बंगाल की यूनिवर्सिटी 'मिनी-संदेशखाली'! गवर्नर सीवी आनंद बोस का बड़ा दावा, न्यायिक जांच के आदेश
Bengal News: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य के विश्वविद्यालय परिसरों को लेकर बहुत ही बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उनके मुताबिक बंगाल के शासकीय विश्वविद्यालय परिसर मिनी-संदेशखाली में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों का कथित राजनीतिक इरादे से हिंसा, भ्रष्टाचार के लिए गलत इस्तेमाल करने के मामलों की न्यायिक जांच के भी आदेश दिए हैं।
कोलकाता में राजभवन के अधिकारियों की ओर से यह जानकारी दी गई है। बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस राज्य के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के चांसलर भी हैं। अधिकारी के मुताबिक राज्यपाल इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित करेंगे।

सभी विश्वविद्यालय परिसर मिनी संदेशखाली बने- राज्यपाल
बंगाल के राजभवन के अधिकारी ने कहा, 'राज्यपाल को महसूस हुआ है कि राज्य सरकार की ओर से संचालित सभी विश्वविद्यालय परिसर मिनी संदेशखाली बन चुके हैं। आज, उन्होंने पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, हिंसा और चुनाव प्रचार और राजनीतिक मकसदों के लिए विश्वविद्यालय परिसरों के दुरुपयोग की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।'
यौन उत्पीड़न की घटनाओं के लिए कुख्यात हुआ संदेशखाली
हाल ही में बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की संदेशखाली में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं पर अनेक महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के मामले का खुलासा हुआ है, जिसकी वजह से यह जगह पूरे देश में कुख्यात हो चुका है।
गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी संदेशखाली की घटना में राज्य पुलिस और सत्ताधारी दल के रवैए पर बहुत ही गंभीर टिप्पणियां की हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री को हटाने का दे चुके हैं आदेश
न्यायिक जांच का राज्यपाल का आदेश बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु को कैबिनेट से हटाने के उनके निर्देश के एक दिन बाद ही आया है। दरअसल, 30 मार्च को ममता के मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में टीएमसी नेताओं के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की थी।
संदेशखाली की घटनाओं पर घिरी हुई है तृणमूल सरकार
विपक्षी बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में भी संदेशखाली की घटना को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया हुआ है। पार्टी ने इसकी एक पीड़िता को अपना उम्मीदवार बनाकर भी उतारा है। संदेशखाली की घटनाओं के सरगना माने जाने वाले तृणमूल नेता शेख शाहजहां को लेकर ममता सरकार शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। उसे अदालत की इजाजत पर ईडी की ओर से गिरफ्तार किए जाने के बाद टीएमसी ने निष्कासित किया था।
ऐसे समय में प्रदेश के विश्वविद्यालयों के चांसलर की ओर से इसके परिसरों को मिनी-संदेशखाली बताना इसकी गंभीरता की ओर इशारा करती है और इससे प्रदेश की राजनीति और गर्म हो सकती है। (इनपुट-पीटीआई)
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