Varanasi में Zomato से मंगाया खाना तो ठगों ने बनाया निशाना, पेट और Bank Account दोनों हुए खाली, केस दर्ज
जोमैटो के माध्यम से खाने का आर्डर देना एक महिला को भारी पड़ गया। महिला को झांसे में लेकर ठग ने उसके खाते से 42500 रुपए ट्रांसफर कर लिया। केस दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

Varanasi जिले से ठगी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। खाना मंगाने के लिए एक महिला को ऑनलाइन आर्डर देना महंगा पड़ गया। Zomato से खाना मंगाने के चक्कर में उसके साथ साढ़े 42 हजार रुपए की ठगी हो गई। परेशान महिला द्वारा पुलिस से शिकायत की गई है और मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

ऑर्डर करने के बाद खाना आया नहीं डिलीवर्ड बताने लगा
वाराणसी जिले के छित्तूपुर लंका इलाके की रहने वाली प्रज्ञा सिंह ने बताया कि एक दिन उन्होंने जोमैटो एप पर खाने का ऑनलाइन ऑर्डर दिया। उन्होंने बताया कि खाने का आर्डर देने के बाद कुछ समय बाद उन्होंने ऐप पर चेक किया तो पता चला कि खाना डिलीवर्ड हो गया था जबकि उन्हें खाना मिला ही नहीं। काफी परेशान होने के बाद उन्होंने गूगल पर जोमैटो कंपनी का हेल्पलाइन नंबर तलाश किया। तलाश करने के बाद उन्हें एक नंबर मिला जिस पर संपर्क किया तो उस व्यक्ति द्वारा अलग-अलग टास्क समझाया गया। उस व्यक्ति द्वारा जैसा बताया गया प्रिया सिंह उस तरीके से करती चली गई और फोन कटने के बाद उनके बैंक अकाउंट से 42500 रुपए कट गए।

रुपए कटने का मैसेज आने के बाद हो गई परेशान
खाते से रुपए कटने का एसएमएस जैसे ही उनके मोबाइल पर आया वो परेशान हो गईं। प्रिया सिंह ने दोबारा उस नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन नहीं उठाया गया। फोन नहीं उठाए जाने के बाद रिया को अपने साथ ठगी का अहसास हुआ और उन्हें नहीं पुलिस के पास पहुंचकर इस मामले में शिकायत की। प्रिया की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस द्वारा मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। वहीं प्रिया सिंह के साथ हुई घटना को जिसने भी सुना हुआ वह हैरान है।
आप भी भूल कर ना करें ऐसी गलती
इस बारे में साइबर विशेषज्ञों से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि कभी भी किसी कंपनी का हेल्पलाइन नंबर गूगल पर सर्च नहीं करना चाहिए। अधिकतर साइबर ठगों द्वारा अपने मोबाइल नंबर को हेल्पलाइन तथा कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर बता कर फीड किया रहता है। जब भी कभी ग्राहकों द्वारा गूगल पर हेल्पलाइन नंबर दर्ज किया जाता है तो वही नंबर सबसे ऊपर दिखाई देता है। ऐसे में जब ग्राहक उस नंबर पर फोन करते हैं तो सामने वाला ठग खुद को कस्टमर केयर अधिकारी या कंपनी से जुड़ा अधिकारी बताकर मोबाइल में एनीडेस्क या फिर अन्य थर्ड पार्टी ऐप इंस्टॉल करवाता है। थर्ड पार्टी ऐप इंस्टॉल कराने के बाद वह ठगी की घटना को अंजाम देता है। ऐसे में साइबर विशेषज्ञों द्वारा सलाह दी गई है कि कभी भी गूगल पर मिलने वाले हेल्पलाइन नंबर या कस्टमर केयर नंबर पर फोन नहीं करना चाहिए। शिकायत करने के लिए संबंधित कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या फिर एप्लीकेशन की मदद लेनी चाहिए।
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