: नंदीग्राम के संग्राम के एक दिन बाद ममता बनर्जी ने बंगाल के वोटरों से अपील की है कि वो प्रदेश में फिर से उनकी सरकार चाहते हैं तो उन्हें भारी बहुमत दिलाने में मदद करें। उन्होंने चुनाव से पहले ही भाजपा के खिलाफ खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए कहा है कि अगर उन्हें बड़ा बहुमत नहीं मिला तो उनके लिए सत्ता में वापस लौटना नामुकिन हो जाएगा। उन्होंने शुक्रवार को कूच बिहार के दिनहाता में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए इस तरह की आशंका जताई है। हालांकि, उन्होंने फिर से पूरा आत्मविश्वास दिखाते हुए अपना दावा दोहराया है कि वो नंदीग्राम सीट से चुनाव जीत रही हैं।

.....तो बीजेपी सरकार बना लेगी- ममता बनर्जी
टीएमसी सुप्रीमो ने कूच बिहार के दिनहाता में कहा है, 'नंदीग्राम में तो मैं जीत रही हूं, लेकिन यह चुनाव मेरे लिए नहीं है। आपको यह भरोसा देना होगा कि टीएमसी को 200 से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए, नहीं तो बीजेपी पैसों की ताकत पर गद्दारों को खरीद लेगी।' पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं और समान्य बहुमत की सरकार बनाने के लिए सिर्फ 148 सीटों की ही दरकार है। यानी ममता को अपने मौजूदा उम्मीदवारों पर भी पूरा भरोसा नहीं रह गया है और वह अभी से डर रही हैं कि अगर बड़ा बहुमत नहीं मिला तो चुनाव के बाद भी उनके विधायक पहले के नेताओं की तरह ही फिर से गुलाटी मार सकते हैं। उन्होंने साफ तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए कहा कि अगर टीएमसी 200 सीटों तक नहीं पहुंच पाई 'तो पैसों के दम पर बीजेपी सरकार बना लेगी।'

मुस्लिम वोटों के बंटने का भी सता रहा है डर
शुक्रवार की रैलियों में उन्होंने बिना नाम लिए अपने पुराने समर्थक फुरफुरा शरीफ के मौलवी अब्बास सिद्दीकी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुसलमानों, दलितों और आदिवासी वोटरों से कहा कि वो विभाजनकारी ताकतों के प्रति सचेत रहें। वो बोलीं- 'एक नेता हैं जो हैदराबाद से आए हैं और एक फुरफुरा शरीफ से। उनकी जाल में मत फंसना। वे लोग यहां लोगों को धर्म के आधार पर बांटने आए हैं। मेरी अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के वोटरों से गुजारिश है कि मेहरबानी करके किसी को भी अपने वोट को बांटने मत दीजिए।'

पीएम मोदी पर लगाया 'वोट बैंक पॉलिटिक्स' का आरोप
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार उनके निशाने पर बने हुए हैं। उन्होंने फिर से उनकी बांग्लादेश यात्रा पर निशाना साधा है और उनपर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने पीएम मोदी की इस विदेश यात्रा को 'वोट बैंक पॉलिटिक्स' कहा है। उनका आरोप है कि यह यात्रा बंगाल में मतदाताओं को प्रभावित करने के इरादे से की गई। उन्होंने वहां पर मतुआ समुदाय के लोगों से उनकी मुलाकात को लेकर भड़ास निकाली है। उनका कहना है, 'चुनाव चल रहे हैं और वो बांग्लादेश चले गए। बंगाल के लोग बेवकूफ नहीं हैं। सभी लोग जानते हैं कि वो बांग्लादेश क्यों गए।' उन्होंने तमिलनाडु में हुई कार्रवाई को लेकर भी बीजेपी पर निशाना साधा है कि वह केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है।

'हमें हराने के लिए बीजेपी की मदद कर रहा है आयोग'
वहीं चुनाव आयोग पर ममता ने अपना हमला जारी रखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आयोग बीजेपी के लिए काम कर रहा है। लेकिन, फिर भी उन्हें यकीन है कि पहले दोनों चरणों के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग से 63 शिकायतें करने के बाद उसने बीजेपी नेताओं के निर्देशों पर सबको अनसुना कर दिया। उनका आरोप है कि '63 के अलावा मैंने एक एफआईआर भी दर्ज कराई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है क्योंकि चुनाव आयोग मौन है। बीजेपी के गुंडे हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा पर ईसी चुप है। ईसी हमें हराने के लिए बीजेपी की मदद कर रहा है। मैं ईसी से कहना चाहती हूं कि वो जो भी करें, लेकिन लोग बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला कर चुके हैं। 2 मई को एकबार सरकार बन जाने दीजिए, तब मैं निजी तौर पर सभी 63 मामलों को देखूंगी और किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा।'












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