बंगाल में पेपर में स्वतंत्रता सेनानियों को बताया 'आतंकवादी', BJP ने ममता सरकार को घेरा, क्या है पूरा मामला?
Bengal Exam Question Paper Row: पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर शिक्षा और इतिहास की व्याख्या को लेकर घमासान छिड़ गया है। इस बार विवाद की चिंगारी एक विश्वविद्यालय के इतिहास प्रश्नपत्र से भड़की है, जिसने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों को 'आतंकवादी' कहा।
इससे न सिर्फ राज्य की राजनीति को गर्मा दिया, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में फैली लापरवाही और वैचारिक हस्तक्षेप को भी उजागर कर दिया। मामला है पश्चिम मिदनापुर स्थित विद्यासागर विश्वविद्यालय का, जहां हाल ही में आयोजित बीए ऑनर्स (इतिहास) की छठे सेमेस्टर की परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसा एक प्रश्न पूछा गया, जिसने राज्य भर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।

उस सवाल में मिदनापुर के तीन ऐसे जिला मजिस्ट्रेटों के नाम पूछे गए जिन्हें "terrorists" द्वारा मारा गया था, और संदर्भ में जिन क्रांतिकारियों का ज़िक्र था, वे कोई और नहीं बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सम्मानित सेनानी थे।
क्या था मामला?
पश्चिम मिदनापुर स्थित विद्यासागर विश्वविद्यालय के बीए इतिहास (ऑनर्स) के छठे सेमेस्टर की परीक्षा के पेपर C14 - Modern Nationalism in India में एक सवाल ने विवाद की चिंगारी भड़का दी।
प्रश्न था, "Name three District Magistrates of Medinipur, who terrorists killed."
(मिदनापुर के उन तीन जिला मजिस्ट्रेटों का नाम बताइए, जिन्हें आतंकवादियों ने मार डाला था।) इस सवाल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों - बिमल दासगुप्ता, ज्योति जीवन घोष, प्रद्युत भट्टाचार्य और प्रबांशु पाल - को 'आतंकवादी' कहा गया, जिससे पूरे बंगाल में नाराजगी की लहर फैल गई।
बीजेपी ने ममता सरकार पर बोला हमला
भाजपा ने इस घटना को स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में अब भारतीय राष्ट्रवाद और इतिहास को विकृत किया जा रहा है।
भाजपा ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल से पोस्ट किया, "अब पश्चिम बंगाल में स्वतंत्रता सेनानी 'आतंकवादी' हो गए हैं!!! विद्यासागर विश्वविद्यालय के इतिहास ऑनर्स के प्रश्नपत्र में हमारे महान क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताया गया है। यह शर्मनाक है।"
भाजपा नेताओं ने कहा कि बंगाल कभी राष्ट्रीय चेतना और बौद्धिकता का केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब राज्य सरकार के शासन में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और युवाओं के मन में गलत सोच भरी जा रही है।
विश्वविद्यालय ने क्या दी सफाई
विवाद के बाद विद्यासागर विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक कुमार कर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मात्र एक प्रिंटिंग मिस्टेक थी। उन्होंने स्पष्ट किया "बीए इतिहास परीक्षा के प्रश्नपत्र में कल एक प्रिंटिंग मिस्टेक हो गई थी... मैंने परीक्षा नियंत्रक और इतिहास विभाग के अंडरग्रेजुएट बोर्ड ऑफ स्टडीज के चेयरपर्सन से रिपोर्ट मंगाई। जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह गलती मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान हुई और प्रूफरीडिंग के समय पकड़ी नहीं जा सकी। यह पूरी तरह से अनजाने में हुई भूल थी।"
कुलपति ने आगे कहा कि इस गलती के लिए जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्नपत्र के मॉडरेशन से जुड़े शिक्षक को तुरंत पद से हटा दिया है, और बोर्ड ऑफ स्टडीज के चेयरपर्सन को भी उनके पद से मुक्त कर दिया गया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
यह मामला केवल अकादमिक गलती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का कारण बन गया है। भाजपा के अनुसार, ममता सरकार के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक एजेंडा चलाया जा रहा है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की सच्ची तस्वीर को बदला जा रहा है।
हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से आई सफाई के बाद कुछ हलचल शांत जरूर हुई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि इतिहास जैसे संवेदनशील विषय में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई, और क्या प्रूफरीडिंग जैसी अहम प्रक्रिया में इतनी लापरवाही माफ की जा सकती है?












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