आखिर क्या है नबन्ना? जहां तक मार्च निकालने की जिद में कोलकाता में हुआ बड़ा बवाल
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना समेत कई अन्य मुद्दों को लेकर पश्चिम बंगाल में छात्र विरोध तेज हो गया है। छात्रों के प्रोटेस्ट 'नबन्ना अभिजन' के दौरान कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा चाक चौबंद की है। राजधानी कोलकाता में 19 पॉइंट्स पर बैरियर लगाने के साथ सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख चौराहों पर कुल मिलाकर 6000 पुलिस कर्मियों की तैनाती है। इस बीच छात्रों को उग्र प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नियंत्रण के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज भी किया। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि बंगाल में नबन्ना अभिजन क्या है और इसके क्या मायने हैं?
इन सब के बीच बंगाल में आरजी कर मेडिकल कालेज में लेडी डॉक्टर के साथ हुई घटना को लेकर आक्रोश के बीच ममता सरकार फिर से सवालों के घेरे में है। प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल का प्रयोग विरोध को दबाने के आरोप लग रहे हैं। इससे पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के अन्य सरकारी आस्पतालों में चिकित्सकों के ट्रांसफर को लेकर ममता सरकार पर सवाल उठे थे, हलांकि बाद में इस आदेश सीए ममता ने खुद रद्द किया था।

कोलकाता में छात्रों ने अपने विरोध को नबन्ना अभियान क्यों नाम दिया है? विरोध के जरिए छात्र संगठन सराकर से किस तरह की मांग रख रहे हैं, इन सब बातों मायने हैं। क्योंकि हाल के कुछ वर्षों के भीतर पश्चिम बंगाल सरकार की कार्यशैली और राज्य में कानून व्यवस्था के हालात को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्या है नबन्ना?
पहले बंगाल का सचिवालय रायटर्स बिल्डिंग में हुआ करता था। यह एक 14 मंजिला इमारत है। जब 2011 में ममता बनर्जी सरकार में हावड़ा में हुबली नदी के किनारे इसका निर्माण शुरू किया गया था। इसके टॉप फ्लोर पर मुख्यमंत्री का ऑफिस है और माना जाता है कि 13वें फ्लोर में चीफ और होम सेकेट्री का ऑफिस है। जबकि चौथे और पांचवें फ्लोर पर कई विभाग हैं। लेकि हावड़ा में स्थित इस बिल्डिंग नाम अब नबन्ना है। नब का अर्थ नया होता है। इससे पहले ममता सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान में नबन्ना शब्द जोड़ा था। इस अभियान को नबन्ना चलो अभियान नाम दिया गया था। जिसके बाद वामपंथी छात्र संगठनों ने भी नबन्ना अभियान शुरू किया था।












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