भारत के 'अकेले' चीनी अखबार को मिला जीवनदान! Seong Pow की फिर चमकेगी किस्मत
सियोंग पॉव के एक बार फिर से छपने की उम्मीद जगी है। यह देश का संभत अकेला चीनी भाषा का अखबार है, जो कोविड लॉकडाउन से नहीं छप रहा है। इसका प्रकाशन कोलकाता से होता था।

पिछले महीने हमने देश की 'अकेले' चीनी अखबार सियोंग पॉव (Seong Pow) पर हमेशा के लिए ताला लटकने की आशंका पर एक स्टोरी छापी थी। लेकिन, खबर का ऐसा असर हुआ कि अखबार को नया जीवनदान मिलने की उम्मीद जग गई है। इस अखबार का प्रकाशन 3 साल से ज्यादा वक्त से बंद है।
सियोंग पॉव पर लटक गया था ताला
देश के एकमात्र मंदारिन भाषा का अखबार सियोंग पॉव पहले कोविड लॉकडाउन के समय से छपना बंद हो गया था। फिर अखबार के बुजुर्ग संपादक के निधन की वजह से इसपर ऐसा ताला लटका कि इसके फिर से शुरू होने की सारी संभावनाएं ही खत्म हो चुकी थी।
तीन महीने के भीतर फिर से प्रकाशन की उम्मीद
टीओआई की एक खबर के मुताबिक अब कोलकाता में रहने वाले चीनी समाज के लोगों ने चाइनीज वाणिज्य दूतावास के सहयोग से देश के संभवत: एकमात्र मंदारिन भाषा के अखबार 'द ओवरसीज चाइनीज कॉमर्स ऑफ इंडिया' या 'सियोंग पॉव' को तीन महीने के भीतर फिर से शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।
सियोंग पॉव को महामारी के दौरान रोकना पड़ा- चाइनीज काउंसल जनरल
कोलकाता के तंगरा में आज भी चीनी समुदाय के लोग रहते हैं। उनकी संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखने में सियोंग पॉव की दशकों से बड़ी भूमिका रही है। चाइनीज काउंसल जनरल झुआ लियू ने अंग्रेजी अखबार से कहा है, 'सियोंग पॉव को महामारी के दौरान रोकना पड़ा था।'
'विरासत को बनाए रखने के लिए मिलकर करेंगे काम'
उनके मुताबिक, 'एक दैनिक अखबार के रूप में एडिट, प्रिंट और डिस्ट्रिब्यूट करने के लिए आवश्यक मैनपावर को बनाए रखना कठिन था। लेकिन, अब टीओआई से प्रोत्साहन मिलने से, हम अखबार की विरासत को बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।'
खस्ताहाल हो चुका है सियोंग पॉव का पुराना दफ्तर
2020 में सियोंग पॉव के संपादक के निधन के बाद से कोलकाता के न्यू तंगरा रोड स्थित इसका पुराना दफ्तर तो धीरे-धीरे पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है और वह जगह एक तरह से कूड़ा घर बन गया है। फिर उसके दफ्तर को उसी रोड पर एक आवासीय इमारत में शिफ्ट कर दिया गया।
250 प्रतियों के साथ प्रकाशन की उम्मीद
लेकिन, संपादकीय स्टाफ की नियुक्ति और अखबार की प्रिंटिंग और डिस्ट्रिब्यूशन से जुड़ा पूरा लॉजिस्टिक अभी तक अनिश्चितकाल के लिए लटका हुआ था। इस अखबार को फिर से शुरू करने के कार्य से जुड़े चीनी समाज के एक नेता वु वी यान ने कहा कि नए सिरे से इस अखबार का अगले तीन महीनों में करीब 250 प्रतियों के साथ प्रकाशन होगा।
चीनी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिख सकती है झलक
गौरतलब है कि इस अखबार का अंतिम एडिशन 2020 के मार्च में लॉकडाउन से ठीक पहले निकला था। यह अखबार अब कोलकाता में रहने वाले चीनी समाज के करीब 2,000 लोगों के योगदान से निकलेगा। इन गर्मियों में चीनी समुदाय से जुड़े कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होने वाले हैं, जहां इसके नए एडिशन की झलक दिखाई पड़ सकती है।
यान के मुताबिक, 'कोलकाता में इतने कम संख्या में चीनी लोगों के होने के बावजूद, हमें लगता है कि यह अखबार निकलना चाहिए और इसका संरक्षण होना चाहिए। इस अखबार की विरासत बहुत ही अपूर्व है।'
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