'यूपी में का बा' गाने वाली नेहा राठौर ने भाजपा सांसद रवि किशन के तंज का दिया जवाब
वाराणसी, 19 जनवरी: 'का बा' फेम लोक कवि और गायिका नेहा सिंह राठौर इन दिनों यूपी चुनाव के बीच बनारस आई। बिहार के बाद अब यूपी में का-बा के चर्चित होने पर उन्होंने एक तरफ जहां सरकार से सवाल किए तो खुद को जनता की आवाज बताई। काशी आई नेहा से कुछ सवाल हुए जिसका जबाब होने अपने अंदाज में दिया। सबसे पहले नेहा ने यूपी में काम बा कि लाइनों का जिक्र करते हुए कहा 'बाबा का दरबार बा, खतम रोजगार बा, हाथरस क निर्णय जोहत लड़की क परिवार बा, ए बाबा का- बा । यूपी में का - बा ?
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रवि किशन के बयान पर क्या बोलीं नेहा राठौर
करोना के समय में जैसे रोजगार और श्रमिक लौटे थे तो बिहार चुनाव में आपने उसका मुद्दा उठाया था, यूपी के लिए क्या लगता है या मुद्दा होगा जो आपके गाने में चार पांच लाइनें आई हैं? इस पर नेहा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि चार पांच लाइनों में पूरा यूपी सिमट जाता है। बहुत सी ऐसी चीज है। गाने तो पार्ट वन अभी आया है पार्ट सेकेंड भी मैं जल्दी गाने वाली हूं। मैं लिखने वाली हूं। रवि किशन जी ने कहा कि मैं सपा की भाषा बोल रही हूं। पेड कलाकार हूं। ये सब कहना उनका काम है, ऐसा वे कहेंगे। पर ऐसी बात नहीं है, मैं लोक कवि हूं, लोक गायिका हूं, जनता की आवाज बुलंद करती रहूंगी। करती रही हूं आगे भी करूंगी।

'हमारा यह फर्ज और धर्म है कि जनता की आवाज को बुलंद करूं'
नेहा सिंह राठौड़ ने कलाकारों के राजनैतिक तौर पर बंटे होने के सवाल पर कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, और मैं अगर गाती हूं तो कोई पार्टी गिराने या कोई पार्टी बनाने के लिए नहीं गाती हूं। लोग कहते हैं कि आप जो गाती हैं, उससे विपक्ष को सीधा फायदा होगा। जाहिर सी बात है फायदा होना भी चाहिए। क्योंकि जनता हमेशा विपक्ष के रोल में ही रहती है और हर विपक्षी जो पार्टी होती है तो वह जनता के ही मुद्दे को लेकर आती है। 2014 की बात देख लीजिए, 2017 की बात देख लीजिए। कोई सिलेंडर लेकर बैठा, कोई प्याज की महंगाई पर बोला फिर जब उनकी सरकार बनती है तो सुर भी बदल जाते हैं। मैं खुद को लोक कवि बोलती हूं, लोक गायिका बोलती हूं। हमारा यह फर्ज और धर्म है कि जनता की आवाज को बुलंद करूं, ना कि किसी पार्टी की तरफदारी करूं, पक्ष और विपक्ष ना करूं। मैं सफाई नहीं देना चाह रही हूं फिर भी मैं बता रही हूं ताकि लोग गलत अफवाहों में न फंसे, मुझे भी कहा गया कि तुम आरजेडी की एजेंट हो, आरजेडी हार गई। भैया हार गई या आरजेडी को जनता ने हरा दिया, इसमें मैं क्या करूं। वह तो बिहार की जनता ने डिसाइड किया कि नेता किसको चुनना है, पर आप सत्ता में जीते या हारे क्या मतलब है, सत्ता में होने पर सवाल आपसे ही होगा।

'मेरा कोई नहीं है। मैं जनता की हूं'
नेहा से पूछा गया कि आप 'बिहार में का - बा गाती हैं, यूपी में का - बा गाती हैं पर बंगाल में का - बा नहीं गाती है? नेहा ने जबाब दिया कि बंगालियों की तो हिंदी कमजोर होती है, उनको भोजपुरी तो क्या ही समझ में आएगी। अब उनको क्या पता है कि एक लड़की नेहा सिंह राठौर है भोजपुरी में गाना गा रही है । अब जैसे यूपी में चुनाव है तो बांग्ला में गाना गाना शुरू कर दूं, मलयालम में गाना गाना शुरू कर दूं, यूपी की कोई जनता सुनेगी क्या? उसे तो यूपी में का- बा ही पसंद आएगा, उसे भोजपुरी समझ में आती है। बंगाल में बंगाली बोली जाती है। तो लोग कनेक्ट नहीं कर पाएंगे। मैंने गाया था, ऐसा नहीं है कि दीदी के पक्ष में गाना गाया था बिल्कुल वह गाना वैसा नहीं है उस टाइम में जोगीरा सा रा रा रा करके मैंने गाया था, उसमें भी सवाल किया था। जो गाना मैंने गाया था दीदी के पक्ष में नहीं गया था। ना दीदी मेरी है, ना मोदी जी मेरे, और ना योगी जी मेरे है, मेरा कोई नहीं है। मैं जनता की हूं।

'हर गवर्नमेंट की कुछ अच्छाइयां होती है, कुछ बुराइयां होती हैं'
काशी विश्वनाथ धाम घाटों के सुंदरीकरण, काशी में चलने वाले क्रूज और काशी में टूरिज्म को लेकर जब नेहा से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहती हूं। कोई भी गवर्नमेंट कभी भी पूरी तरीके से फेल नहीं होती है, और पूरी तरीके से सफल भी नहीं होती है। हर गवर्नमेंट की कुछ अच्छाइयां होती है, कुछ बुराइयां होती हैं, अच्छे का बता रहे हैं प्रचार कर रहे हैं तो भैया जनता की भी बात सुनिए । इतनी हिम्मत रखिए कि उसको भी यकीन मानिए। उस टाइम में वह गंगा घाट थे जहां कुत्ते- बिल्ली लाशें नोंच रहे थे, वह भी एक सच्चाई है, वह भी एक सीन था। तो नेहा सिंह जब वह सीन बता रही है तो आप कह रहे हैं झूठ है। झूठ तो नहीं है सर। पॉजिटिव - निगेटिव होती है। आपको दरियादिली दिखा करके एक्सेप्ट करना चाहिए ना कि ट्रोल आर्मी के साथ मुझे ट्रोल कर देना चाहिए।












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