90 साल पूर्व काशी में अकाल पड़ने पर 5 साथियों ने किया था बाबा का जलाभिषेक, आज भी चली आ रही परंपरा
90 साल पूर्व अकाल पड़ने पर पांच साथियों ने किया था बाबा का जलाभिषेक, आज भी करते हैं परंपरा का निर्वहन
वाराणसी, 18 जुलाई : भोलेनाथ के प्रिय माह सावन के पहले सोमवार को काशी में यादव बंधुओं द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया जाता है। आज भी सावन के पहले सोमवार के दिन यादव बंधुओं ने बाबा का जलाभिषेक कर 90 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। यादव बंधुओं ने आज सुबह मानमंदिर घाट से गंगा जल लेकर डेढ़सीपुल, साक्षी विनायक, ढूंढीराज गणेश और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे। बाबा का जलाभिषेक करने के बाद यदुवंशी समाज के लोग ललिता घाट गए और वहां से जल लेकर महामृत्युंजय मंदिर के लिए चले गए।

90 साल पूर्व बरसात न होने पर किए थे जलाभिषेक
चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष लालजी यादव के अनुसार आज से 90 वर्ष पूर्व सन् 1932 में बरसात नहीं हो रही थी और सूखा पड़ने के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त था। उसी समय ब्रह्मनाल इलाके में रहने वाले चुन्नी सरदार और रामजी सरदार तथा शीतला गली में रहने वाले भोला सरदार, कृष्णा सरदार व बच्चा सरदार आदि कुल पांच साथियों ने बाबा का जलाभिषेक करने का संकल्प लिया था। उन्होंने यह भी प्रण किया था कि यदि बाबा का जलाभिषेक करने के बाद बरसात हो जाती है तो यदुवंशी समाज के लोग हर साल सावन माह के पहले सोमवार को बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। उस समय बाबा का जलाभिषेक करने के बाद काशी में जोरदार बरसात हुई, उसके बाद उसी समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। हालांकि कोरोना काल में 2 वर्ष तक यादव बंधुओं द्वारा सांकेतिक रूप से बाबा का जलाभिषेक किया गया था।
सिंधिया घाट से जल लेने का रखा गया था प्रस्ताव
काशी विश्वनाथ धाम का भव्य रूप में निर्माण हो जाने के बाद इस बार जिला प्रशासन द्वारा यदुवंशी समाज के लोगों को ललिता घाट से जल न लेकर सिंधिया घाट से जल लेने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा से वे किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। प्रशासन द्वारा सुझाए गए सिंघिया घाट से जल लेने की बात को यदुवंशी समाज द्वारा नकार दिया गया। हालांकि बाद में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों संग बैठक करने के बाद परंपरा अनुसार ललिता घाट से ही जल लेने पर सहमति बनी।
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