कितनी संपत्ति के मालिक हैं प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत
कोलकाता, 5 जुलाई: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने कांग्रेस छोड़ दी है और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इस बात की संभावना पिछले कई दिनों से लगाई जा रही थी। प्रणब मुखर्जी खुद कांग्रेस के बहुत कद्दावर नेता रह चुके थे और उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी कांग्रेस की ही राजनीति की है। लेकिन, प्रणब दा के निधन के बाद से दोनों भाइयों में कुछ मौकों पर अंडरस्टैंडिंग देखने को नहीं मिली है। सोमवार को भी जब अभिजीत ने फाइनली कांग्रेस को टाटा कह ही दिया तो उनकी बहन ने उनके इस फैसले को बहुत ही दुखद करार दिया है। हालांकि, अभिजीत मुखर्जी कांग्रेस से दो-दो बार लोकसभा भी पहुंच चुके हैं। लेकिन, अब उन्होंने उस पार्टी को अलविदा कह दिया है, जिसमें रहकर उनके पिता देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे थे।

कांग्रेस से मुंह मोड़कर टीएमसी पर 'ममता'
अभिजीत मुखर्जी ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर और तृणमूल कांग्रेस में जाकर अपने पिता की पुरानी पार्टी को बहुत जोर का झटका दिया है। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा है कि 'कांग्रेस ने मुझे कोई पद नहीं दिया और इसलिए मैं अब टीएमसी में शामिल हो रहा हूं। मैं एक सैनिक के रूप में काम करूंगा और जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वो पूरा करूंगा।' उन्होंने बंगाल में बीजेपी को रोकने वाली पार्टी लीडर ममता बनर्जी के साथ काम करना अपना सम्मान बताया है और एक तरह से 2024 में उनके प्रधानमंत्री बनने की संभीवना जता डाली है। मुखर्जी ने कहा है 'ममता बनर्जी ने हाल में जिस रह से बीजेपी की सांप्रदायिक के लहर को रोका है, मुझे विश्वास है कि भविष्य में दूसरों के समर्थन से वह पूरे देश में भी ऐसा ही करने में सक्षम होंगी। '

कितनी संपत्ति के मालिक हैं अभिजीत मुखर्जी
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अभिजीत मुखर्जी ने चुनाव आयोग को जो एफिडेविट दिया था, उसके मुताबिक उनकी और उनकी पत्नी चित्रलेखा मुखर्जी की कुल संपत्ति उस समय पर 15.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की थी। उन्होंने जो ब्योरा दिया था उसके अनुसार उनके पास अपनी कुल 1,85,90,417 रुपये की चल संपत्ति थी। इसके अलावा उनके पास 1,50,000 रुपये कैश थे। जबकि उनकी पत्नी चित्रलेखा मुखर्जी के पास 1,55,72,341 रुपये की चल संपत्ति थी और 2,50,000 रुपये उनके पास कैश में पड़े थे। बात अचल संपत्ति की करें तो अभिजीत मुखर्जी के पास उस समय के बाजार भाव के अनुसार कुल 3,25,44, 251 रुपये मूल्य की अचल संपत्ति थी। वहीं उनकी पत्नी के पास 7,66,43,465 रुपये की अचल संपत्ति थी। देनदारी के नाम पर तब अभिजीत मुखर्जी पर सिर्फ 9,000 रुपये थे, लेकिन उनकी पत्नी पर 3,04,12,037 रुपये की देनदारी भी थी।

अभिजीत मुखर्जी के पास जूलरी और रिवॉल्वर
मार्च, 2019 में अभिजीत मुखर्जी के पास कुल 45,56,600 रुपये की जूलरी थी और उनकी पत्नी के पास 75,71,580 रुपये की। अभिजीत मुखर्जी ने वित्त वर्ष 2017-18 में अपनी आय 20,17,259 रुपये बताई थी, वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में 18,99,927 रुपये। जबकि उनकी पत्नी की आमदनी 2017-18 में 49,82,920 रुपये थी, जो कि 2018-19 में 37,12,519 रुपये रह गई थी। चुनावी हलफनामे में अभिजीत मुखर्जी ने भारत में बनी एक रिवॉल्वर की भी जानकारी दी थी, जो 2006-07 में 62,634 रुपये में आत्मरक्षा के लिए खरीदी गई थी। इसके अलावा मुखर्जी दंपती के पास गाड़ियों का भी पूरा काफिला है। इनमें खुद अभिजीत मुखर्जी के पास एक पुरानी महिंद्रा जीप, एक मारुति 800 डीलक्स, एक मोटर साइकिल, एक बोलेरो डीएलएक्स, एक हीरो स्प्लेंडर बाइक और एक मारुति जेन एस्टिलो हैं। वहीं उनकी पत्नी ने थोड़ी ज्यादा महंगी कारों का शौक फरमाया है, जिनके पास टोयोटा कोरोला और ऑडी कारें हैं।

2019 में लोकसभा चुनाव हार गए थे अभिजीत मुखर्जी
2019 के लोकसभा चुनाव में अभिजीत मुखर्जी पश्चिम बंगाल के जंगीपुर संसदीय क्षेत्र में महज 19.61 फीसदी वोट (2,55,554 वोट) लाकर तीसरे नंबर पर पहुंच पाए थे। उस सीट पर टीएमसी के खलीलुर रहमान 43.14 फीसदी वोट (5,62,518 वोट) लाकर चुनाव जीते थे। दूसरे नंबर पर भाजपा की उम्मीदवार मफुजा खातून रही थीं, जिन्हें 24.3 फीसदी वोट (3,16,147 वोट) मिले थे। प्रणब मुखर्जी के निधन के बाद परिवार की सियासत ने करवट बदली है और अब अभिजीत अगले आम चुनाव के बाद ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने जैसी भविष्यवाणियां कर रहे हैं।

अभिजीत मुखर्जी का राजनीतिक करियर
61 वर्षीय अभिजीत मुखर्जी के लिए प्राचीन इतिहास, मानव संसाधन विकास और कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी पसंद के विषय हैं; और बंगाल से होने के नाते उन्हें फुटबॉल में भी काफी लगाव है और वो यह खेल खेलते भी हैं। इसके अलावा ट्रेकिंग और पर्वतारोहण भी इनके खास दिलचस्पी है। वह पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और 15वीं लोकसभा का उपचुनाव भी जीत चुके हैं। 2014 में वह दूसरी बार चुनाव जीतकर लोकसभा में दाखिल हुए थे।












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