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Bengal BJP: 12 MLA निकल गए, सुवेंदु के घर में भी लग गई सेंध, बंगाल में किन 5 वजहों से मुश्किल में भाजपा?

Bengal BJP: पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहने वाला है। 2021 में पार्टी ने 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर सीपीएम का दर्जा छीन लिया था। हालांकि, यह प्रदर्शन भी 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले काफी निराशाजनक रहा था। लेकिन, उसके बाद के चार वर्षों में तो भाजपा की ताकत लगातार और भी कमजोर ही होती गई है।

अब पश्चिम बंगाल विधानसभा में इसकी सीटें घटकर मात्र 65 रह गई हैं। बीजेपी विधायक (MLA) तापसी मंडल का टीएमसी (TMC) में शामिल होना इसका सबसे ताजा उदाहरण है।

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इस रिपोर्ट में हम उन प्रमुख पांच कारणों का विश्लेषण करेंगे जिनकी वजह से पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थिति उम्मीदों से उलट डगमगाती नजर आ रही है-

Bengal BJP: 1. विधायकों का BJP छोड़ने का सिलसिला जारी

भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके विधायकों का लगातार पार्टी छोड़कर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होना है। 2021 के बाद से अब तक 12 विधायक (MLA) भाजपा छोड़ चुके हैं, जिनमें तापसी मंडल, मुकुल रॉय, कृष्ण कल्याणी और बिस्वजीत दास प्रमुख नाम हैं।

इन नेताओं का टीएमसी में जाना बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इसके अलावा, कुछ और विधायकों के भी टीएमसी में जाने की अटकलें हैं, जिससे बीजेपी की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

Bengal BJP News: 2. बंगाल भाजपा में संगठन की आंतरिक कमजोरी

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बीजेपी का संगठन अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व की कमजोरी से जूझ रहा है। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की चर्चा है, जिसके चलते उनकी निष्ठा पर सवालिया निशान लग रहा है।

पार्टी में विभिन्न विचारधाराओं से नेता आए हुए हैं, जिनकी वजह से समन्वय में भी दिक्कत हो रही है। इसका असर पार्टी के जमीनी जनाधार पर पड़ रहा है। कई जिलों में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा दबाव में है, इसका सबसे बुरा प्रभाव पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है।

Bengal BJP Politics: 3. सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व को लेकर गहराते सवाल

सुवेंदु अधिकारी, जो बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, उनके नेतृत्व को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। अधिकारी ने 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराकर भाजपा में एक मजबूत नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी।

लेकिन, हाल के घटनाक्रमों ने उनके प्रभाव को कमजोर किया है। खासकर, उनके ही गढ़ पूर्व मेदिनीपुर में तापसी मंडल के टीएमसी में जाने से उनकी पकड़ पर सवाल उठने लगे हैं। इसके अलावा, पार्टी के भीतर भी कई नेता उनके नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।

Bengal BJP Chunav: 4. 2024 के लोकसभा चुनावों में भी 2019 के मुकाबले प्रदर्शन काफी खराब हुआ

बंगाल में भाजपा के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव भी किसी झटके से कम नहीं थे। 2019 में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 में से 18 सीटें जीती थीं और टीएमसी को सिर्फ 22 पर समेट दिया था। लेकिन, 2024 में पार्टी इस प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही और मात्र 12 पर खिसक गई।

इस बार टीएमसी ने बीजेपी को कई सीटों पर कड़ी टक्कर दी, जिसकी वजह से कुछ महत्वपूर्ण सीटें हाथ से निकल गईं। इससे साफ जाहिर होता है कि बीजेपी के लिए राज्य में अपना जनाधार बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

Bengal BJP: 5. भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालों के बावजूद ममता और TMC का एकतरफा दबदबा कायम

बीजेपी ने ममता बनर्जी और टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कई हमले किए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए, लेकिन इसका राजनीतिक फायदा उठाने में वह असफल रही। इसके अलावा, राज्य में कानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालातों को भी भाजपा ने मुद्दा बनाया, लेकिन इसका प्रदेश की जनता पर वैसा असर अबतक नहीं दिखा है।

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