ओपी राजभर की पार्टी के नेता ने ज्ञानवापी मस्जिद पर दिया बयान, मुस्लिम पक्ष से की अपील- हिंदू पक्ष को सौंप दें
वाराणसी, 08 मई: वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे को लेकर सपा की सहयोगी ओपी राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शशी प्रताप सिंह का एक बयान सामने आया है। शशी प्रताप ने मुस्लिम समाज से ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष को सौंप देने की अपील की है। सिंह बयान जारी करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ मंदिर के बगल में बना हुआ ज्ञानवापी मस्जिद वास्तव में कभी मंदिर था। इस मस्जिद को ध्यान से देखें तो यह साफ दिखाई देता है कि किसी जमाने में मंदिर का ऊपरी हिस्सा को तोड़कर मस्जिद का ढांचा बनाया गया है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील
शशि प्रताप सिंह ने इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि हिंदुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए मां श्रृंगार गौरी के मंदिर को हिंदुओं के हाथ में देने की प्रक्रिया शुरू करें। जहां तक मुसलमान भाइयों की बात है तो बनारस जनपद में अनगिनत मस्जिदें हैं। ज्ञानवापी मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्ष को कहीं और प्रदेश सरकार को जमीन देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बनारस पूरी दुनिया में गंगा-जमुनी तहजीब, राम-रहीम सद्भावना और भाईचारा के लिए प्रसिद्ध है। दोनों समाज की आस्था को ध्यान में रखते हुए कोर्ट सही फैसला करे। सिंह ने इस मामले में राजनीतिकरण नहीं होने की भी अपील की।
जज के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का कराया जा रहा है सर्वे
बता दें, ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित दर्शन-पूजन को लेकर वाराणसी के सिविल जज के आदेश पर सर्वे कराया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष इस सर्वे का लगातार विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को गहमागहमी के बीच पौने चार घंटे की कार्रवाई हो सकी। हालांकि, शनिवार को मुस्लिम पक्ष के विरोध की वजह से ज्ञानवापी परिसर में वीडियोग्राफी और सर्वे का काम नहीं हो पाया। यह कार्रवाई 9 मई तक के लिए टाली गई है।

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी पर साधा निशाना
उधर, इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ज्ञानवापी मस्जिद मामले में राजनीति करने के लिए अयोध्या जैसे एक और मुद्दे की तलाश कर रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, कांग्रेस नेता ने कहा, "मामला अदालत में है लेकिन मैं कहूंगा कि अयोध्या के फैसले के बाद बीजेपी की हालत पंखहीन पक्षी की तरह है, क्योंकि वे नौकरियों, मुद्रास्फीति और 'अच्छे दिनों' पर राजनीति नहीं लड़ सकते हैं। वे देख रहे हैं एक और अयोध्या मुद्दे के लिए ताकि वे राजनीतिकरण कर सकें।"












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