Varanasi News: पुलिस ने मृत व्यक्ति को भेज दिया जेल, कहानी जानकर चौंक जाएंगे आप
वाराणसी में सरकारी दस्तावेजों में एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया। वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाता रहा लेकिन उसे न्याय नहीं मिला, अब उसे जेल भेज दिया गया है।

Varanasi में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को जेल भेजा है, जिसकी आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक काफी पहले मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि साल 2019 में एक व्यक्ति ने उसके खिलाफ चौबेपुर थाने में मारपीट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। वारंट जारी होने के बाद सरकारी दस्तावेजों में मृत व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चौबेपुर थाने की पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

खुद को जिंदा साबित करने में रहा नाकाम
दरअसल, वाराणसी जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौनी गांव निवासी संतोष मूरत सिंह नामक शख्स को कई साल पहले सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। खुद को जिंदा साबित करने के लिए संतोष मुहूर्त सिंह द्वारा कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ा गया लेकिन वह सफल नहीं हो सका। जिले के आला अधिकारियों से खुद को जिंदा साबित करने के लिए प्रार्थना पत्र देने के अलावा वाराणसी में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान भी वह अपने गले में 'मैं जिंदा हूं' का बोर्ड टांगे घूमता नजर आता रहा। काफी प्रयास के बाद भी संतोष मूरत सिंह को सरकारी दस्तावेजों में जिंदा साबित नहीं किया गया।

गले में 'मैं जिंदा हूं' का बोर्ड लटकाकर पहुंचा थाने
सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित किए जा चुके संतोष मूरत सिंह के खिलाफ वर्ष 2019 में चौबेपुर थाने में मारपीट और एससी एसटी की धाराओं में एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराया गया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में वारंट जारी होने के बाद चौबेपुर थाने की पुलिस द्वारा संतोष मूरत सिंह को सोमवार को थाने बुलाया गया। सरकारी दस्तावेजों में मृत हो चुका संतोष मूरत गले में 'मैं जिंदा हूं' लिखा बोर्ड टांग कर थाने पहुंच गया। चौबेपुर थाने की पुलिस द्वारा संतोष मुहूर्त सिंह के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करते हुए उसे जेल भेजा दिया गया।

गया था मुंबई और इधर घोषित हो गया मृत
वर्षों पहले संतोष मूरत सिंह अपने घर से मुंबई में पैसा कमाने के लिए चला गया था। संतोष द्वारा बताया गया कि मुंबई में वह नाना पाटेकर के यहां रहता था और वहीं पर रह कर काम करता था। काफी साल तक मुंबई में रहने के बाद जब वह अपने घर वापस लौटा तो पता चला कि सरकारी दस्तावेजों में उसकी मौत हो गई है। उसके बाद जब वह अधिकारियों के पास पहुंचा और खुद को जिंदा साबित करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। दस्तावेजों में मृत व्यक्ति संतोष मूरत सिंह वर्षों से खुद को जिंदा रहने के लिए प्रयास कर रहा है।

न्यायालय में कैसे जिंदा साबित करेगी पुलिस
अब देखने वाली बात यह भी है कि जिस व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है, उसे पुलिस द्वारा न्यायालय में जिंदा कैसे साबित किया जाएगा। यहां यह भी बात है कि यदि वह जिंदा साबित नहीं होता तो मृत व्यक्ति अपराध कैसे कर सकता है। फिलहाल संतोष मुहूर्त सिंह के मामले में अभी आगे क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उसे जेल भेजे जाने के बाद लोगों में तरह-तरह की चर्चा चल रही है।
Recommended Video













Click it and Unblock the Notifications