Bengal Panchayat Election: 'हम रूस या यूक्रेन में हैं', TMC कार्यकर्ताओं के साथ झड़प पर बोले BJP नेता
Bengal Panchayat Election: चुनाव 8 जुलाई को एक ही चरण में सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक होगा। पंचायत चुनाव को सभी राजनीतिक दल आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव का निर्णनायक मान रहे हैं। ऐसे में सभी दल पूरा जोर लगाने में लगे
Bengal Panchayat Election: पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को होने वाले पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच हिंसा की खबरें सामने आने लगी हैं। बांकुरा में नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प देखने को मिली। वहीं, सुरक्षाकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में लगे रहे। ऐसे में बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि जिस तरह से बीजेपी कार्यकर्ताओं पर बम फेंके जा रहे हैं, उससे लगता है कि हम रूस या यूक्रेन में हैं।
आपको बता दें कि टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का मामला तब सामने आया है, जब एक दिन पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष पंचायत चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए थे। वहीं, हाई कोर्ट ने नामांकन दाखिल करने के लिए मतदान की अवधि बढ़ाने से भी इनकार कर दिया।

सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में मतदान
चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है। बंगाल पोल पैनल ने मिदनापुर, जलपाईगुड़ी, बीरभूम, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और मुर्शिदाबाद को संवेदनशील जिलों के रूप में चिन्हित किया है।
पंचायत चुनाव बीजेपी के लिए एक परीक्षा है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में प्रमुख विपक्ष के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। हालांकि, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) 2018 की तुलना में संगठनात्मक रूप से बहुत बेहतर स्थिति में है। उधर, सीपीआई (एम)-कांग्रेस गठबंधन, जैसा कि बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम हाजरा ने कहा, पिछले कुछ स्थानीय चुनावों और उपचुनावों ने काफी खोई हुई जमीन हासिल कर ली है।
8 जुलाई को मतदान, 18 को नजीते
आपको बता दें कि चुनाव 8 जुलाई को एक ही चरण में होगा। मतदान सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक होगा। वहीं, मतगणना 11 जुलाई को होनी है। मालूम हो कि 2018 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में, तृणमूल कांग्रेस ने 90 प्रतिशत सीटें जीती थीं। सभी 22 जिला परिषदों पर कब्जा कर लिया था। चुनावों में व्यापक हिंसा हुई, विपक्ष ने आरोप लगाया कि उसके उम्मीदवारों को कई सीटों पर नामांकन दाखिल करने से रोक दिया गया था।












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