Varanasi Tourism: 20 प्रमुख स्थलों पर दिखेगा बदलाव, अगले दो महीनों में शुरू होंगी पर्यटन परियोजनाएं
Varanasi Tourism: वाराणसी अब केवल एक धार्मिक शहर नहीं, बल्कि भारत का अगला ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनने की ओर अग्रसर है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार ने शहर की संस्कृति, विरासत और पर्यटन को विश्व पटल पर लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
शुक्रवार को केंद्रीय पर्यटन सचिव वी. विद्यावती की अध्यक्षता में वाराणसी में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें शहर के समग्र पर्यटन विकास पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में पर्यटन सचिव ने स्पष्ट किया कि काशी की पहचान सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

कहा कि एक वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभारा जाएगा, जहां अध्यात्म, इतिहास, कला और स्थानीय विरासत को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए अगले दो महीनों में 16 से 20 प्रमुख स्थलों पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बदलाव केवल सतही न हो, बल्कि उसका असर दीर्घकालिक हो। घाटों का सौंदर्यीकरण, साफ-सफाई, पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच और स्थानीय व्यापारियों को समर्थन देने जैसे मुद्दे प्राथमिकता में रखे जाएंगे।
काशी को मिलेगा नया टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर
वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इसमें स्मार्ट सड़कें, घाटों की सफाई, रिंग रोड और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। नाव सेवाओं को भी दुरुस्त करने की योजना है ताकि गंगा दर्शन को और खास बनाया जा सके।
साथ ही पर्यटकों के लिए हेरिटेज टूर और गाइडेड विज़िट्स की सुविधा को बढ़ाया जाएगा। पर्यटन स्थलों पर साइनेज, इंटरैक्टिव मैप्स और ऑडियो गाइड की सुविधा देने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्थानीय इतिहास की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
बैठक में बनारसी साड़ी, लकड़ी के खिलौने, और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि काशी के कलाकारों और शिल्पकारों को ट्रेनिंग और बाजार की सुविधा दी जाएगी ताकि वे वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकें।
गाइड्स और लोकल टूर ऑपरेटर्स को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे उनकी सेवाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की बन सकें। इससे एक ओर जहां स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, वहीं पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण अनुभव मिलेगा।
योगा और आयुर्वेद को मिलेगी नई पहचान
प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश मेश्राम ने बैठक में कहा कि काशी को योग, वेलनेस और आयुर्वेद का हब बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार आर्थिक सहायता भी देगी। नेचुरोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा केंद्रों को शहर में स्थापित करने की योजना है।
इन वेलनेस सेंटरों से न सिर्फ विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि घरेलू स्वास्थ्य पर्यटन को भी बल मिलेगा। इससे बनारस की पहचान एक 'होलिस्टिक हीलिंग डेस्टिनेशन' के रूप में स्थापित की जा सकेगी।
काशी को सिंगल डेस्टिनेशन न मानते हुए, सरकार ने इसके आस-पास के पर्यटन स्थलों को जोड़ने की योजना बनाई है। इसमें चंदौली के इको-पर्यटक स्थल, विंध्य क्षेत्र, माँ विन्ध्यवासिनी मंदिर और चुनार किला को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है।
इसके साथ ही सोनभद्र जिले के प्राचीन जीवाश्म पार्क और अन्य ऐतिहासिक स्थलों को एक कॉम्बो टूरिस्ट पैकेज के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटकों का वाराणसी प्रवास लंबा और समृद्ध हो सके।
डिजिटल तकनीक से जुड़ेगा काशी का इतिहास
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने प्रस्ताव दिया कि घाटों की पौराणिकता को डिजिटल फॉर्मेट में संरक्षित किया जाए। नावों पर चढ़ते समय पर्यटकों को ऑडियो फाइल्स के जरिए उन घाटों का ऐतिहासिक विवरण सुनाया जा सकेगा।
इसके अलावा फूड आउटलेट्स का मानकीकरण और हाइजीन सुनिश्चित करने की भी बात कही गई। सांस्कृतिक संध्या जैसे आयोजन नियमित करने की योजना है, जिससे पर्यटक वाराणसी की सांस्कृतिक विविधता का आनंद ले सकें।
बैठक में नगर निगम और विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया गया कि अनावश्यक होर्डिंग, फ्लेक्स और केबल्स को हटाकर शहर को व्यवस्थित किया जाए। पर्यटन स्थलों पर साइनेज की व्यवस्था की जाएगी, जिससे भ्रमण सहज और सुगम हो।
नगर आयुक्त ने बताया कि शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई उपाय किए गए हैं, जिनमें सफाई अभियान, सुरक्षा व्यवस्था और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नई तकनीकें शामिल हैं।












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