Voter List में नाम नहीं होने के बावजूद विद्यापीठ के कुलपति ने डाला वोट, जांच में सामने आई चौंकाने वाली बात
यूपी निकाय चुनाव 2023 के दौरान मतदाता सूची में नाम न होने के बावजूद भी विद्यापीठ के कुलपति द्वारा मतदान किए जाने का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच कराई गई। जांच में सेक्टर मजिस्ट्रेट और पीठासीन अधिकारी दोषी ठहराए गए है

UP Nikay Chunav 2023: निकाय चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट में नाम ना होने के बावजूद भी वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति द्वारा मतदान किए जाने का मामला प्रकाश में आने के बाद इसकी जांच कराई गई।
जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में सेक्टर मजिस्ट्रेट और पीठासीन अधिकारी को दोषी पाया गया है। कहा जा रहा है कि इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। वहीं वोटर लिस्ट में नाम न होने पर भी मतदान किए जाने से लोग अब सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल, यूपी निकाय चुनाव 2023 के दौरान 4 मई को पहले चरण का मतदान हो रहा था। बताया जा रहा है कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं था।
प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी विद्यापीठ परिसर में स्थित मानविकी संकाय भवन में बने पोलिंग स्टेशन पर पहुंचे और जब मतदाता सूची देखें तो उसमें से उनका नाम गायब था। ऐसे में उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में उन्होंने वोटिंग किया था और उनका नाम भी था, ऐसे में नाम कैसे कटा।
बताया जा रहा है कि सेक्टर मजिस्ट्रेट सत्येंद्र पाठक से जब उन्होंने इस बारे में शिकायत की तो सेक्टर मजिस्ट्रेट मतदाता पहचान पत्र में अपने हाथ से नाम जोड़ने के बाद कुलपति को मतदान की अनुमति दे दी। इस दौरान पीठासीन अधिकारी द्वारा भी कोई विरोध नहीं किया गया।
मतदान करने के बाद कुलपति बाहर निकले और इस दौरान उन्होंने फोटो भी खिंचाई। फोटो खींचे जाने के बाद जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो लोगों द्वारा सवाल खड़े किए जाने लगे। मामला जब जिलाधिकारी तक पहुंचा तो जिलाधिकारी ने जांच बैठा दी।
इस मामले में जिलाधिकारी/ जिला निर्वाचन अधिकारी एस राजलिंगम द्वारा पूरे मामले की जांच एडीएम प्रशासन/उप जिला निर्वाचन अधिकारी रणविजय सिंह द्वारा कराई गई। इस दौरान पोलिंग स्टेशन पर तैनात सभी कर्मचारियों के बयान लिए गए।
बयान के बाद स्पष्ट हुआ कि सेक्टर मजिस्ट्रेट सत्येंद्र पाठक तथा पीठासीन अधिकारी द्वारा मतदाता सूची में नाम ना होने के बावजूद भी कुलपति को मतदान करने से रोका नहीं गया बल्कि मतदाता सूची में अपने से नाम जगह पर मतदान करने दिया गया।
ऐसे में उप जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जांच करने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई। बताया जा रहा है कि दोषी लोगों के खिलाफ मंगलवार को जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की जाएगी।












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