बंगाल में बीजेपी सिर्फ हारी नहीं है, टीएमसी ने उसे पूरी तरह से कैसे मसल दिया है ? आंकड़ों में देखिए
कोलकाता, 3 नवंबर: लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जिस तरह से टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को लगभग बराबरी की चुनौती दी थी, उससे लगा था कि लेफ्ट फ्रंट की तरह आने वाले दिनों में तृणमूल के भी दिन पूरे होने वाले हैं। लेकिन, विधानसभा चुनावों में जीत की शानदार हैट्रिक के बाद तृणमूल कांग्रेस ने उपचुनावों में जिस अंदाज में भारतीय जनता पार्टी का सफाया किया है, वह राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए बंगाल की विशेष राजनीतिक परिस्थितियों पर शोध के अनेकों टॉपिक उपलब्ध करवा सकता है। उपचुनावों के रिजल्ट बता रहे हैं कि बीजेपी वहां हारी नहीं है, उसकी कमर टूट चुकी है और फिलहाल रिकवरी की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही है।

बंगाल में कैसे गिरता गया है भाजपा का वोट शेयर
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने किस कदर उपचुनावों में भाजपा को रौंदा है, उसका सबूत पिछले तीन चुनावों के वोट शेयर की तुलना करने से मिल जाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 42 में से 18 सीटें जीती थीं और उसे 40.64% वोट मिले थे। इस साल मई में उसने 294 विधानसभा सीटों में से 77 पर कब्जा किया था और तब उसका वोट शेयर 38.13% था। लेकिन, मंगलवार को जिन 4 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे आए हैं, उसमें पार्टी ने अपनी दो सीटें भी टीएमसी के हाथों गंवा दी हैं और सिर्फ 14.50% ही वोट ला पाई है। भाजपा के पास अब बंगाल में लोकसभा के 17 सांसद और विधानसभा में 70 विधायक ही बच गए हैं। भाजपा के लिए सबसे चिंता की बात नॉर्थ बंगाल की दिनहाता विधानसभा सीट पर उसकी करारी शिकस्त है। ऐसे लगता है कि जिस राजबंशी वोटरों की वजह से उत्तर बंगाल को वह अपना गढ़ मानकर चल रही थी, वह भी बदले माहौल में टीएमसी की ओर कूच कर चुके हैं।
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बीते ढाई वर्षों में ममता बन गईं बंगाल की 'दबंग'
बीते ढाई वर्षों में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के प्रदर्शन को देखने पर साफ हो जाता है कि बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ने दूसरे दलों का चुनावी वजूद ही मिटाना शुरू कर दिया है। मसलन, 2019 में टीएमसी को लोकसभा की 22 सीटें मिली थीं और 43.69% वोट मिले थे। जबकि, इस साल विधानसभा में उसे 213 सीटें मिली थीं और 47.94% वोट प्राप्त हुए थे। लेकिन, चार सीटों पर हुए उपचुनावों में उसका वोट शेयर न सिर्फ 74.99% तक पहुंच गया है, बल्कि विधानसभा में उसके विधायकों की संख्या भी बढ़कर अब 215 हो चुकी है।

बंगाल उपचुनाव में भाजपा हारी नहीं, मसल दी गई है
बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल ने किस तरह से भाजपा को रौंद दिया है, उसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण केंद्रीय गृहराज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक का गढ़ माना जाने वाला दिनहाटा विधानसभा उपचुनाव का रिजल्ट है। लोकसभा सांसद होते हुए भी भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें इस सीट से उतारा था। यहां से वह 47.6% वोट लेकर जीते थे। जबकि टीएमसी उम्मीदवार 47.58% वोट लाकर मामूली अंतर (सिर्फ 57 वोट) से हार गया था। इस बार केंद्रीय मंत्री के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की सीट थी और उन्होंने उसी हिसाब से यहां प्रचार भी किया। लेकिन, उपचुनाव में यहां भाजपा सिर्फ हारी नहीं है, बल्कि वह बंगाल की राजनीति को लेकर नए सिरे से विचार करने पर मजबूर हो गई है। यहां टीएमसी प्रत्याशी को 84.15% वोट मिले हैं, जबकि प्रमाणिक की छोड़ी हुई सीट पर भाजपा उम्मीदवार सिर्फ 11.31% वोट जुटा पाया है। इसी तरह से शांतिपुर सीट भी भाजपा के पास थी। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां बीजेपी को 49.94% और टीएमसी को 42.72% वोट मिले थे। लेकिन, इस बार तृणमूल को 54.89% और बीजेपी को सिर्फ 23.22% वोट मिले हैं।

दो सीटों पर तृणमूल ने जीत का विशाल अंतर बनाया
उपचुनाव में तृणमूल को जो सभी चार सीटें मिली हैं, उनमें से गोसाबा और खरदाहा दोनों मई में भी उसे ही मिली थी। लेकिन, इस बार अलग ये है कि ममता बनर्जी की पार्टी ने अपनी जीत के अंतर को विशाल बना दिया है। गोसाबा में पिछली बार टीएमसी का उम्मीदवार 53.99% वोट लेकर जीता था और इस बार उसे 87.19% वोट मिले हैं। वहीं भाजपा का वोट शेयर यहां 41.88% से घटकर महज 9.95% रह गया है। इसी तरह खरदाहा में पिछली बार टीएमसी 49.04% वोट लेकर जीती थी। इस बार उसे 73.59% वोट मिले हैं। जबकि, बीजेपी का वोट शेयर 33.67% से घटकर 13.07% रह गया है।

बंगाल में सीपीएम की हुई है वापसी!
बंगाल विधानसभा उपचुनाव का परिणाम भले ही 4 सीटों की स्थिति का हाल बयां कर रहा है, लेकिन अगर इसके राजनीतिक संकेत को पढ़ने की कोशिश की जाए तो वह बहुत दूर तक जाता दिख रहा है। इसकी एक चौंकाने वाली बात ये है कि लेफ्ट फ्रंट खासकर सीपीएम की वहां के वोटरों के बीच में पुनर्वापसी हुई है। विधानसभा चुनावों में पार्टी को महज 4.73% वोट मिले थे। लेकिन, उपचुनाव में उसका वोट शेयर बढ़कर 7.28% हो गया है। शांतिपुर में पार्टी प्रत्याशी ने 19.57% वोट पाए हैं। हालांकि, खरदाहा में उसके वोट शेयर में करीब 4 फीसदी की कमी हुई है।












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