सावधान! ग्राहक सेवा केंद्र लेनदेन के लिए सुरक्षित नहीं है? इन बातों का हमेशा रखें ध्यान
ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों द्वारा खाताधारकों से ठगी के मामले सामने आने के बाद ग्राहक काफी परेशान हैं। लोगों के मन में सवाल है कि ग्राहक सेवा केंद्र लेनदेन के लिए सुरक्षित है या नहीं?
वाराणसी, 19अगस्त: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक खाताधारकों की सुविधा के लिए जगह-जगह पर ग्राहक सेवा केंद्र बनाए गए हैं। एटीएम न होने की दशा में और बैंक में लगने वाली लंबी लाइन से बचने के लिए लोगों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्रों का सहारा लिया जाता है। लेकिन बलिया में ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों द्वारा ठगी के मामले सामने आने के बाद खाताधारकों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। बलिया में ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों द्वारा ग्राहकों को धोखे में रखकर उनके खाते से पैसे निकाल लिए गए। बलिया पुलिस ने पांच शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ किया तो इस मामले का खुलासा हुआ। फिलहाल सवाल उठता है कि ग्राहक सेवा केंद्र पर जाने के बाद ग्राहक अपने खाते को कैसे सुरक्षित रख सकें।

अशिक्षित लोगों को ही बनाते हैं निशाना
एटीएम कार्ड पास में न होने पर ग्राहक सेवा केंद्र पर अंगूठा लगाने के बाद आसानी से रुपए निकाले और जमा किए जा सकते हैं। अशिक्षित लोगों को बैंक द्वारा एटीएम कार्ड भी नहीं जारी किया जाता है, ऐसे में पैसा निकालने और जमा करते समय बैंक में लगने वाली लंबी लाइन से बचने के लिए अधिकतर लोगों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र का सहारा लिया जाता है। ऐसे में उनको बरगलाते हुए ग्राहक सेवा केंद्र संचालक उनका डाक्यूमेंट्स जमा करवा लेते हैं या उनके अंगूठे की क्लोनिंग कर लेते हैं।

रबर के बनाए हुए आधा दर्जन अंगूठे हुए थे बरामद
बलिया पुलिस द्वारा बुधवार को जिन पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया उनके पास से पुलिस ने फिंगरप्रिंट क्लोन किए हुए आधा दर्जन रबर के अंगूठे को भी बरामद किया था। इसके अलावा फर्जी मुहर और आधार कार्ड स्कैनिंग मशीन, एटीएम स्वैपिंग मशीन, लैपटॉप, थर्मल रिसिप्टर आदि भी बरामद किया गया था। पुलिस ने धारा 66डी आईटी एक्ट व 419, 420, 467, 471, 120-बी आईपीसी के तहत मुकमदमा दर्ज करते हुए सभी अभियुक्तों को न्यायालय के समझ प्रस्तुत किया गया।

फर्जी खाता भी खोल रखे थे अभियुक्त
पकड़े जाने के बाद पुलिस की पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया था कि आधार कार्ड और पैन कार्ड की फोटो कॉपी लेने के बाद ग्राहकों के नाम से दूसरा खाता खोल लिया गया। इस खाते की जानकारी ग्राहक को भी नहीं थी। कम रुपयों को ये खुद से निकाल लेते थे जबकी सीएसपी सेंटर से अधिक रुपए न निकलने की स्थिति में ये लोग फर्जी खाते में रुपए ट्रांसफर कर देते थे। उस खाते से धीरे-धीरे रुपए निकालकर सभी लोग आपस में बांट लेते थे। इन लोगों ने बलिया जिले के कुसौरी कला गांव निवासी इन्द्र प्रकाश पांडेय के खाते से इसी तहर ढाई लाख रुपए निकाल लिए थे। उसी मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद से ही पुलिस इनकी तलाश कर रही थी।

कई कंपनियों द्वारा दी जा रही एईपीएस की सुविधा
बैंकिंग के जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में कई ऐसी निजी कंपनियां हैं जिनके द्वारा एईपीएस (आधार कार्ड भुगतान प्रणाली) की सुविधा प्रदान की जाती है। कोई भी ग्राहक वहां पहुंचने के बाद अपना अंगूठा लगाकर आसानी से रुपए निकाल सकता है। ऐसे में उनके द्वारा भी ग्राहकों से ठगी हो सकती है। बैंक द्वारा रजिस्टर्ड सीएसपी से पैसे निकालने पर ठगी होने की कम संभावनाएं रहती हैं, हालांकि यहां भी ग्राहकों को सावधानी बरती होगी।

मात्र इतनी सावधानी बरतने से रहेंगे सुरक्षित
इस मामले में आनलाइन बैंकिंग के जानकार वाराणसी जिले के हरहुआ के रहने वाले जयचंद मोदनवाल से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए खाता धारकों को अपने खाते से मोबाइल नंबर जरुर जोड़ना चाहिए। ऐसा करने से जब भी खाते से ट्रांजैक्शन होगा तो उनके मोबाइल पर तुरंत मैसेज आ जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हर सीएसपी संचालकों द्वारा रजिस्टर मेंटेन किया जाता है उसे भी जरुर देखें। जमा या निकासी करने के बाद रसीद लेना न भूलें। पेमेंट फेल हो जाने के बाद भी रसीद दी जाती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जब भी रुपए जमा करें या निकालने जाएं तो खाते के शेष रुपए के बारे में भी जरुर पूछें। ऐसा करने से काफी हद तक ठगी से बचा जा सकता है।












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