डिप्टी सीएम बोले- श्रीराम जन्मभूमि की तरह सुलझेगा ज्ञानवापी मामला, सर्वे से सामने आएगी सच्चाई
Gyanvapi: वाराणसी ज्ञानवापी मामले में हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। फ़ैसले में कहा गया कि न्याय के हित में ज्ञानवापी सर्वेक्षण कराया जाना जरूरी है। ज्ञानवापी मामले पर हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद यूपी के डिप्टी सीएम का भी बयान सामने आया है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का हृदय से स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि एएसआई सर्वे के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी।

आगे उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी का जो विवाद है, श्री राम जन्मभूमि विवाद की तरह इसका भी निर्णय निस्तारण होगा और शिव भक्तों की मनोकामना पूर्ण होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुगल आक्रमणकारियों द्वारा जिस तरीके से मंदिर का विध्वंस किया गया था, वह सब एसएआई सर्वे में सामने आ जाएगा।
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दरअसल, वाराणसी के जिला अदालत में चल रहे ज्ञानवापी मामले में सुनवाई करते हुए बीते 21 जुलाई को जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत द्वारा ज्ञानवापी परिसर के वजू खाने को छोड़कर अन्य स्थानों का एएसआई सर्वे कराने का आदेश दिया गया था।
आदेश में यह भी कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर में सर्वे किए जाने के बाद 4 अगस्त तक इसकी रिपोर्ट जिला जज की अदालत में पेश की जानी चाहिए। ऐसे में एएसआई की टीम 24 जुलाई को सुबह 7:00 बजे ज्ञानवापी परिसर में सर्वे करने के लिए पहुंच गई थी।
टीम के पहुंचने के बाद मुस्लिम पक्ष द्वारा इसमें कोई सहयोग नहीं दिया गया हालांकि इसी बीच मुस्लिम पक्ष एएसआई सर्वे पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 24 जुलाई को ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वे पर रोक लगा दिया गया।
उसके बाद मुस्लिम पक्ष की अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने की सलाह दी गई थी। इस मामले में 3 दिन तो सुनवाई चली और 27 जुलाई को हाई कोर्ट फैसला सुरक्षित करते हुए सर्वे पर रोक जारी रखने का आदेश दिया था। इसी मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट द्वारा ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वेक्षण कराए जाने पर फैसला सुनाया गया।












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