Varanasi Flood Update: 12 हजार लोग राहत शिविरों में, गांव-मोहल्ले जलमग्न, क्या टूटेगा 1978 का बाढ़ रिकॉर्ड?
Varanasi Flood Update: वाराणसी में गंगा एक बार फिर रौद्र रूप में नजर आ रही है। सोमवार दोपहर तक गंगा का जलस्तर 72.06 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर है। प्रशासन की निगाहें लगातार जलस्तर पर टिकी हैं, क्योंकि गंगा अब 1978 के रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रही है।
लगातार बढ़ते जलस्तर का असर न सिर्फ गंगा पर, बल्कि वरुणा और गोमती नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। इन नदियों का पानी आसपास के इलाकों में भरने लगा है, जिससे शहर के कई हिस्से पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ नगरीय क्षेत्रों में भी बाढ़ का प्रभाव साफ देखा जा सकता है।

अस्सी घाट, सामने घाट, नगवां और गंगोत्री विहार कॉलोनी जैसे इलाके पूरी तरह जलमग्न हैं। वहीं वरुणा के उफान से नक्खी घाट, सलारपुर और कोनिया में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अब तक सैकड़ों लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।
53 गांव और 24 वार्डों पर बाढ़ का असर
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावितों के लिए व्यापक राहत व्यवस्था की गई है। प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि गंगा और सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर के चलते वाराणसी के 53 गांव और 24 वार्ड बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
करीब 2,100 परिवारों के 12,000 से अधिक लोगों को विभिन्न राहत शिविरों में शरण दी गई है। कुल 46 राहत केंद्रों पर भोजन, जल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिविर में सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना सामुदायिक रसोई से मुहैया कराया जा रहा है।
80 नावें, 5 NDRF टीमें और 226 पुलिसकर्मी
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए जिला प्रशासन ने 80 नावें तैनात की हैं। इसके अतिरिक्त एनडीआरएफ की पांच टीमें 19 मोटर बोट्स के साथ राहत कार्यों में लगी हुई हैं। पुलिस विभाग भी 24 नावों और 226 जवानों के साथ बाढ़ क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहा है।
प्रशासन ने बताया कि बाढ़ से अब तक करीब 1900 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। सरकार की ओर से किसानों को विशेष आर्थिक सहायता देने की तैयारी है। किसानों की फसल क्षति का आंकलन किया जा रहा है।
इधर, गंगा का पानी अब मणिकर्णिका घाट की छत तक पहुंच चुका है, जिससे घाट पर पारंपरिक तरीके से दाह संस्कार संभव नहीं रह गया है। शवदाह अब घाट की छत पर ही किया जा रहा है। शवों को घाट तक ले जाने के लिए परिजनों को नाव के सहारे गंगा पार करनी पड़ रही है।
कई घाटों पर सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। वहीं, गंगा का पानी काशी विश्वनाथ मंदिर के द्वार तक पहुंच चुका है। अब केवल कुछ ही सीढ़ियां शेष हैं, इसके बाद बाढ़ का पानी सीधे विश्वनाथ धाम परिसर में प्रवेश कर सकता है।
चौबीसों घंटे सक्रिय है कंट्रोल रूम
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि न हो, इसके लिए 11 क्विक रेस्पॉन्स टीमें (QRT) लगातार निगरानी कर रही हैं। साथ ही, ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की हवाई निगरानी की जा रही है। लाउडस्पीकर और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है।












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