भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर जादुंग गांव में होम स्टे,प्राकृतिक रोमांच पर्यटन के लिए हो जाएं तैयार

भारत-चीन के बॉर्डर पर प्राकृतिक रोमांच पर्यटन का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाइए। बॉर्डर के जादुंग गांव में होमस्टे बनने शुरू हो गए हैं। जिसमें पहले चरण में 6 होमस्टे बन रहे हैं। इसके बाद दूसरे चरण में 17 होमस्टे बनाए जाएंगे। जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है पर्यटकों को ये जगह खास पसंद आएगी।

ये गांव 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय खाली कराए गए थे। भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे जादुंग गांव को दोबारा बसाने के लिए पर्यटन विभाग और गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से 6 होमस्टे के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है।

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शासन ने इसके लिए करीब साढ़े तीन करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। इसमें ​कुल 17 होमस्टे का निर्माण होना है। उत्तरकाशी के गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले नेलांग और जादूंग गांव समुंद्र तल से 11,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 1962 युद्ध से पहले उत्तरकाशी के नेलांग और जादूंग गांव में रोंगपा या भोटिया जनजाति के लोग रहा करते थे।

युद्ध के समय किया था शिफ्ट
युद्ध के दौरान उन्हें बगोरी गांव में शिफ्ट किया गया, तब से कई परिवार आज भी वहीं रह रहे हैं। युद्ध के बाद नेलांग और जादूंग गांव के घरों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने अपनी चौकियां बना ली थी।

पर्यटकों को मिलेगा रुकने का मौका
आज भी इस गांव में कई बंकर और घरों को आईटीबीपी इस्तेमाल कर रही है। साल 2015 के बाद यहां स्थित भारत-तिब्बत व्यापार मार्ग यानी गरतांग गली को भी दोबारा से ठीक किया गया है। अब गंगोत्री नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों को ऐतिहासिक जगह पर रुकने का मौका मिलेगा।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों को दोबारा बसाने की पहल
केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों को दोबारा बसाने की ये पहल है। योजना के तहत भारत-चीन युद्ध के समय उत्तरकाशी जनपद में खाली किए गए गांव जादुंग और नेलांग के ग्रामीणों को दोबारा वहां पर बसाने की तैयारी की गई थी। उस समय इन गांवों के ग्रामीणों को हर्षिल के समीप बगोरी गांव में बसाया गया था।

ग्रामीण दोबारा गांव में लौटेंगे
शीतकाल में यह ग्रामीण डुंडा विकासखंड के वीरपुर गांव में रहते हैं। अब दोबारा ग्रामीण अपने गांव जा सकेंगे। इसके साथ ही शानदार रोजगार से भी जुड़ेंगे। यहां प्रथम चरण में 6 होमस्टे के निर्माण का कार्य शुरू हो गई है। योजना के तहत वहां पर मुख्य पैदल रास्तों का टाइल्स के साथ और तीन स्थानों पर व्यू प्वाइंट का निर्माण किया जाना है।

जनकताल ट्रेक प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच
जादुंग गांव में होमस्टे बनने के बाद पर्यटक यहां आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले सकेंगे। करीब 10 किमी का जनकताल ट्रेक भी प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच को और बढ़ाएगा। उत्तरकाशी जिला प्रशासन और गंगोत्री नेशनल पार्क जनकताल तक ट्रेकिंग की तैयारी कर रहा है।

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