UP News: पीएम मोदी के करीबी सुनील ओझा का दिल्ली में निधन, हाल ही में यूपी से भेजे गए थे बिहार

UP News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और उत्तर प्रदेश के पूर्व सह प्रभारी सुनील ओझा का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। निधन की सूचना मिलने के बाद राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर है।

सुनील ओझा को हाल ही में उत्तर प्रदेश से हटकर बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था। मूल रूप से गुजरात के भावनगर जिले के रहने वाले सुनील ओझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में से एक माने जाते थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में बन रहे गड़ौली धाम को लेकर भी सुनील ओझा चर्चा में रहे।

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कहा जाता है कि इसी के बाद सुनील ओझा को उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी पद से हटाते हुए बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था। सुनील ओझा को बिहार का प्रभारी बनाए जाने के बाद मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा। सुनील ओझा को यूपी से बिहार भेजे जाने के चलते राजनीतिक गलियारों में भी काफी हड़कंप मची हुई थी।

भावनगर से शुरू किए थे राजनीतिक करियर
मूल रूप से गुजरात के रहने वाले सुनील ओझा अपने पोलिटिकल करियर की शुरुआत गुजरात के भावनगर सीट से किए थे। भावनगर सीट से सुनील ओझा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक रहे।

बाद में साल 2007 में भारतीय जनता पार्टी से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वे चुनाव मैदान में उतर गए। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी से उनकी दूरियां भी बढ़ गईं। उसके बाद उन्होंने महागुजरात जनता पार्टी नाम से अपनी एक अलग पार्टी बनाई थी।

2011 में फिर आ गए पीएम के करीब
बाद में धीरे-धीरे दूरियां मिटने लगीं और साल 2011 में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुनः करीब आए। उसके बाद गुजरात में भारतीय जनता पार्टी द्वारा उन्हें प्रवक्ता बनाया गया। पार्टी का प्रवक्ता बनाए जाने के बाद जब साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ने आए तो चुनाव जीतने के लिए सुनील ओझा सहित दो अन्य नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई।

गड़ौली धाम को लेकर आए चर्चा में
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, इसी बीच वाराणसी से सटे मिर्जापुर जनपद में करीब 20 बीघा जमीन खरीद कर बालमुकुंद फाउंडेशन के तरफ से गड़ौली धाम आश्रम का निर्माण कराया जाने लगा। गढ़वाली धाम में कई आयोजन हुए जिसमें देश के दिग्गज लोगों का आगमन हुआ।

बताया जाता है कि इस आश्रम का निर्माण सुनील ओझा की ही देखरेख में हो रहा था। अंदर खाने में यह भी चर्चा चली थी कि आश्रम का निर्माण कराए जाने से ही पार्टी के कुछ लोगों द्वारा नाराजगी जाहिर की गई थी। उसके बाद सुनील ओझा को उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी से हटकर बिहार का सह प्रभारी बना दिया गया था।

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