RTI का नहीं मिला जवाब, अब अनाथ बच्चों को खिलाना होगा 25 हजार रुपये का खाना, जानिए क्या है पूरा मामला
RTI Varanasi: वाराणसी में बिजली विभाग के अधिकारियों को जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना का जवाब ना देना महंगा पड़ गया। इस मामले में अधिकारियों की लापरवाही को ध्यान में रखते हुए दोषी अधिकारियों को दो अनाथालय में बच्चों को भोजन कराने की सजा सुनाई गई है।
राज्य सूचना आयोग द्वारा दोषी अधिकारियों को अनाथालय के बच्चों को भोजन कराने का निर्देश देते हुए यह भी कहा गया है कि बच्चों को 25 हजार रुपए में ही भोजन करना है। इस अनूठी सजा को लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चा चल रही है।

दरअसल वाराणसी जनपद के मच्छोदरी इलाके के सप्तसागर निवासी उमाशंकर यादव के पिता बसंती यादव के नाम से सन 1959 में बिजली का कनेक्शन हुआ था। बताया जा रहा है कि उमाशंकर यादव के पिता के निधन के बाद बिजली का कनेक्शन कटवा दिया गया।
कनेक्शन कटवाने के साथ ही परिवार वालों ने पीडी (कनेक्शन विच्छेदन) भी कराया। बावजूद इसके बिजली विभाग की लापरवाही से उनका कनेक्शन चला रहा। इतना ही नहीं बिजली विभाग द्वारा नया मीटर भी जारी कर दिया गया।
मीटर आवंटित होने के बाद बिजली विभाग द्वारा एक साथ हजारों रुपए का बिल बनाकर भेज दिया। इसकी जानकारी होने के बाद उमाशंकर और उनके परिवार के लोग हैरान रह गए।
मामले में उमाशंकर द्वारा आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई। सूचना मांगने के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा मांगी गई सूचना को उपलब्ध नहीं कराई गई। उसके बाद उमाशंकर यादव राज्य सूचना आयोग में शिकायत कर दिए।
शिकायत के बाद मामले में सुनवाई हुई और वाराणसी सर्कल सेकंड के अधीक्षण अभियंता अनिल वर्मा, नगरीय विद्युत मंडल तृतीय के अधिशासी अभियंता आरके गौतम और मैदागिन इलाके के तत्कालीन एसडीओ रवि आनंद और चौक एसडीओ सर्वेश यादव के खिलाफ दो अनाथालय के बच्चों को एक वक्त का भोजन करने का दंड दिया गया।
राज्य सूचना आयोग द्वारा दिए गए इस अनोखे दंड की इलाके में खूब चर्चा हो रही है। वहीं उमाशंकर यादव का कहना है कि अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। समस्या का यदि समाधान नहीं होता है तो न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।












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