छह दिन वाराणसी जेल में बंद रहे मुलायम सिंह यादव, जेल से छूटने के 20 दिन बाद किए समाजवादी पार्टी की स्थापना
रामकोला मिल गोलीकांड में किसानों से मिलने जाते समय मुलायम सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया गया था और वाराणसी सेंट्रल में जेल में रखा गया था। यहीं से समाजवादी पार्टी बनाने पर विचार किया गया।
मुलायम सिंह यादव का जीवन चुनौतियों से भरा रहा। सपा संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वाराणसी भी शोक व्याप्त है। मुलायम सिंह यादव का वाराणसी से खास लगाव था। वाराणसी के शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल में 6 दिनों तक मुलायम सिंह यादव बंद रहे और सेंट्रल जेल से ही समाजवादी पार्टी बनाने का विचार किया गया। मुख्यमंत्री रहने के दौरान मुलायम सिंह यादव द्वारा वाराणसी को कई परियोंजनाओं की सौगात भी दी गई थी।

जेल से छूटने के 20 दिन बाद बनाए समाजवादी पार्टी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य शतरूद्र प्रकाश के अनुसार सितंबर 1992 में देवरियां जिले के रामकोला मिल गोलीकांड में मृत किसानों और जेल में बंद किसानों से मिलने जाते समय कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पकड़े जाने के बाद 08 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव को वाराणसी सेंट्रल जेल में लाया गया। यहां पर छह दिन मुलायम सिंह यादव जेल में बंद रहे और इसी दौरान समाजवादी पार्टी की नींव रखने के बाबत विचार किए गए। 14 अक्टूबर को मुलायम सिंह यादव जेल से रिहा हुए और इसी के 20 दिन बाद समाजवादी पार्टी की स्थापना की गई।
रामनगर-सामनेघाट पुल का किए थे शिलान्यास
अखिरी बार सीएम रहने के दौरान मुलायम सिंह यादव ने वाराणसी में तीन पुलों की सौगात दी थी। जिसमें वाराणसी के रामनगर-सामनेघाट पुल को उन्होंने खुद शिलान्यास किया था। इसके अलावा वरुणा नदी पर शिवपुर से लोहता- लहरतारा इलाके को जोड़ने के लिए पिसौर पुल और हरहुआ मोहनसराय मार्ग पर कोईराजपुर गांव में कौरौत पुल का शिलान्यस भी 2006 में मुलायम सिंह द्वारा ही किया गया था। इन पुलों के बन जाने के चलते कई इलाकों का तेजी से विकास हुआ।












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